स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए MAA प्रोग्राम का लांच किया
संतोष कुमार सिंह
नई दिल्ली : मां का दूध पीये हो तो फरिया लो। मां ने दूध पिलाया है क्या? तुम्हारी मां ने तो दूध ही नहीं पिलाया। ऐसे ताने बचपन से लेकर जवानी तक अनेक बार हमें अपने संगी साथियों से सुनने को मिलते हैं। कई बार मां भी यह कहते हुए मिल जाती हैं कि दूध का कर्ज चुकाओ आदि। लेकिन क्या आपने सोचा है मां के दूध में क्या है? क्यों मां का दूध बच्चे के लिए जरूरी है? वैसे तो हकीकत यही है कि सब मायें चाहती हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ हो। वे बच्चों को स्तन पान कराती हैं। लेकिन कई बार उन्हें पता ही नहीं होता कि बच्चों को स्तनपान कैसे कराना है। कब से स्तनपान कराना है? कितने दिनों तक स्तनपान कराना है?
इन्हीं सब बातों पर आपका ध्यान आकृष्ट कराने आयी हैं अपने जमाने की धकधक गर्ल और दो स्वस्थ बच्चों की माँ, युनिसेफ की सेलेब्रिटी एडवोकेट माधुरी दीक्षित। माधुरी ने केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किए एक प्रमख कार्यक्रम MAA (मदर्स एब्ज़ोल्यूट अफेक्शन) का लांच करते हुए इस बात ज़ोर दिया कि माँ का दूध बच्चे के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है। उन्होंने बताया कि‘‘बच्चे के जन्म के एक घण्टे के अंदर स्तनपान शुरू कराना और पहले छह महीने तक उसे केवल स्तनपान पर रखना बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए बेहद ज़रूरी है।’’ लेकिन स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जागरुकता पैदा करना अनिवार्य है। स्तनपान सुनिश्चित करता है कि हमारे बच्चे सही पोषण के साथ अपने जीवन की शुरूआत करें।
इसी माह शुरू किए गये इस देशव्यापी अभियान के मौके पर केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे पी नड्डा ने कहा कि‘‘स्तनपान सबसे प्राकृतिक एवं लागत प्रभावी हस्तक्षेप है और सभी स्तरों पर इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण संसाधन है जो हर बच्चे को उपलब्ध होना चाहिए। दुनिया के इस सबसे प्रभावी निवेश को मानवमात्र के विकास के लिए हर बच्चे तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।’’ उन्होनें कहा कि प्रजनन, मातृत्व, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य (RMNCH+A) के प्रति सामरिक दृष्टिकोण के साथ जीवन की सभी अवस्थाओं पर ध्यान देना ज़रूरी है। इसके फायदे को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्तनपान बच्चों को मृत्यु, बीमारी और अन्ततः गरीबी से बचाने के लिए पहला महत्वपूर्ण टीकाकारण है, यह शारीरिक, संज्ञानात्क एवं सामाजिक क्षमता के विकास में हमारा सबसे कीमती निवेश है।
लेकिन सवाल है कि यह बात सर्वविदित है कि बच्चों को मां का दूध चाहिए। फिर मां अपने बच्चों को स्तन पान क्यों नहीं कराती। इस विंदू पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि जागरुकता इस दृष्टि से बहुत अधिक मायने रखती है और हमें इससे जुड़े मिथकों और गलत अवधारणाओं को दूर करना होगा। उन्होंने बताया कि स्तनपान माँ और बच्चे के बीच एक विशेष सम्बन्ध बनाता है। स्तनपान के दौरान माँ और बच्चे के बीच होने वाली बातचीन उसके जीवन, व्यवहार, भाषा आदि के विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
वही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि स्तनपान बच्चे के अस्तित्व में सुधार लाने के लिए अनिवार्य है। बच्चों में होने वाली 13 फीसदी मौतें स्तनपान की अनुचित प्रथाओं के कारण होती हैं। पटेल ने कहा कि मंत्रालय एक ऐसा वातावरण विकसित करने के उद्देश्य के साथ MAA -मदर्स एब्ज़ोल्यूट अफेक्शन का लान्च कर रहा है जहां सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाओं, उनके पतियों और परिवारों को स्तनपान और इसकी उचित प्रथाओं के बारे में जानकारी एवं सहयोग दिया जा सके।
क्या कहते हैं आंकड़े
—भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच होने वाले 80 फीसदी डिलिवरी के मामलों में मात्र 45 फीसदी बच्चों को जन्म के पहले घंटे में विशिष्ट स्तनपान कराया जाता है।
— केवल 65 फीसदी बच्चे ही जन्म के 6 माह तक मां के दूध पर पूरी तरह से निर्भर रहते हैं।
— 6—8 माह के बीच के 50 फीसदी बच्चों को मां के दूध के साथ अतिरिक्त आहार दिया जाता है।
— स्तनपान बच्चों के जीवन को बचाने के लिए बहुत ही जरूरी। स्तनपान की कमी की वजह से लगभग 20 फीसदी नवजात शिशू और लगभग 13 फीसदी बच्चों की 5 वर्ष से कम आयु में मृत्यू हो जाती है।
— भारत में प्रत्येक वर्ष स्तन पान के द्वारा 156,000 हजार बच्चों को मौत से बचाया जा सकता है।
—3.4 मिलियन बच्चों में पाचन संबंधी संक्रमण वा 3.9 मिलियन बच्चों को डायरिया के प्रकोप से बचाया जा सकता है।
आंकड़ो से स्पष्ट है कि मां का दूध आपके बच्चों को न सिर्फ जीवन देता है बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ भी बनाता है। तो फिर देर किस बात की क्या आप नहीं चाहतीं कि जब कोई आपके बच्चे से पूछे कि मां ने दूध पिलाया क्या, तो वह कह सके हां मैंने मां का दूध पीया है और यदि आपने आज अपनी जवाबदेही समझी तो निश्चित रूप से वो दिन दूर नहीं जब आपका बच्चा बड़ा होकर इतना सबल बन सकेगा कि वह दूध का कर्ज उतार सके।

