Onion: त्योहारी सीजन में लोगों पर प्याज की मार का असर दिख रहा है। देश के बाजारों में प्याज का औसत खुदरा भाव 50 से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। जिससे लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है। प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार इन दिनों देश में रियायती दरों पर प्याज की बिक्री करवा रही है। उपभोक्ताओं को सरकारी एजेंसियों भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर पर प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है। शुरुआत में सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में रियायती दर पर प्याज की बिक्री शुरू हुई थी। लेकिन अब सरकार ने यूपी, बिहार, झारखंड, बंगाल समेत देश के अन्य राज्यों में भी कम दाम वाले प्याज की बिक्री शुरू कर दी है।
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सितंबर से बढ़ी हुई है सब्जियों की कीमतें
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में प्याज की कीमतों सालाना आधार पर 66.1% बढ़ गई थी। इसके अलावा आलू का रेट भी 65% बढ़ गया था और टमाटर भी 42.2% महंगा हो गया था। इसके अलावा भी बैंगन, गाजर, पत्ता गोभी, फूलगोभी, मटर, पालक जैसी सब्जियों के रेट भी 20% से ज्यादा बढ़ गए थे। सस्ती दरों पर प्याज उपलब्ध कराए जाने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और स्थानीय आपूर्ति में सुधार करना है। फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतें 60 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक पहुंच गई हैं। एनसीसीएफ ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों से सीधे प्याज खरीदकर उसका बफर स्टॉक तैयार किया है। इसी बफर स्टॉक के जरिए देशभर में प्याज की आपूर्ति की जा रही है।
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने और बिचौलियों द्वारा की जाने वाली अधिक कीमतों से राहत दिलाने के लिए प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। इस पहल से न सिर्फ कीमतों पर लगाम लगेगी बल्कि किसानों से सीधे खरीदी करके उपभोक्ताओं तक रियायती दर पर प्याज पहुंचाने में मदद मिलेगी।

