पंचायत खबर टोली
रांची: जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने रांची में युवा शक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि जिस बात को कहने के लिए मुझे देशद्रोही कहा गया वही बात खुद प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं। कन्हैया ने कहा कि मन की बात सुनने से ज्यादा जरूरी होता है, सबकी बात सुनना। आज मोदी गरीबी के खिलाफ जंग लड़ने की बात कर रहे हैं लेकिन उन्हें बताना चाहिए कि कन्हैया भी तो गरीबी हटाने की ही बात कर रहा है फिर क्यों जेल में डालते हो। कन्हैया कुमार ने कहा कि आप ही बोलिए, न रोटी-कपड़ा, न मकान… तो कैसे बनेगा भारत महान। वे रांची में रोजी रोटी अधिकार अभियान के छठे नेशनल कन्वेंशन के आखिरी दिन यूथ सेशन में अपनी बात रख रहे थे।
कन्हैया ने धूमिल की लोकप्रिय कविता भी दुहराई। एक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है वह सिर्फ रोटी से खेलता है मैं पूछता हूं, यह तीसरा आदमी कौन है? मेरे देश की संसद मौन है। मैं पूछना चाहता हूं कि मेहनतकश किसान, मजदूर, दलित, आदिवासी लोगों को उनके श्रम का फल क्यों नहीं मिलता। तीसरा आदमी कौन है जो संसाधनों को, उनके श्रम को लूट रहा है। लेकिन अब रोजी-रोटी के अधिकारों के लिए दक्षिण से उत्तर तक और पूरब से पश्चिम तक देश में नारे गूंज रहे हैं। हक की बात करने वालों को नक्सली कहा जाता है, जब कोई आदिवासी अपने हक की बात कहता है तो उसे नक्सली, जिहादी कहा जाता है, उसे संस्कृति विरोधी बता दिया जाता है।अगर देश बदलना है तो लोगों को रोजी-रोटी का हक दीजिए।
बच्चे भूख से मर रहे हैं पर आप बुलेट ट्रेन की बात करेंगे। पहले सेना के जवानों को बुलेटप्रुफ जैकेट दे दीजिए। गरीब किसान का बेटा सीमा पर शहीद हो रहा है। आत्महत्या कर रहे किसान भी शहीद हैं। कश्मीर के साथ कश्मीरियों की भी बात कीजिए। नदी-झरने, खनिज संपदा से ही भारत नहीं बनता, यहां रह रहे दलित, आदिवासी, पिछड़े, किसान, मजदूर से भारत बनता है।
भूख से लड़ाई ज्यादा जरूरी
छात्र नेता ने कहा, हम कुछ नहीं चाहते बस संविधान जो कहता है, उसका पालन देश में हो। भूख से लड़ाई सबसे पहले जरूरी है। हमें युद्ध नहीं चाहिए। अगर अंतिम विकल्प है, तो पड़ोसी को मुंहतोड़ जवाब दीजिए। नवाज-मोदी की चाय पर चर्चा बंद होनी चाहिए। दोनों मुल्कों की आवाम भुखमरी से लड़ रही है। हमें छूआछूत से सांप्रदायिकता से, भूख से, गरीबी से, ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए। आप ही बोलिए, न रोटी-कपड़ा, न मकान… तो कैसे बनेगा भारत महान।
भाषा की मर्यादा भूले
कन्हैया कुमार ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी शेर हैं। यदि मोदी शेर हैं तो उन्हें जंगल में रहना चाहिए या फिर उन्हें चिड़ियांघर में भेज देना चाहिए।उन्होंने कहा कि मोदी जी गलत लोगों की संगति में हैं और देश को बेचना चाहते हैं। नरेन्द्र मोदी सिर्फ और सिर्फ उद्योगपतियों की भाषा बोलते हैं। यदि उन्हें देश की चिंता रहती तो भाषा लोक कल्याणकारी होती। उन्होंने नरेन्द्र मोदी को दोयम दर्जे का नेता बताया।
रामदेव पर साधा निशाना
कन्हैया कुमार ने कहा कि बाबा रामदेव घी बेचकर कह रहे हैं कि वे भारत को आर्थिक आजादी दिला रहे हैं. लेकिन ये नहीं बता रहे हैं कि देशी घी और विदेशी घी में क्या अंतर है। भारत में मिलने वाला हर प्रकार की घी देसी घी ही होता है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव का स्वदेशी का नारा नकली है। योग करने से स्वदेशी नहीं बना जा सकता।



