आलोक रंजन,युवा पत्रकार
दुनिया भर में तमाम तिथियां मुकर्रर हैं किसी न किसी दिवस के नाम। लेकिन भारत जहां की 70 फीसदी आबादी अब भी गांव में रहती है वहां ग्रामीण दिवस नहीं मनाया जाता। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ग्रामीणजन सजग हो गए हैं। उन्होंने फैसला किया है कि वे जब तक सरकार ग्रामीण दिवस की घोषणा नहीं करती उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्श गांव जयापुर और नागेपुर के प्रधान भी शामिल हैं।
मांग मनवाने को बनाई मानव श्रृंखला
मांग पूरी कराने के लिए गांव के बच्चे, बूढ़े, जवान, महिला-पुरुष सब एकजुट हुए। रविवार को वे जुटे खुशियारी गांव में और बनाई मानव श्रृंखला। इसमें 100 से ज्यादा ग्राम प्रधान शामिल थे। खास तौर पर पीएम के अदर्श गांव जयापुर और नागेपुर सहित लोहता, कोटवा, अखरी, कादीपुर, बच्छांव, खरिरपुर, तारापुर, बेलना, कंचनपुर, केराकतपुर, चन्दापुर, मढ़ौली, शिवदासपुर, अव्लेश्पुर, आदि गावों से आये प्रधानों ने मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीण दिवस की मांग की। प्रधानमंत्री मोदी के आदर्श गांव जयपुर और नागेपुर के प्रधान भी शामिल रहे। कार्यक्रम स्थल पर 500 मी तक सैकड़ों लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई। 50 लोग कई तख्ती लिए हुए थे जिस पर लिखा था रोटी कपडा सबकी मांग, ग्रामीण दिवस हमारी मांग, उन्नति की पहचान, गांव का उत्थान, इस तरह के कई स्लोगन वाली पट्टियां ये ग्रामीण अपने हाथों में लिए थे।
देश भर में अभियान छेड़ने का संकल्प
ग्राम प्रधानों के बीच गांव के विकास के मुद्दे पर महत्वपूर्ण चर्चा भी हुई। तय हुआ कि जब तक ग्रामीण दिवस घोषित नहीं हो जाता यह अभियान भारत के कई राज्यों में चलेगा। ग्रामीणों ने ग्रामीण दिवस के मांग के बाबत 11,000 हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर युक्त 250 पन्नों की प्रतियां प्रधानमंत्री को भेजी हैं।

होप वेलफेयर ने आयोजित किया यह अभियान
287 युवाओं द्वारा स्थापित होप वेलफेयर संस्था ने खुशियारी गांव में 100 से ऊपर प्रधानों की मदद से ग्रामीण दिवस मानाने की मांग की7 इस कार्यक्रम के मुख्या अतिथि थे बीएचयू. के प्रोफेसर डॉ राकेश पाण्डेय।

