
केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने आज हरियाणा के हिसार में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एंव पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षान्त समारोह में छात्रों को संबोधित किया। वे लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एंव पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह में लाला लाजपत राय जी का 151 वां जन्म दिवस के अवसर पर बोल रहे थे।
राधा मोहन ने कहा कि पशु विज्ञान सम्बन्धी सेवाओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों का उत्थान व सशक्तिकरण आपके विश्वविद्यालय की स्थापना और विकास का द्योतक हैं। यह सशक्तिकरण न केवल निर्माण बल्कि पूर्ण हरियाणा वासियों के सामाजिक व शैक्षिण उत्थान के लिए होना चाहिए। आपको अपने कार्यक्षेत्र में जाने से पहले गांधी जी के कथन की याद दिलाना चाहता हूं। उन्होंनें कहा था कि जिस प्रकार अनुसन्धान कार्यों के लिए आपको 24 घंटे जुटा रहना होता है उसी प्रकार आप करोड़ो गरीबों व गरीब किसानों के उत्थान के प्रति मन और कर्म से 24 घंटे समर्पित रहें।

पिछले कुछ दशकों में कृषि क्षेत्र में पशुधन के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि देखी गई है। मगर गरीब उत्पादक व उपभोक्ता दोनों ही इसके लाभ से वंचित रहे हैं। केन्द्रीय व राज्य सरकारें, दोनों ही पशुधन क्षेत्र की नीतियों में उल्लेखनीय बदलाव के इच्छुक हैं जो विकास को ऐसी दिशा दे जिससे पशुधन उत्पादन बढ़े तथा गरीबी उन्मूलन में योगदान हो सके। उन्नीसवीं अखिल भारतीय पशुधन-गणना के अनुसार 2012 तक देश में 512 मिलियन पशुधन संख्या थी जो कि विश्व स्तर पर प्रथम स्थान पर थी जबकि वह 2007 की पशुधन संख्या से 3.33 प्रतिशत कम थी। इसके अतिरिक्त 729 मिलियन कुक्कुट थे। कृषि कार्यों के मशीनीकरण के कारण पशुधन का उपयोग इस क्षेत्र में कम हो रहा है। आर्थिक विकासए आय के साधनों में वृद्धिए शहरीकरण, परिवर्तित जीवन-शैलीए विभिन्न कार्यक्षेत्रों में महिलाओं की वृद्धि, यातायात व खाद्य संरक्षण संसाधनों का विकास तथा बढ़ती हुई सुपरमार्किटों के कारण पशु जन्य खाद्य पदार्थों का महत्व बढ़ा है।
हरियाणा सरकार ने अभी-अभी हरियाणा गोवंश संरक्षण व गोसंवर्धन एक्ट न. 20ए, 2015 पास किया है जिसके अनुसार सरकार ऐसी प्रयोगशालाओं की स्थापना करेंगी जिनमें गोमाँस तथा अन्य पशुओं के माँस का विभेदीकरण किया जा सकेए दुग्ध व दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता एवं दूध में ।1 व ।2 गुणों की जांच व पहचान की जा सके ताकि गुणवत्ता आधारित प्रोत्साहन प्रदान किए जाएं। मुझे यह जानकर अत्यन्त हर्ष हुआ है कि दुग्ध व दुग्ध उत्पादों की जांच के अतिरिक्त, गाय व भैंस के माँस में विभेदीकरण करने में लुवास ने नई तकनीक विकसित की है। मैं इस अवसर पर यह बताना चाहूंगा कि इस सरकार ने देशी मवेशियों के नस्ल के सुधार एवं विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन‘‘ को लागू किया है।

भारत वर्ष विश्व भर में अधिकतम दुग्ध उत्पादक देश है तथा कुल उत्पादन का 13.1 प्रतिशत दूध उत्पादन यहाँ होता है। फिर भी भारत में 252 ग्राम प्रति व्यक्ति दूध प्राप्त होता है जो कि 265 ग्राम प्रति व्यक्ति विश्व की औसत से कम है। भारत का विश्व भर में अंडा उत्पादन में पांचवा तथा कुक्कुट पालन में अठारहवां स्थान है। हमारी कुक्कुट पालन क्षेत्र की वार्षिक वृद्धि दर 8 से 10 प्रतिशत बनी हुई है। दुग्ध व दुग्ध उत्पादों की मांग 142 मिलियन टनए अंडो की खप्त 81 मिलियन टन हैं। सन् 2020-21 तक माँस की 10.9 मिलियन टन तथा मछली की खपत 11 मिलियन टन बढ़ने की आशा है। 2014-15 में हरियाणा में कुल 79 लाख मिट्रिक टन दुग्ध का उत्पादन हुआ जिस कारण प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 805 ग्राम दुग्ध उपलब्धता रही जो पंजाब के बाद पूरे भारत में सर्वोतम हैं।
कम उत्पादकताए पशु आहार एवं चारे की कम उपलब्धताए पशुओं में बीमारियों की अधिकता, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक स्रोतों का कम होनाए पशुपालकों में प्रबोध का अभाव, बाजारीकरण तथा गुणवत्ता पूर्ण पशुजन्य उत्पादों के विधिकरण के लिए अनुकूल संसाधनों की कमी आदि समस्याओं के समाधान हेतु, केन्द्रीय सरकार ने वर्ष 2013 में राष्ट्रीय पशुधन नीति निर्धारित की है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य है कि पशु उत्पादकता में इस प्रकार वृद्धि की जांए ताकि पर्यावरणए पशुओं में जैव विविधताए जैव्य संरक्षणता तथा पशुपालकों की आजिविका में निरन्तरता बनी रहे। राष्ट्रीय पशुधन नीति इस को निश्चित करेगी कि पशुओं में बीमारियों के नियंत्रण में अन्तर-प्रदेशीय मेल-जोल बने, पशु तथा पशुजन्य पदार्थों का वैश्विक आयात-निर्यात बढ़ेए पशु-दानें व चारे का उत्पादन बढ़ेए जैव्य विविधता का सरंक्षण एंव् संवर्धन हो जोकि पशुधन क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है।
लुवास तथा राज्य पशु पालन विभाग के सम्मिलित प्रयासों के कारण हरियाणा मुँह-खुर रोग नियंत्रित देश का पहला राज्य बन गया है। इस उपलब्धि को प्राप्त करने के लिए लुवास में स्थापित मुँह-खुर रोग के क्षेत्रीय अनुसन्धान केन्द्र द्वारा किए गए प्रयास प्रशंसनीय है। देश की विस्तृत व विविध पशुधन सम्पदा हमारे देश के करोड़ो लोगों को मुख्य एंव् अतिरिक्त जीविका के साधन प्राप्त कराती है। हम इस सम्पदा का उपयोग पशुपालकों के लाभ तथा उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के निमित कर रहे है। इस विश्वविद्यालय द्वारा हालेस्टीन फ्रिजियन, हरियाणा तथा साहीवाल प्रजातियों के संकरण से एक नई गोप्रजाति ङरद्येनू विकसित की गई है, जिसके कारण हमारे पशुपालक लाभान्वित् होंगे। लुवास गोपशु पालन पर हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण देने की सुविधा प्रदान करता है हजारों पशुपालक तथा बेरोजगार युवक एंव् युवतियां हमारे वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण प्राप्त कर लाभान्वित हो रहे हैं।अन्तर-संस्थानीय नेटवर्किग के माध्यम से दूर दराज के गावों तक नीतियों एंव् विकास कार्यक्रमों को पहुँचा कर लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है। इस संदर्भ में ष्भारत के मिल्क मैनष् डॉ. कुरियन के शब्दों को दोहराना चाहता हूँ कि श्इस सौरमण्डल मेंए भारत का स्थान इसके ग्रामीणों की बुद्धिमत्ता तथा वैज्ञानिकों की बोधिकता के बीच संवाद स्थापित करने से जाना जाएगाश्।
लुवास के अनुसन्धान, शिक्षण, प्रशिक्षण एंव विस्तार क्षेत्र में किए गए प्रयास प्रंशसनीय है। जान कर खुशी हुई कि लुवास ने विविध स्थानीय दुग्ध उत्पाद गुणवत्ता पूर्ण तथा स्वास्थय-वर्द्धक भोज्य उत्पादों को विकसित किया है। खुशी की बात है कि लुवास द्वारा विकसित तकनीकों के व्यवसायीकरण हेतु उद्योगपतियों के साथ सहयोग स्थापित किया जा रहा है। इन विषयों पर लुवास जैसे संस्थान विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से नीति निर्धारकों तथा जनसाधारण का आवश्यकता अनुसार मार्ग दर्शन कर सकते हैं।
देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने अपनी पुस्तक सांइटिफिक इण्डियन में लिखा है कि पशुधन किसानों के लिए व्यवसाय व आमदनी प्रदान करने का एक अच्छा स्रोत् है, मझोले किसानों के लिए 70 प्रतिशत से अधिक आय का साधन है हालाँकि यह केवल 5 प्रतिशत लोगों के लिए ही स्थायी व्यवसाय बन सका है। इस पुस्तक में पशुधन क्षेत्र द्वारा भारत के आर्थिक विकास में योगदान का वर्णन हैं। आर्थिक क्षेत्र के सतत् समग्र विकास के लिए उत्तम जनसंसाधन आवश्यक हैं। मैं विश्वास करता हूँ कि लुवास अपने स्नातकों के माध्यम से इस क्षेत्र के राष्टीªय उद्देश्यों को पूर्ण कर पाएगा। अन्त में मैं आप सब को समरण कराना चाहता हूँ कि वर्ष 2016 पूज्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जन्मशती वर्ष है और उनके ‘अन्तयोदय के सपनें को बिना गरीब व छोटे किसानों के सशक्तिकरण के पूरा नहीं किया जा सकता। वर्तमान भारत में पशु पालन सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से पिछड़े नागरिकों के सपनों का द्योतक हो सकता है।