kolkata ball flower: मंदिरों को सजाने के लिए फूलों की काफ़ी मांग होती है। खास तौर पर कोलकाता के गेंदा फूलों से मंदिरों को सजाये जाने की परंपरा रही है। गेंदे के फूल की खेती सीज़न के हिसाब से की जाती है और त्योहारों के दौरान इसकी मांग बढ़ जाती है। दशहरा हो या दीपावली घरों और पूजा स्थलों को सजाने के लिए अलग-अलग तरह के गेंदे के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, मां लक्ष्मी की पूजा में कमल के फूलों का महत्व होता है। कोइया के फूल भी कमल के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं।
फूलों से जुड़ी कुछ और खास बातें
भारत में फूलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। फूलों का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा कई तरह के उत्पाद बनाने में भी किया जाता है। बाज़ार में गेंदा फूलों की कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलो होती है। जो त्योहारों के दौरान 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। ताज़े फूलों को बर्फ़ से ढककर एक शहर से दूसरे शहरों में भेजा जाता है। ताकि वे ताज़े रहें
गेंदे के फूल के गुण
गेंदा फूलों का कसैला स्वाद में कड़वा ज्वरनाशक संक्रमण नाशक होता है। रक्तस्त्राव को रोकने की विशेष क्षमता के कारण इसे रक्तप्रदर बवासीर रक्तस्त्राव में विशेष तौर पर उपयोगी पाया गया है। गेंदे के फुलों को चोट, मोच, सुजन पर बंधने से भी बहुत लाभ होता है। कीटाणुओं को दूर भगाने उन्हें नष्ट करने का विशेष गुण होता है। गेंदें के फूलों में ऐसा सक्रिय तत्व पाया जाता है। जो मलेरिया फैलाने वाले एनाफिलिज जाती के मच्छरों को भगाने में काफी प्रभावशाली सिध्द हुआ है। फूल में उपस्थित गंधक का सम्मिश्रण सूर्य के प्रकाश से संश्लिष्ट होकर एक जहरीले पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है। गेंदा मलेरिया जैसी बीमारी की रोकथाम का अचूक उपाय सिध्द हो सकता है। यह भी देखा गया है की गेंदें के पौधों के आसपास हानिकारक कीड़े और मच्छर दिखाई नहीं देते |
गेंदा फूल की कई प्रजातियां हैं जिनमें से कुछ प्रमुख ये हैं
अफ़्रीकी गेंदा
यह लंबा बढ़ने वाला गेंदा फूलों होता है और इसकी ऊंचाई लगभग 90 सेंटीमीटर तक होती है। इसके फूल बड़े होते हैं और इनका रंग नींबू जैसा पीला,चमकीला पीला, स्वर्णपीला, नारंगी, और लगभग सफ़ेद होता है। इसकी कुछ किस्में ये हैं। पूसा नारंगी, पूसा बसंती, कैकट जैक, जीनिया गोल्ड, मेंलिंग स्माईल, फ़िस्ता, टिटानिया, पीला सुशिम, जायंट डबल अफ़्रीकन ऑरेंज, जायंट डबल अफ़्रीकन पीला, फ़र्स्ट लेडी, क्राउन ऑफ़ गोल्ड स्मिथ, येल्लो स्टोन, मिस्टान, और स्पन गोल्ड।
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फ़्रेंच गेंदा
यह छोटे आकार का गेंदा होता है और इसकी ऊंचाई लगभग 30-37.5 सेंटीमीटर तक होती है। इसके फूल इकहरे और दोहरे दोनों तरह के होते हैं और इनका रंग पीला, नारंगी, सुनहरा, महोगनी, चित्तीदार, लाल, और मिश्रित रंगों का होता है। इसकी कुछ किस्में ये हैं। रस्टी रेड, फ़्लेम, और स्प्रे।
पसा बसंती गेंदा
यह लंबे समय तक फलने वाला गेंदा होता है। इसके पौधे 58.80 सेंटीमीटर लंबे होते हैं और इनके पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं। इसके फूल सल्फ़र पीले, दोहरे, और कारनेशन किस्म के होते हैं।

गेंदे के फूल के फायदे
गेंदा फूलों की मालाओं का सर्वाधिक प्रयोग आम जीवन में किया जाता है। इसकी खूबसूरती और सुगंध सभी को अपनी ओर आकृष्ट करती है। इसका पौधा बरसात के मौसम में लगता है और सरे भारत में सवर्त्र पाया जाता है। इसकी ऊँचाई लगभग 3-4 फुट होती है। पत्ते 1-2 इंच लम्बे और कंगूरेदार होते हैं। जो मसलने पर अच्छी खुशबु देते हैं। पुष्प पीले रंग के नारंगी रंग के अक्टूबर नवम्बर महीनों में लगते हैं। जो आकार में अन्य फूलों के मुकाबले घने और बड़े-बड़े होते है। इनकी अनेक जातियां होती है, जिनमें मखमली, जाफ़रे, हवशी, सुरनाई और हजार ज्यादा प्रचलित है।
