शैली आर्या
आज हर क्षेत्र मे महिलाए आगे है चाहे चन्द्रयान हो या खेल का मैदान, जिन खेलों में अब तक पुरुषों का दबदबा था, वहां भी अब महिलाएं अपना परचम लहरा रही हैं। हालाकि खेल जगत में महिलाओं के लिए जगह बनाना आसान नहीं था। महिलाओं को हमेशा से ही शारीरिक क्षमता में पुरुषों से कम समझा जाता है। लेकिन क्रिकेट से लेकर बैडमिंटन मुक्केबाजी,लंबी कूद,निशानेबाजी,कुश्ती,टेनिस,बाक्सिग, जैसे खेल में आज महिलाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और कई विश्व रिकॉर्ड बनाकर देश के लिए पदक जीत रही हैं। चलिए जानते हैं ऐसी ही एक महिला खिलाड़ी के बारे में जिन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता और संघर्ष को पार करते हुए खेल जगत में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
हर भारतीय नारी को प्रेरणा भी दी है-
वर्तमान में भले ही मिताली राज टीम की कप्तान हों लेकिन उनसे पहले झूलन गोस्वामी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान थी। झूलन गोस्वामी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2000 से ज्यादा ओवर लेने वाली दुनिया की इकलौती गेंदबाज हैं।झूलन गोस्वामी को भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सबसे तेज गेंदबाज के रूप में जाना जाता हैं। इनका जन्म 25 नवंबर 1983 को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के चकदा नामक स्थान में हुआ था। झूलन गोस्वामी का पूरा नाम झूलन निशित गोस्वामी है।झूलन गोस्वामी के पिता निशित गोस्वामी इंडियन एयरलाइंस में काम करते हैं। झूलन की मां को बचपन में लड़को के साथ झूलन का क्रिकेट खेलना पसंद नहीं था। और फिर एक दिन ऐसा भी आया जब झूलन गोस्वामी महिला वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बन गई।
झूलन गोस्वामी की उपलब्धिया-
उन्होंने कुल 333 अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए हैं। पहला जहां क्रिकेट को केवल पुरुषों का खेल समझा जाता था, वही भारत माता की इस बेटी ने पूरे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित महसूस करवाया है और अपनी सफलता से हर भारतीय नारी को प्रेरणा भी दी है कि अगर लड़कियों को मौका मिले तो वह भी पुरुषों के समान सफलता के आसमा को छू सकती है। झूलन गोस्वामी बताती है कि बचपन में पड़ोस के बच्चों के साथ क्रिकेट खेला करती थी उस समय उनकी गेंदबाजी बहुत धीमी थी, जिसके कारण लड़के इनका काफी मजाक उड़ाया करते थे। लेकिन झूलन ने कहा कि उन लड़कों का मजाक उनके लिए प्रेरणा की तरह काम किया और उसके बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर काफी ध्यान दिया। इन्होने एम. आर. एफ. एकेडमी से ट्रेंनिग ली और प्रसिद्ध खिलाड़ी डेनिस लिली से भी गेंदबाजी की कुछ टिप्स लिए। अपने गेंदबाजी के स्पीड को तेज करने के लिए काफी मेहनत की और अंत में इनकी मेहनत रंग लाई। इनकी गेंदबाजी रफ्तार 120 कि.मी. प्रति घंटा हो गई, शुरुआत के समय में इन्हें अपने परिवार को मनाना काफी कठिन रहा, परिवार से ज्यादा समर्थन नहीं मिलता था। क्योकि उस वक्त क्रिकेट को पुरूषो का खेल समझा जाता था लेकिन झूलन ने हार नहीं मानी और इनकी मुलाकात क्रिकेट के कोच स्वप्न साधु से हुआ। जिन्होंने झूलन गोस्वामी के प्रतिभा और क्रिकेट के प्रति गहरी लग्न को देखा और झूलन गोस्वामी का समर्थन किया। यहां तक कि उनके परिवार को भी मनाने में मदद की। झूलन गोस्वामी बताती हैं कि इनके पिता इनके प्रति काफी चिंतित रहा करते थे। लेकिन इनके कोच स्वप्न साधु ने इनके पिता को समझाया है कि अब महिलाएं भी क्रिकेट खेल सकती हैं।जिसके बाद उनके पिता ने इन्हें कोलकाता जाकर क्रिकेट खेलने की अनुमति दे दी। इस तरीके से झूलन गोस्वामी को सपनों की उड़ान भरने की अनुमति मिल गई। क्रिकेट में अपना करियर बनाने के लिए झूलन गोस्वामी ने बचपन से ही काफी संघर्ष किया। इनके घर के निकट कहीं भी अच्छा क्रिकेट संस्थान नही था जिसके कारण इन्हें रोज 4:30 बजे उठकर नदियो से दक्षिण कोलकाता के विवेकानंद पार्क तक लोकल ट्रेन से क्रिकेट की ट्रेनिंग लेने के लिए जाना पड़ता था हालांकि इन्होंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना किया। क्रिकेट में एक गेंदबाज के रूप में अपनी नई शुरुआत की। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई। लोकल टीमों के साथ कुछ मैच खेलने के बाद इन्हें बंगाल की महिला क्रिकेट टीम में शामिल होने का मौका मिला।
उस समय झूलन गोस्वामी मशहूर तो हो रही थी, परंतु इनकी मां के लिए ये अभी छोटी बच्ची थी। ये जब तक घर पर नहीं आती थी, उनकी मां बेचैन रहती थी। झूलन गोस्वामी बताती है कि एक बार ये क्रिकेट मैच खेलने के कारण घर देर से लौटी थी, जिसके कारण इनकी मां इन पर काफी नाराज हो गयी थी।
यहां तक कि उन्होंने दरवाजा भी नहीं खोला था और कई घंटे इन्हें घर के बाहर खड़े रहना पड़ा था।
झूलन गोस्वामी की कामयाबी –
झूलन गोस्वामी ने मात्र 19 साल की आयु में साल 2002 मे पहला टेस्ट मैच लखनऊ में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। उसके अगले साल चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ पहला वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। हालांकि इन सब में इनकी सबसे बड़ी कामयाबी साल 2006 में मिली जब इनकी बेहतरीन गेंदबाजी के कारण इंडियन टीम ने एक टेस्ट मैच में इंग्लैंड को हराकर बड़ी जीत अपने नाम दर्ज कर ली। झूलन गोस्वामी ने उस मैच में 78 रन देकर 10 विकेट हासिल किए थे। उस मैच के बाद इन्हें इनके तेज गेंदबाजी के कारण नदिया एक्सप्रेस के नाम से जाना जाने लगा। वर्ष 2007 में झूलन गोस्वामी को आईसीसी पुरस्कार का खिताब सबसे अच्छे महिला क्रिकेटर के रूप में नवाजा गया। साल 2010 में झूलन गोस्वामी को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।साल 2012 में झूलन गोस्वामी को पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया। इन्हें चिदंबरम ट्रॉफी के जरिए सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर खिलाड़ी का भी ख़िताब मिल चुका है
क्रिकेट के कारण ये 4 बार 12वीं की परीक्षा नहीं दे पायी थी।
झूलन गोस्वामी को बचपन में फुटबॉल खेलने का भी काफी शौक था। यह कहती हैं कि लंबे कद के कारण इन्हें गेंद को उछालने में काफी आसानी होती थी।
साल 2007 में इन्हें विश्व की सबसे तेज महिला गेंदबाज होने के नाते महि ला क्रिकेटर ऑफ द ईयर का पुरस्कार भारतीय क्रिकेट के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के हाथों मिला था और उस दिन इन्होंने महसूस किया कि इनका सपना पूरा हो गया।
झूलन गोस्वामी बताती है कि जब वो 14 वर्ष की थी तब इन्होंने दिसंबर के सर्दी के दिनों में ईडन गार्डन में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हो रहे वर्ल्ड कप का फाइनल देख रही थी और उस खेल को देखकर इतना रोमांचित हो गई जिसके बाद इन्होने ठान लिया कि एक दिन यह भी भारतीय टीम में खेलेंगी।आपको बता दे झूलन गोस्वामी के जीवन पर ‘चकदा एक्सप्रेस’ करके मूवी बनाई जा रही है।
झूलन गोस्वामी ने शादी नही की –
झूलन गोस्वामी की उम्र 40 वर्ष है और उन्होने शादी नही की है झूलन गोस्वामी का कहना है कि मै खेल मे इतनी व्यसत हू कि किसी रिस्ते को समय नही दे पाऊगी और किसी रिस्ते को समय नही दे पाऊगी,तो ये उसके साथ अन्याय होगा
