जाने शास्त्री जी ने देश में कैसी बदली खेती-किसानी की तस्वीर

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मीनाक्षी पाल

देश को जय जवान-जय किसान का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की आज जयंती है। जिस समय शास्त्री जी देश की सत्ता पर काबीज हुए उनके सामने घरेलू और सीमा सुरक्षा की दौहरी चुनौतियां थी। आजादी के बाद देश खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था। देश को भुखमरी से निकालने के लिए फसल उत्पादन और पशुपालन में बदलाव का काम शास्त्री जी ने किया था। इनके कार्यकाल में ही हरित क्रांति और श्वेति क्रांति की नींव रखी गयी थी।  देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। शास्त्री जी जवाहरलाल नेहरू के पश्चात देश के प्रधानमंत्री बने थे। शास्त्री जी को उनकी सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति के लिए हमेशा याद किया जाता है। उनकी ईमानदारी और स्वाभीमान के कारण ही हर देशवासी उनका सम्मान करता है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद देश आर्थिक रूप से कमजोर हो गया था। नेहरू जी की मृत्यु के बाद देश का शासन शास्त्री जी ने संभाला। इस दौरान देश में खाद्यान्न की कमी हो गई थी और खाद्य पदार्थों का आयात बढ़ गया था। देश को खाद्य संकट से निकालने के लिए उन्हीं के कार्यकाल में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की नींव रखी गई थी।

अमेरिका को दिया करारा जवाब

1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने धमकी देते हुए कहा था। यदि भारत ने युद्ध विराम नहीं किया तो वह भारत में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा देगा। अमेरिका के इस बयान का जवाब देते हुए शास्त्री जी ने कहा कि गेहूं बंद करना है तो बंद कर दें मैं इसकी परवाह नहीं करता और उन्होंने खुद अमेरिका से गेहूं का आयात बंद कर दिया। उस समय भारत अमेरिका से ए- पील 480 स्कीम का लाल गेहूं का निर्यात करता था। देश में अनाज उत्पादन बढ़ाने और सेना के मनोबल को बढ़ावा देने के लिए शास्त्री जी ने 1965 में दिल्ली के रामलीला मैदान से जय जवान जय किसान का नारा दिया। इसके साथ ही देशवासीयों से सप्ताह में एक दिन का उपवास करने का आग्रह किया। देश को खाद्य संकट से निकालने के लिए शास्त्री जी ने हरित क्रांति और श्वेत क्रांति पर काम करना शुरू किया। किसानों में जोश भरने के लिए खुद खेत जाकर हल भी चलाया।

शास्त्री जी के शासन काल में शुरू हई हरित क्रांति

देश को खाद्यान्न संकट से उभारने के लिए शास्त्री जी के शासन काल में हरित क्रांति की योजना पर काम शुरू हुआ। हरित क्रांति से पहले देश अमेरिकी शीतकालीन गेहूं का उपयोग कर रहा था जो हमारी जलवायु में अच्छे परिणाम नहीं देते थे। भारतीय कृषि वैज्ञानिक डॉ एम.एस स्वामीनाथ ने कृषि वैज्ञानिक नार्मन बोरलॉग ने संपर्क किया, जो उस समय गेहूं के बीज पर काम कर रहे थे। स्वामीनाथन ने उनसे भारत के लिए गेहूं का बीज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। 1963 में मेक्सीको के कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने भारत का दौरा किया। इसके बाद शास्त्री जी ने मेक्सिको से गेहूं के बीज बौनी किस्म को आयात करने का बड़ा निर्णय लिया। हरित क्रांति के तहत हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में खाद्यान्न में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। शास्त्री जी के इस निर्णय के बाद देश में 4 साल के भीतर गेहूं का उत्पादन 50 टन बढ़ गया। श्वेत क्रांति और हरित क्रांति सफलता के बाद देश में कृषि कार्यों को प्रोत्साहन मिलने शुरु हुआ और कृषि पर शोध कार्य तेज हो गया।

किसानों की समस्याओं से परिचित थे शास्त्री जी

लाल बहादुर शास्त्री स्वयं भी एक ग्रामीण परिवार से आते थे। वे किसानों के दर्द से भलिभांति परिचित थे। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए साल 1964 में शास्त्री जी ने अपने सचिव एलके झा के नेतृत्व में खाद्य एवं कृषि मंत्रालय की खाद्यान्न मूल्य समिति का गठन किया था। शास्त्री जी का मानना था किसानों को उनकी उपज का इतना दाम तो अवश्य मिलना चाहिए कि ताकि उन्हें नकुसान न हो।

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