कीवी ने दिलाई अलग पहचान, भवान सिंह ने किया कमाल

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भावना त्रिपाठी

बागेश्वर जिले का शामा क्षेत्र कीवी के हब के रूप में जाना जाता है। इसका श्रेय शामा निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य भवान सिंह कोरंगा को जाता है। हर क्षेत्र की तरह खेती –बाड़ी में भी अलग-अलग तरह के प्रयोग किए जा रहे है । किसान परंपरागत खेती छोड़कर नई फसलों और आधुनिक तकनीकों की ओर रूख कर रहें है।भवान सिंह ने भी अलग राह चुनी और आज कीवी की खेती से लाखों कमा रहे है ।

किसानों को दे रहें है मार्गदर्शन

उत्तराखंड के रहने वाले भवान सिंह ने 2008 में कीवी की खेती शुरू की थी। आज उनका नाम जिले के प्रमुख कीवी उत्पादकों की सूची में शामिल है। इतना ही नहीं वह किसानों को कीवी उत्पादन का प्रशिक्षण भी देते है।

जूस और कैंडी बनाकर कमा रहे है लाखों

भवान सिंह न केवल कीवी की खेती करते है बल्कि उन्होंने अपने गांव में फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है। इस यूनिट में वह कीवी से अलग-अलग जूस और कैंडी तैयार करते है।जूस और कैंडी बेचकर वे हर महीने लाखों की कमाई कर रहे है ।
कीवी की खेती कर हुए मालामाल

भवान सिंह के पास कीवी के करीब 300 बेल हैं। आपको बता दें कि वे हर साल कई क्विंटल कीवी बाजार में बेचते हैं। उन्होंने बताया कि कीवी की क्वालिटी के हिसाब से 50 से 200 रुपये किलो तक कीवी क्षेत्र में ही बिक जाता है।

एक पौधे की कीमत है 275 रुपये

भवान सिंह कोरंगा ने बताया कि लीती में 40 परिवार कीवी उत्पादन से जुड़े हुए है तो वहीं शामा में करीब 80 लोग कीवी की खेती करते है। जानकारी के मुताबिक, उनकी नर्सरी में दस हजार कीवी के पौधे हैं, जिसमें एक ग्राफ्टेड पौधे की कीमत 275 रुपये है, हलांकि सामान्य तरीके से तैयार पौधे 225 रुपये में बिकते हैं.।

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