बिगड़ी खेती छीन रहा है महिलाओं का रोजगार

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मनीष अग्रहरि

नीति आयोग से जुड़ी एक हालिया रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि बीते वर्षो में जलवायु परिवर्तन की वजह से बिगड़ी खेती ने एक चौथाई ग्रामीण महिलाओं का रोजगार छीन लिया है। ज्यादातर महिलाओं के अशिक्षित होने के कारण दूसरा रोजगार भी उन्हे नही मिल पा रहा है। हिंमाचल प्रदेश, तामिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात,मध्य प्रदेश तथा हरियाणा में हुए इस अध्ययन के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान कर्नाटक के ग्रामीण महिलाओं को हुआ है।

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नीति आयोग की सुनीता संघी के नेतृत्व में श्रिजा एवं सिरके श्रीनिवास विजय द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक देश में 2005 से 2011 के बीच कुल महिला श्रमिको में 25 फीसदी की गिरावट आई है। आयोग का मानना है कि इसके पीछे बिगड़ी खेती है जिससे जर्बदस्त जेंडर गैप भी बन गया है।

ग्रामीण महिला श्रमिको का जेंडर गैप

राज्य                2004-2005          2011-2012             अंतर

हिंमाचल प्रदेश            5                         2                               -3

तामिलनाडु                 14                       22                             8

कर्नाटक                     17                    33                             16

ग्ुजरात                     17                    32                            15

मध्य प्रदेश                   18                   33                                15

हरियाणा                    22                   37                             15

इस बावत किए गए अध्यन की नेतृत्वकर्ता सुनीता संघी के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रो की 69 फीसदी महिलाए मात्र प्राईमरी जमात पास है जिसके कारण ज्यादातर महिलओं को खेती ही रोजगार मुहैया कराता है मगर खेती जब बिगड़ रही है तो अर्थव्यवस्था में दूसरा कोई मजबूत बिकल्प नही बच पाता है।सी तरह कृषि तथा ग्रामीण महिला मुद्दो पर काम करने वाली संस्था ग्रामीण डेवलपमेंट सर्विसेस, लखनऊँ की सीनियर प्रोग्राम मैनेजर डाॅं मांडवी दीक्षित ने पंचायत खबर को बताया कि प्राकृतिक आपदाओं की सबसे बुरी तरह से शिकार ग्रामीणमहिलाए ही होती है। डां दीक्षित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रो को याद करते हुए बताती है कि जब भी कही बाढ़ आती है तो पुरूष आसानी से भागने में सफल होते है जब कि महिलाए अपने पहनावे, बच्चो की देखभाल या गर्भावस्था जैसे अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण फंस जाया करती है। ठीक इसी तरह आग लगने पर सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को उठाना पड़ता है।एैसे में ग्रामीण महिलाए जब सबसे ज्यादा खेती का काम निपटाती है तो बिगड़ी खेती के चपेट में आना स्वाभाविक है।डाॅं दीक्षित कहती है कि सरकार को प्राकृतिक आपदाओं समेत अन्य नीतियो को

बनाते समय महिलाओं को हाशिए पर रख दिया जाता है जब कि महिलाओं के सहूलियतो के हिसाब से नीतियो को बनाना चाहिए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को टाॅनिक मिल सकती है।

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