जिला कांगड़ा के उपमंडल बैजनाथ की धरेड़ पंचायत के कंडकोसरी गांव में जाना हुआ. यह गांव समुद्र तल से करीबन 1500 मित्र की ऊंचाई पर है. जिसकी आबादी करीबन चार सौ है. ग्रामीणों का मुख्य पेशा खेती बाड़ी है तो कुछ सेना में भी नौकरी करते है. इस पंचायत को 2017 में चौसकु हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के किसान प्रथम परियोजना के अंतर्गत गोद लिया है. इन गांवों में ग्रामीणों के साथ विशेषज्ञों की मेहनत नज़र आती है.
जिला का यह दुर्गम गांव है और पंहुचने के लिए पैदल चलना पड़ता है. हालांकि गांव के एक हिस्से तक जीप योग्य सड़क को पहुंचाया गया है. मगर अभी इस सड़क पर काफी काम होना बाकी है लेकिन किसानों को इसका लाभ मिल रहा है.
करीबन तीन साल पहले पंचायत के तड़ा और धरेड़ गांवों में जाना हुआ था. उस दौरान पंचायत प्रधान पिंकी देवी ने हमें कंडकोसरी के बारे में बताते हुए वहाँ के ग्रामीणों से मिलवाया था. ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख नकदी फसलों को मंडी तक पहुंचाने के लिए हमें मदद के लिए आग्रह किया. ग्रामीणों ने विस्तार से बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की किसान प्रथम योजना के तहत चौसकु हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने उनकी पंचायत धरेड़ को गोद लिया गया था. विशेषज्ञों से उन्हें जहाँ कृषि, बागवानी, पशुपालन, मधु मक्खी पालन आदि की तकनीकी जानकारी हासिल हुई वहीं कृषि बीजों और चूजों को भी दिया गया. इसका लाभ उन्हें मिला और वह अपनी आर्थिकी को ऊपर उठा रहे है. मशरूम उत्पादन में शैलजा का नाम है तो बेमौसमी हरी सब्जियों में कश्मीर सिंह, गोल्डी देवी,रानी देवी, नागिन देवी, बीना देवी का नाम प्रमुख है. मटर,ब्रोकली, मूली,अदरक को यह प्रमुखता से लगा रहे है. हरे मटर को पालमपुर सब्जी मंडी में कश्मीर सिंह लेकर जाते है. यहाँ उनका मटर 60 रुपये प्रति किलो की दर से बिका. हालांकि कुछ खरीददार गांव में भी इस बार पहुंच गए लेकिन वह 25 रुपये किलो के हिसाब से खरीद रहे थे. लिहाज़ा उन्होंने मटर को उन्हें बेचने की बजाए पालमपुर में बेचा. बैजनाथ में भी उन्हें अपने मटर का दाम नहीं मिला और वह अपने अन्य साथियों के साथ गाड़ी कर सारी फसल को पालमपुर में ही लेकर गए. चार कनाल भूमि में 13 किलो मटर का बीज लगाने के बाद दो किवंटल 23 किलो का उत्पादन वह कर चुके है. यह मटर उनका 60 रुपये प्रति किलो बिका.
रानी देवी बताती है वह चार किवंटल अदरक को बेच चुकी है। 20 से 30 रुपये प्रति किलो की दर से अदरक बिका है.
धरेड़ पंचायत में वार्ड दो और तीन कंडकोसरी गांव में पड़ता है. यह गांव समुद्र तल से करीबन 1500 मित्र की ऊंचाई पर है. जिसकी आबादी करीबन चार सौ है. ग्रामीणों का मुख्य पेशा खेती बाड़ी है तो कुछ सेना में भी नौकरी करते है. कुछ युवा पर्यटन स्थलों गोवा, मनाली, धर्मशाला के बड़े होटलों में भी काम कर रहे है.
नकदी फसलों के बाद अब ग्रामीण फलों में भी रुचि दिखाने लगे है. अमरूद के पौधों की मांग जहाँ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से की है वहीं बरसात के पानी को रोकने की तकनीक को भी विस्तार से समझना चाहते है. सुअर, शैल व खरगोश उनके लिए परेशानी खड़ी करते है.
ग्राम पंचायत धरेड़ में तड़ा, धरेड़, बेड़ा, कलहोली, लुलानी और अप्पर व लोअर कंडकोसरी गांव आते है. विश्वविद्यालय के परियोजना अधिकारी व विभागाध्यक्ष डाक्टर देश राज चौधरी के साथ उनकी टीम के सदस्य कश्मीर सिंह, मंजुला राणा, अजय कुमार नियमित तौर पर इन गांवों में जाकर ग्रामीणों की मदद करते है.
कुलपति प्रोफेसर एच.के. चौधरी इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. देश राज चौधरी और उनकी कड़ी मेहनत करने वाली टीम की किसानों की पहली परियोजना को सफलतापूर्वक लागू करने और किसानों की आय में कई गुना वृद्धि करने के लिए सराहना करते है. आईसीएआर परियोजना ने भी इन गांवों से लगभग 100 सफलता की कहानियों का चयन किया है.
पंचायत में 40 फीसदी किसानों की आमदन में सौ फीसदी से अधिक इजाफ़ा हुआ। 10 फीसदी किसान ऐसे रहे जिनकी आमदन 75 से 80 फीसदी रही। 14 फीसदी किसान 50 से 75 फीसदी और 16 फीसदी किसान 25 से 50 फीसदी आमदन वाले थे।
पंचायत में किसानों के खाद्यान्न,सब्जी और पशु पालन में उत्पादन की तुलनात्मक वार्षिक स्थिति इस प्रकार रही।
क्रम मद 2017 2020
1 खाद्यान्न 16410 29667
2 सब्जियां 3528 7983
3 डेयरी 45846 69860
4 अन्य 4500 9759


