वर्षा वर्मा
कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश के में टूरिज्म विलेज के लिए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की 112 हेक्टेयर जमीन को पर्यटन विभाग को सौंपने का फैसला अंतिम है। यह जमीन जल्द ही टूरिज्म विलेज बनाने के लिए हस्तांतरित की जाएगी। यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य विधानसभा सत्र के दौरान कही।
कांगड़ा की सुलह विधानसभा से भाजपा विधायक विपन सिंह परमार द्वारा पूछे गए सवाल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला सावधानी से लिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि इस जमीन पर कोई कैसीनो नहीं बनेगा और टूरिज्म विलेज के लिए जमीन हस्तांतरण के खिलाफ याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी कहा कि पिछले 48 वर्षों में विश्वविद्यालय ने 50 हेक्टेयर जमीन भी विकसित नहीं की है। भविष्य में विश्वविद्यालय को जरूरत पड़ने पर निजी जमीन उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन हिमाचल प्रदेश की ताकत है और जमीन हस्तांतरण के लिए अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।
शिक्षकों व छात्र संगठनों का कहना है कि इस जमीन का उपयोग छात्रों के प्रायोगिक कार्यों और अनुसंधान गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए। इस कदम से विश्वविद्यालय के पास मौजूदा क्षेत्र कम हो जाएगा और उत्तर पश्चिमी हिमालय के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बनने की संभावना भी समाप्त हो जाएगी।
विद्यार्थियों ने जनवरी 2024 में मुख्य संसदीय सचिव शहरी विकास एवं शिक्षा,आशीष बुटैल को एक ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। लेकिन अभी तक सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने निर्णय नहीं बदला तो इसके विरोध में छात्र आंदोलन करेंगे। जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
सरकार ने विश्वविद्यालय को इसके बदले दूसरी जमीन देने की पेशकश की है। लेकिन शिक्षकों और छात्रों का कहना है कि यह वैकल्पिक जमीन बंजर है और विश्वविद्यालय से काफी दूर है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि विश्वविद्यालय की मौजूदा भूमि को करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किया गया है। और नई जमीन उपयोगी नहीं होगी।
