Chhath Puja Day 2 Kharna: छठ पूजा के दूसरे दिन खरना की परंपरा होती है। चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व में हर दिन का अलग-अलग महत्व होता है। 6 नवंबर बुधवार यानी आज खरना का दिन है। छठ महापर्व में खरना का विशेष महत्व होता है। इस दिन छठ का विशेष प्रसाद बनाया और खिलाया जाता है।

खरना का महत्व
छठ पूजा के दूसरे दिन खरना की परंपरा होती है। इसी दिन शाम से 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है। इस दिन रोटी, गुड़ की खीर और फल का भोग लगाया जाता है। इसे छठ का महाप्रसाद कहा जाता है। खरना वाले दिन भगवान का विशेष प्रसाद व्रती ही तैयार करते हैं और शाम के समय भगवान को अर्पित करने के बाद इस प्रसाद को सभी लोग ग्रहण करते हैं। खरना से ही छठ का उपवास आरंभ होता है। जो सप्तमी तिथि के दिन अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है।
खरना पूजा मुहूर्त
पंचांग के अनुसार छठ के दूसरे दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 37 मिनट पर हुआ है। वहीं सूर्यास्त शाम 5 बजकर 30 मिनट पर होगा। इससे पहले सूर्य को अर्घ्य देकर खरना की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा खरना के दिन सुकर्मा योग सुबह 10 बजकर 59 मिनट तक तत्पश्चात धृति योग रहेगा।
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खरना के नियम
खरना के दिन मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाई जाती है। जिसके लिए पीतल के बर्तन का ही प्रयोग किया जाता है। यह खीर बहुत ही शुद्धता और पवित्रता को ध्यान में रखते हुए बनाई जाती है। इसलिए इसे मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है। इसके अलावा गुड़ की अन्य मिठाई, ठेकुआ और लड्डू आदि भी बनाया जाता है।
खरना की यह खीर केवल व्रती ही बना सकती है और पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम के समय व्रती इसी गुड़ की खीर का सेवन करती हैं। शाम के समय व्रती कमरा बंद करके ही खीर का सेवन करती है। इसके बाद पूरा परिवार व्रती से आशीर्वाद लेता है। इस दौरान सुहागन महिलाएं व्रती महिलाओं से सिंदूर भी लगवाती हैं।
शाम के समय केले के पत्ते पर खीर के कई भाग किए जाते हैं और अलग-अलग देवी देवताओं, छठ मैय्या, सूर्य देव का हिस्सा निकाला जाता है। इस पर खीर के साथ केला, दूध, बाकी पकवान भी रखे जाते हैं। छठी मैया का ध्यान करते हुए ही इस प्रसाद को ग्रहण किया जाता है।
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खरना के दिन गुड़ की खीर का भोग लगाने के बाद सबसे पहले प्रसाद को व्रती ग्रहण करती है इसके बाद ही पूरा परिवार भी इस प्रसाद को ग्रहण करता है। छठ का व्रत रखने वाले को इस दिन भूमि पर सोना चाहिए। इस दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान सोना के लिए तकिया आदि का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।
