- सार्वभौमिक टीकाकरण अभियान से मिलेगी किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) से मुक्ति
- NTAGI की सिफारिश पर लिया गया टीकाकरण अभियान चलाने का फैसला
- स्कूल में टीका नहीं लगवाने वाली किशोरियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा केंद्र पर उपलब्ध करवाया जाएगा
- पैरेंट्स को PTM के जरिए सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) की रोकथाम के लिए किया जायेगा जागरूक
नयी दिल्ली: कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है और विभिन्न बीमारियों से निपटने और मानव मात्र को बचाने के लिए टीका का इजाद और सार्वभौमिक टीकाकरण अभियान के जरिए उसका समाधान इसी दिशा में की गई पहल है। लेकिन इन दिनों एक नई चुनौती का सामना न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के अन्य देश भी कर रहे हैं। ये समस्या है देश में महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाले सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) की।
अनुभव से मिलेगी सफलता
कोरोना के खिलाफ जंग में टीकाकरण अभियान से मिली सफलता ने आम जनमानस में टीकाकरण के फायदे को लेकर तो अपनी जगह बना ही ली है लेकिन इससे भी पहले बच्चों के लिए चलाये जा रहे नियमित टीकाकरण अभियान को जिस तरह सफलता मिली उससे लोग जीवन रक्षक टीकाकरण के महत्व से अवगत हुए। इतना ही नहीं पोलियो तथा मातृ एवं नवजात टेटनस जैसी बीमारियों को हमेशा के लिए खत्म करने में टीकाकरण अभियान से जो मदद मिली उससे न सिर्फ सरकार का बल्कि आम जनमानस का भी भरोसा बढ़ा है। इस तरह से यूआईपी सालाना दो करोड़ से अधिक नवजात शिशुओं और दो करोड़ गर्भवती महिलाओं को लक्षित करने वाले सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है और यह कम से कम 12 बीमारियों के लिए मुफ्त टीके प्रदान करता है।

क्या कहती है सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) संबंधी रिपोर्ट
हाल ही में द लांसेट में प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट बताती है कि एशिया में ग्रीवा कैंसर के सबसे अधिक मामले भारत में हैं और इसके बाद चीन का स्थान है। वैश्विक स्तर पर ग्रीवा कैंसर और उससे होने वाली मौतों के कुल मामलों में से 58 फीसदी से अधिक एशिया में होने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें से भारत में 21 फीसदी मामले और 23 फीसदी मौतें हुईं हैं और इसके बाद चीन (18 फीसदी और 17 फीसदी) का स्थान रहा। ग्रीवा कैंसर एक रोके जाने और उपचार किए जाने लायक कैंसर है। यह मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण की वजह से होता है और ऐसे टीके उपलब्ध हैं जो कार्सिनोजेनिक एचपीवी से बचाते हैं।
संभव है इलाज सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) का
कहा जाता है कि नीम हकीम खतरे जान और जरूरी है समय पर बीमारी की पहचान। तो इस मामले में भी यह तथ्य वास्तविकता के धरातल पर सही प्रतीत होता है यानी सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) के समय पर पता चलने पर रोका जा सकता है और उसका इलाज संभव है। अधिकांश सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से जुड़े होते हैं और सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों को एचपीवी वैक्सीन से रोका जा सकता है। अगर वैक्सीन को लड़कियों या महिलाओं को वायरस के संपर्क में आने से पहले दिया जाता है तो इसको रोका जा सकता है। इसकी रोकथाम विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अपनाई गई वैश्विक स्तर पर रणनीति भी बनाई है गाइडलाइन और मापदंड भी तैयार किये हैं।
टीकाकरण में छुपा है समाधान
इस विषम परिस्थिती में महिलाओं और बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) से बचाने की अपनी जवाबदेही को देखते हुए केंद्र सरकार (Central Government) ने अभियान चलाकर खासकर 9 से 14 साल की उम्र की किशोरियों को स्कूल में ही सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए सर्ववैक वैक्सीन (CERVAVAC Vaccine) के टीके लगाने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं जिन किशोरियों को स्कूल में यह टीका नहीं लग पायेगा उनको टीका स्वास्थ्य सुविधा केंद्र पर उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों तक सामुदायिक संपर्क और मोबाइल टीमों के जरिए पहुंचा जाएगा। सर्ववैक वैक्सीन के टीकाकरण अभियान चलाने का फैसला राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) की सिफारिश पर लिया गया है। इतना ही नहीं इस वैक्सीनेशन कार्यक्रम में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन को शामिल करने की सिफारिश की गई थी।
बीमारी का स्वदेशी समाधान
माना जा रहा है कि भारत में 2023 के मध्य तक स्वदेशी रूप से विकसित इस सर्ववैक वैक्सीन को लगाना शुरू कर दिया जाएगा। भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से भी वैक्सीन को मंजूरी दी जा चुकी है। इतना ही नहीं इस वैक्सीन को पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम में इस्तेमाल करने के लिए सरकारी एडवाइजरी पैनल NTAGI से भी मंजूरी दी जा चुकी है. बताया जाता है कि 9 से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए एक बार का कैच-अप टीका प्रदान किया जाएगा. इसके बाद, इसको 9 साल की बच्चियों को भी दिया जा सकेगा। वहीं, भारत में निर्मित एचपीवी वैक्सीन की कीमत ₹200 निर्धारित की गई है।

सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) के प्रति जागरूकता है जरूरी
रिपोर्ट से यह तो जाहिर है कि लड़कियों के लिए सर्वाइकल कैंसर का टीका देकर उन्हें सुरक्षित किया जा सकता है लेकिन यह तथ्य भी उतना ही सही है कि किसी भी टीकाकरण अभियान को व्यापक सफलता तभी मिल पाती है जब उसकी व्यापक तैयारी हो और टीकाकरण के साथ-साथ एचपीवी के शुरूआती लक्षणों का पता लगाने के लिए जांच जरूर की जाये। ऐसे में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम यानी सार्वभौमिक टीकाकरण अभियान (यूआईपी) में एचपीवी वैक्सीन शामिल करने का सरकार का इरादा एक काबिलेतारीफ कदम है लेकिन जमीन पर यह तभी सफल होगा जब व्यापक पैमाने पर आम जनमानस को जागरूक किया जाए और लोग टीकाकरण अभियान से जुड़ें। इसी को ध्यान में रखते हुए सर्ववैक वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर केंद्रीय शिक्षा सचिव संजय कुमार और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की ओर से एक ज्वाइंट लेटर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किया गया है. इन राज्यों व प्रदेशों के स्कूलों में एचपीवी टीकाकरण केंद्रों (HPV vaccination centres) के आयोजन के लिए उचित निर्देश भी जारी करने का आग्रह किया गया है।

नियुक्त होंगे नोडल अफसर
इतना ही नहीं यह भी दिशानिर्देश जारी किया गया है कि सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) से बचाव के लिए हर सरकारी और निजी स्कूल में समन्वय स्थापित करने के लिए एक नोडल अधिकारी की पहचान करने का आग्रह भी किया है जोकि सामांजस्य स्थापित कर सकें। टीकाकरण अभियान के सुचारू संचालन के लिए लेकर 9-14 साल की लड़कियों की संख्या का एक डेटा तैयार करने की बात कही गई है साथ ही माता पिता को पीटीएम के जरिए ज्यादा से ज्यादा इस मामले में जागरूक करने का भी निर्देश है।
