दृढ़ संकल्प और नवाचार के साथ ‘भारत के मशरूम शहर’ को केसर की खेती करके ‘भगवा शहर’ में बदलने का एक प्रयास गौरव सबरवाल द्वारा किया गया
सोलन की केसर क्रांति
सोलन पहाड़ियों के बीच बसे और मशरूम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध सोलन के विचित्र शहर में साहसी सपनों और कृषि प्रतिभा की एक कहानी सामने आई है। गौरव सबरवाल एक दृढ़निश्चयी उद्यमी है । जिसने परंपरा को तोड़ने और अपने मामूली 300 वर्ग फुट के लॉन को एक संपन्न एरोपोनिक केसर फार्म में बदलने का साहस किया। अपने पिता की जूते की दुकान संभालने से लेकर अग्रणी कृषक बनने तक गौरव की यात्रा केवल कृषि नवाचार की कहानी नहीं है। बल्कि उस अदम्य भावना का प्रमाण है जो मशरूम के लिए जाने जानेवाले शहर को ‘केसर शहर’ में बदल सकती है।
गौरव की कहानी
गौरव की कहानी चार साल पहले शुरू हुई जब उन्हें अपने पिता का जूता व्यवसाय विरासत में मिला। उन्होंने पारिवारिक व्यवसाय के भीतर एक साधारण जीवन की कल्पना की। हालाँकि भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। पारिवारिक कर्ज़ के बोझ और जूते के कारोबार में चुनौतियों का सामना करने के कारण गौरव ने बदलाव की मांग की। व्यवसाय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर। उन्होंने अधिक आकर्षक उद्यमों की संभावनाओं पर ध्यान दिया।
सोलन में मशरूम की खेती के संतृप्त बाजार के बीच गौरव की विशिष्टता की खोज ने उन्हें एक आश्चर्यजनक खोज तक पहुंचाया जो थी एरोपोनिक्स का उपयोग करके केसर उगाने की क्षमता। जबकि केसर पारंपरिक रूप से कश्मीर से जुड़ा हुआ था। गौरव ने इस ‘लाल सोने’ को हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में लाने का अवसर देखा।
एरोपोनिक्स ईरान और इज़राइल में लोकप्रिय एक क्रांतिकारी तकनीक है। जिसमें मिट्टी के बिना पौधे उगाना शामिल है। नियंत्रित रसायन-मुक्त वातावरण में केसर की खेती की संभावना से प्रेरित होकर गौरव ने अनुसंधान और अन्वेषण की यात्रा शुरू की। 10 लाख रुपये के ऋण और सरकार की स्टार्टअप योजना के समर्थन से उन्होंने अपने एरोपोनिक केसर फार्म शूलिनी केसर की स्थापना की।
सबसे बड़ी चुनौती केसर की खेती के लिए आवश्यक विशिष्ट पर्यावरणीय परिस्थितियों की नकल करना था। सोलन की जलवायु भारत के पारंपरिक केसर केंद्र कश्मीर से बहुत दूर थी। निडर होकर गौरव ने तापमान को नियंत्रित करने और केसर के विकास के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने के लिए एक नियंत्रित पर्यावरण प्रयोगशाला का उपयोग किया।
सफलता की राह बाधाओं से रहित नहीं थी। गौरव को फंगल संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उनका दृढ़ संकल्प अडिग साबित हुआ। असफलताओं को स्वीकार करते हुए उन्होंने अपनी केसर की फसल के स्वास्थ्य और जीवन शक्ति को सुनिश्चित करते हुए चुनौतियों का तेजी से समाधान करना सीखा।
आठ महीने की कड़ी मेहनत के बाद, गौरव ने 500 ग्राम केसर की खेती की और इसे बाजार दरों से भी अधिक 500 रुपये प्रति ग्राम की कीमत पर बेचा। रसायनों से मुक्त और एरोपोनिक्स का उपयोग करके उगाए गए उनके उत्पाद ने बाजार में महत्वपूर्ण ध्यान और मांग हासिल की।
जो बात गौरव के उद्यम को अलग करती है वह है इसकी साल भर उपलब्धता जो एरोपोनिक खेती के फायदों का प्रमाण है। गौरव की सफलता ने न केवल वित्तीय लाभ कमाया है बल्कि उसके आसपास के समुदाय को भी प्रेरित किया है। पांच व्यक्ति पहले ही उनसे एरोपोनिक केसर की खेती की तकनीक सीख चुके हैं। और नियमित रूप से अधिक पूछताछ की जा रही है।
अब गौरव शूलिनी केसर का विस्तार कर रहे हैं और अधिक ग्राहकों तक पहुंचने की योजना रहे हैं है। वह सिर्फ केसर की खेती नहीं कर रहे हैं। वह सोलन में नवाचार और प्रेरणा के बीज बो रहे हैं। उनकी यात्रा लचीलेपन की शक्ति, उद्यमिता की भावना और पारंपरिकता से परे सोच के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है। गौरव सबरवाल न केवल सोलन को ‘केसरिया शहर’ में बदल रहे हैं। वह कृषि के भविष्य के लिए समृद्धि और स्थिरता की दृष्टि विकसित कर रहे हैं।
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