
Maa Brahmacharini Aarti: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। यानी आज, सोमवार 31 मार्च को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और साधना की देवी माना जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। इसके साथ ही मां का वाहन सिंह है, ब्रह्मचारिणी माता की पूजा से भक्तों को आत्मसंयम, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। हालांकि नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त सच्ची निष्ठा से माता ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा कर, माता के आशीर्वाद की कामना करते है। इसके अलावा भक्त पूरे दिन का उपवास रखते है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को लंबी आयु, सौभाग्य, आरोग्य, आत्मविश्वास प्रदान करता है। ऐसे में आइए जानते है की मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, और आरती
माता ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मंदिर को अच्छे से साफ करें। इसके साथ देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करें। इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें। देवी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाएं। इसके अलावा कमल का फूल भी देवी मां को चढ़ाए।
ये भी पढ़े…
नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए भोग और मंत्र का महत्व
ऐसे में अगर आप मां ब्रह्मचारिणी की कृपा पाना चाहते हैं, तो नवरात्रि के दूसरे दिन विधिपूर्वक उनकी पूजा करें, उनके मंत्रों का जाप करें और श्रद्धा के साथ उनकी आरती गाएं।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते
या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।


