तेल सोखू अखबार… लीपापोती करते प्रशासनिक दावे व आरोप झुठलाते ग्रामीणों के बावजूद क्या बदलेगी नेहा सिंह राठौर के गांव की हकीकत..कोरोना के संक्रमण से बच पायेगा जन्दाहा गांव

अमरनाथ झा
पटना:बिहार के गांवों में कोरोना महामारी के प्रसार को नवोदित गायिका नेहा सिंह राठौर ने उजागर किया है। हालांकि सरकारी तंत्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
नेहा सिंह राठौर कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड में महुअर पंचायत की जन्दाहा गांव की निवासी है। उसने ट्विट करके बताया कि उसके गांव में सात लोगों की मौत कोरोना से हो गई है, पचास से अधिक लोग बीमार हैं। लेकिन गांव में न तो जांच की सुविधा है, न प्रारंभिक दवाईयां उपलब्ध है। उसने यह सूचना जिलाधिकारी नवनीत शुक्ला और स्थानीय विधायक सुधाकर सिंह को भी दी। दोनों ने चिकित्सकों को भेजने का आश्वासन दिया।
जिलाधिकारी नवनीत शुक्ला जिले के रेफरल अस्पताल के 12 लोगों की मेडिकल टीम भेजा भी। लेकिन उन लोगों ने जांच के बाद कहा कि गांव में कोरोना नहीं फैला है। केवल तीन लोग कोरोना संक्रमित हुए थे, पर वे ठीक हो चुके हैं। यह टीम डॉ सुरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में गई थी। उन्होंने अखबार वालों से कहा कि गांव में कोरोना से किसी की मौत होने की बात गलत है।
नेहा सिंह राठौर मेडिकल टीम के इस दावे को पूरी तरह गलत बताती है और कहती है कि उसके पास उन सात लोगों के नामों की सूची है जो पिछले दिनों कोरोना से मारे गए हैं। उसने यह भी कहा कि नौ सौ निवासियों के इस गांव में मेडिकल टीम ने केवल 36 लोगों की एंटिजन टेस्ट के आधार पर गांव में कोरोना नहीं होने की बात कह रही है। यह सरासर गलत है क्योंकि वहीं किसी का आरटी पीसीआर टेस्ट ही नहीं हुआ। नेहा अपनी बात पर अड़ी है।
सच—झूठ और कोरोना का प्रकोप
नेहा सिंह राठौर ने जब ये बातें कहीं तो न​​ सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि अखबार भी नेहा के दावे को गलत बताने लगे। दैनिक जागरण अखबार ने खबर छापी भोजपुरी गायिका नेहा सिंह राठौर का दावा—गांव में कोरोना से मौत,ग्रामीणों ने नकारा। दैनिक जागरण में छपे इस खबर के बाद भी नेहा ने चुप रहना स्वीकार नहीं किया हालांकि दावा ये किया गया था कि उनके दावे को गांव वालों ने ही नकारा है। एक वीडियो के जरिए नेहा का जवाब आया..दैनिक जागरण बहुत अच्छा अखबार है, समोसे का पूरा तेल सोख लेता है। वे लिखती हैं
सरकार और प्रशासन की अपनी मजबूरियां होंगी, पर अखबारों को सरकारी भोंपू नहीं बनना चाहिएं
कोरोना के दूसरे स्ट्रेन में मेरे गांव में कुल 7 मौतें हो चुकी हैं। कोरोना के लक्षण स्पष्ट थे, पर लोग मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहे।
यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है, न ही ऑक्सीमीटर और बुखार-खांसी के प्राथमिक उपचार की दवाइयां हैं जबकि गांव में अभी भी 50 से ज्यादा लोग बीमार हैं।

नेहा सिंह राठौर लिखती हैं मैं बिहार के भभुआ-कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड के जन्दहां गांव की रहने वाली हूं। मेरी प्रार्थना है कि मेरे गांव में कुछ मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई जाए, ताकि अन्य संभावित मौतों को टाला जा सके।
नई खबर ये है कि मेरे गांव के लोगों ने दैनिक जागरण को बताया है कि गांव में बीते एक महीने के भीतर जिन सात लोगों की मौत हुई है, वो सभी लंबे समय से बीमार (तीन हृदयरोगी, एक कैंसर) थे।
मुझे इस आशय की हिदायत दी गयी है कि मैं सस्ती लोकप्रियता के फेर में गांव को बदनाम न करूंं।
इसके अलावा प्रखंड अधिकारी जी ने कहा है कि आपदा को अवसर में बदलने की कोशिश अच्छी बात नहीं है। बताया गया है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मेरे गांव में कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई है।
संयोग है या आंकड़ा छुपाने का प्रयोग
कितना अजीब संयोग है न! सालों से बीमार सभी सातों लोगों की मौत कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद एक महीने के भीतर ही हो गयी!
एक महीने के भीतर किसी भी गांव में सात लोगों की मृत्यु किसी भी दशा में सामान्य घटना नहीं है।
बी डी ओ साहब ने मेरे गांव के तीन लोगों सोनम सिंह, माधुरी सिंह और राजेश्वर तिवारी के संक्रमित होने, फिर ठीक हो जाने की बात कही है। उनकी जानकारी अगर सही होती तो उनकी इस सूची में मेरी माताजी का नाम भी जरूर शामिल होता, जो अभी 10 दिन पहले तक कोरोना संक्रमित थीं।
बाकी मेरे गांव के लोग वही कर रहे हैं जो पूरे भारत के गांव वाले करते हैं, तो उनसे मुझे कोई नाराजगी नहीं है।
पर हां, मैं ये बात जरूर याद रखूंगी कि महीने भर में ही गांव में सात मौतें होने के बाद अपनी बीमार मां को छोड़कर और अपनी जान जोखिम में डालकर जब मैंने अपने गांव के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए संघर्ष किया, तो उसके बदले में मुझे झूठा और सस्ती लोकप्रियता पाने का इच्छुक बताया गया।
खैर, लोकप्रियता पाने के लिए मैंने कभी अलग से प्रयास नहीं किया, और ना ही मुझे इसकी जरूरत हैं ये प्रयास वे लोग करें, जिनमें कोई योग्यता नहीं है।
आपके ये वाहियात आरोप मेरी निःस्वार्थ सेवा की भावना को कमजोर करते हैं, तो अपनी जलन-कुढ़न अपने तक सीमित रखिये, इसका सार्वजनिक वमन ठीक नहीं।
कोरोना से होने वाली मौतों के सरकारी आंकड़े झूठे हैं। सही गिनती श्मशान के डोम और नदी के मल्लाहों से जाकर पूछिये। मुझे जबरदस्ती झूठा कह देने से सच बदल नहीं जाएगा।
कल दैनिक जागरण ने मेरा पक्ष जानने के लिए संपर्क किया था, जिसकी मनमुताबिक एडिटिंग करके उन्होंने नई खबर छाप दी है।

नेहा सिंह राठौर का दावा इन लोगों की हुई मृत्यु
बिहार प्रशासन और दैनिक जागरण ने मेरे गांव में कोरोना के दूसरे स्टेन में हुई सभी मौतों को नकार दिया है।

मृतकों के नाम हैं –

गामा सिंह,इजूरी यादव,बिरेंदर यादव की पत्नी,रामदयाल की मां,अलियार राम,बाजा चौधरी की मां,सातवें मृतक का नाम मैं कुछ समय में बताती हूं।
नेहा सिंह राठौर लिखती हैं अपनी माताजी के कोरोना पॉज़िटिव होने की रिपोर्ट और दैनिक जागरण की खबर संलग्न कर रही हूं। उल्लेखनीय है कि नेहा लगातार अपने गांव में कोरोना फैलने की खबर को प्राथमिकता से रख रही हैं। नेहा को आशंका है कि उनको भी कोरोना था। लेकिन रिपोर्ट में निगेटिव आया था। लेकिन नेहा सिंह राठौर का कहना है भले ही रिपोर्ट निगेटिव हो लेकिन जो लक्षण रहे हैं वो कोरोना के हैं।

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