पटना। (holi in in laws) ससुरारी में होली: भाषा और साहित्य में होली का विशेष स्थान रहा है। होली की सार्थकता सरस, समरस, मैत्रिपूर्ण व्यावहार में है। बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी और बिहार अंगिका अकादमी की ओर से ग्रंथ अकादमी के फणीश्वरनाथ रेणु सभागार में कविगोष्ठी और होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर अकादमी के निदेशक सत्येन्द्र कुमार ने कहा कि यह कवि गोष्ठी यशस्वी साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु के सम्मान में आयोजित की गई है।
विशेष आमंत्रित विद्वान बी. डी. कॉलेज हिंदी विभाग के अवकाश प्राप्त विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश चन्द्र चतुर्वेदी ने कहा होली का त्योहार हमें प्रेम और सौहार्द की भावना से जीने की प्रेरणा देता है। बिहार विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. राणा प्रताप ने होली मिलन की शुभकामनाए दीं। इस अवसर पर आयोजित कवि गोष्ठी में धर्मपाल ने भगवान शिव की होली ‘ बसहा चढ़ल एगो जोगिया’ गाकर कार्यक्रम का मंगलाचरण किया। गिरिधारी प्रसाद ने भोजपुरी रचना प्रस्तुत करते हुए गाया- हे गोविन्द मुरारी।’
(holi in in laws) ससुरारी में होली
हास्य के चर्चित कवि ओम प्रकाश पांडेय प्रकाश ने कहा – ‘जय होली जय होली जय होली…बड़े बड़े दही बड़े में भंग। कवियित्री लता प्रासर ने होली पर रचित कविता गाते हुए कहा- छेड़ छाड़ न करता कोई होली आयी रे….। पंकज प्रियम ने अपनी रचना में कहा – होली मिलन रुत आयी, होली खेले वृजलाल। दिवाकर कुमार ने ससुरारी में होली शीर्षक से अपनी कविता सुनायी। पुतुल कुमारी ने मैथिली में रचना प्रस्तुत करते हुए कहा- अहाँ निज बेचि के ईमान अप्पन घर सजाबै छी। प्रियंका कुमारी ने कहा – दुनिया के बाजार में मोनक व्यापारक अछि पुराण इतिहास।
रजनीश प्रियदर्शी ने जीवनक रंग शीर्षक से अपनी रचना में कहा – अखरा रोटी जे नहि खेलक से की बूझत रोटिक मोल। रवि किशन ने कहा -जब भी आंखों की पगडंडियों में देखा कितने सपने उड़ते हैं। आशुतोष विनायक ने अपनी रचना में कहा – हर कण कण हर लम्हा लम्हा न जाने क्यों है तन्हा तन्हा। गीतों में ढोलक संगति कन्हैयालाल और झाल संगति वेद प्रकाश सिंह ने किया। अकादमी के निदेशक सत्येन्द्र कुमार ने सभासदों को अबीर का टीका लगाकर होली मिलन की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुचि स्नेहा ने किया। इस अवसर पर अकादमी के वरिष्ठ कर्मी सुबोध कुमार, बिजेंद्र कुमार ओझा सहित सभी अकादमी और राष्ट्रभाषा परिषद के सभी कर्मी शामिल हुए। धन्यवाद ज्ञापन हृदय नारायण झा ने किया।
