पंचायत खबर टोली
-बैंकों की लापरवाही,अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की बेपरवाही से जमीन पर नहीं उतर पाई केंद्र की योजनाएं
मऊ : मोदी सरकार की तीन साल की उपलब्ध्यिां गिनानी हो केंद्र से राज्य के नेता, मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गये मुद्रा बैंक व स्किल इंडिया सहित अनेक योजनाओं देश में जमीनी बदलाव लाने की क्षमता वाली योजना बनाते हैं। लेकिन जमीन पर इनके हालत देखे तो इनके जरिए जमीन पर कुछ नहीं बदला है। जिले में माध्यम से मध्यम, लघु व कुटीर उद्योग की स्थिति को बेहतर करने के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं, जिनका जमीन पर कोई असर नहीं है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन अभी जमीन पर नहीं होने से जिले में उद्योगों की स्थिति खस्ताहाल हो चली है।
इतना ही नहीं पूर्व की सरकार द्वारा शुरू की गई उद्योग बंधू योजना सिर्फ बैठकों तक सिमट गयी लगती है और ऐसी स्थिति में उद्योग धंधा करने वालों लिए राहत की कोई राह नजर नहीं आ रही है।
जो बैंक मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद मालामाल हो गये हैं बावजूद इसके वे इन योजनाओं को क्रियान्वित करने की दिशा में बैंकों का रवैया बिल्कुल ही नकारात्मक है। भ्रष्टाचार का बोलबाला है। कागजात व जांच में लटकाने के बाद सुविधा शुल्क न मिलने की दशा में फाइल रोक दी जाती है। कोरमपूर्ति तक सिमटे प्रशासनिक प्रयास के बीच क्षेत्र के जनप्रतिनिधी भी कमोबेश स्टार्ट अप को लेकर उदासीन है। यही कारण है हालत बद से बदतर होते जा रहे हैं। नारों में भी भले ही अच्छे दिन के सपने दिखाये गये हों लेकिन खस्ताहाली की ओर बढ़ रहे उद्योग जगत को अभी अपने अच्छे दिन का इंतजार है।
मऊ जिले में उद्योग की स्थिति ठीक नहीं
नगर में गाजीपुर तिराहा व ताजोपुर में दो औद्योगिक क्षेत्र हैं। पांच वर्ष में औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर में सीमेंटेड ईंट की दो, पशु आहार की एक व साड़ी कैलेंडर की एक, लाई-चूरा निर्माण की दो लघु इकाइयों की स्थापना हुई। पांच वर्ष में ताजोपुर में आटा उद्योग की तीन, साड़ी निर्माण की एक तथा बल्ब निर्माण की एक लघु उद्योग की इकाई बंद हो चुकी है।
बिजली के कमी से जूझ रहे हैं उद्योग
गाजीपुर तिराहा पर स्थित औद्योगिक क्षेत्र बिजली की कमी से जूझ रहा है, तो औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर में चहारदीवारी, पुलिस पोस्ट, वाटर फायर टैंक, सड़क व बिजली की समस्या बनी हुई है। जिले में खाद्य प्रसंस्करण व बुनकरी क्षेत्र में लघु उद्योग की अपार संभावना है। इस दिशा में केंद्र सरकार द्वारा अनेक योजनाओं के संचालन के बाद भी जमीन पर उसे न उतर पाने की दशा में कहीं भी प्रगति नहीं दिखाई दे रही है। जिले की सबसे सक्रिय बढुआ गोदाम इकाई का हाल यह है कि सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। शाम होते ही अंधेरे का साम्राज्य हो जाता है। फायर टैंक जैसी मूलभूत सुविधा का विकास अभी नहीं हो पाया है। ऐसे में लघु व कुटीर उद्योग के विकास के लिए पीएम की प्रतिबद्धता के बाद जगी आस विभागीय निष्क्रियता से टूट रही है।
पहले से बदतर हुए हैं हालात
हालात पहले से और बदतर हो गए हैं। पूर्व में उद्योग के विकास के लिए जमीन, मैटेरियल व मशीनरी में सब्सिडी मिलती थी। सेल टैक्स में 10 वर्ष तक का छूट भी इस दौरान दिया जाता था। उद्योग की सक्रियता के लिए जिला उद्योग केंद्र से रा-मैटेरियल छूट पर प्रदान की जाती थी। यह सभी सुविधाएं समाप्त हो चली हैं। दूसरी ओर जिला उद्योग बंधु एक बैठक भर रह गई है। एजेंडा पर चर्चा करना ही इसका उद्देश्य होता जा रहा है। दूसरी ओर विभिन्न विभागों द्वारा चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। निदेशालय द्वारा मरम्मत शुल्क बढ़ा दिया गया है लेकिन सड़क, बिजली व अन्य सुविधाएं बदहाल हो गए हैं। औद्योगिक क्षेत्र बढुआगोदाम, मऊ के अध्यक्ष संजय सिंह का कहना है कि पीएम की कोई भी योजना अभी तक जिले में उतर नहीं पाई है। ऐसे में मझोले, लघु व कुटीर उद्योग समाप्त होने की दशा में हैं।
बैंकों की लापरवाही से अटकी योजनाएं
उद्योग बंधु की बैठक में एजेंडा का क्रियान्वयन होता है। योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंकों का लापरवाही भरा रवैया उद्योग के विकास में भारी पड़ रहा है। जिला उद्योग केंद्र, मऊ के प्रबंधक रामसरीख यादव कहते हैं कि इस दिशा में सांसद से भी पत्राचार भी किया गया। बावजूद इसके उनके रवैए में कोई अंतर नहीं। इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है।
