संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: आज ‘जंतर—मंतर पर गो रक्षकों का जमावड़ा था। मौका था..गोरक्षा संकल्प समिति, राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन एवं विभिन्न संगठनों के तत्वावधान में दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर आयोजित साधु संतों के प्रदर्शन का। 7 नवम्बर 1966 को गौ रक्षा आंदोलन के दौरान गो भक्तों के बलिदान को याद करने का। भारी भीड़। लगभग 10—15 हजार गौ भक्त जरूर रहे होंगे। लेकिन तय नहीं कर पा रहा हूं ये फर्जी गौ भक्त थे या असली। क्योंकि खुद देश के प्रधान मंत्री ने कहा था, ‘मैं देशवासियों को बताना चाहता हूं कि ऐसे फर्जी गौरक्षकों से सेचत रहें। 80 फीसदी गौरक्षक गोरखधंधों में लिप्त हैं। जो समाज और देश को बांटना चाहते हैं और राज्यों से इन्हें कड़ा दंड देने को कहा। प्रधानमंत्री ने राज्यों से ऐसे लोगों की पहचान करने को कहा जो समाज के तानेबाने को नष्ट करना चाहते हैं और इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। इनमें से अधिकांश असामाजिक तत्व है और गौ रक्षा के नाम पर अपनी दुकान चला रहे हैं और इससे उन्हें नाराजगी होती है।
खैर, इतनी बड़ी संख्या में उपस्थित गो भक्तों को संबोधित करते हुए भाजपा नेता एवं राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने आज कहा कि गोहत्या पर रोक का संवैधानिक प्रावधान होने के बाद भी आजादी के बाद से इसे क्रियान्वित नहीं किया गया और अब ऐसा वक्त आ गया है कि गोहत्या पर संपूर्ण पाबंदी लगाया जाए और हमें इसका पूरा भरोसा है।”
ग्रामीण जीडीपी में गाय का महत्वपूर्ण स्थान
सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि गोरक्षा हमारे अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा का सवाल है। गाय की रक्षा करना देश की रक्षा करना है क्योंकि अभी तक ग्रामीण जीडीपी में गाय का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि गौ की रक्षा के लिए गोवध पर संपूर्ण रोक लगनी चाहिए। गोरक्षा के बारे में हमारे संविधान में प्रावधान हैं। इसे क्रियान्वित करने का भी विधान है। हर सरकार को यह करना है लेकिन आजादी के बाद से सरकारों ने ऐसा नहीं किया। स्वामी ने कहा, मुझे विश्वास है कि अब हम ऐसे मोड़ पर आ गए हैं कि गोहत्या पर निश्चित तौर पर प्रतिबंध लगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि गोपालकों को गाय पालन करने के लिए सब्सिडी दी जाए।
बंग्लादेश तक फैला गो तस्करी का जाल
स्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में मांस के निर्यात पर सब्सिडी दी गई थी और अब इसे बंद किया जा रहा है। लेकिन तस्करों द्वारा बांग्लादेश में गाय को भेजना अभी भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। इस पर लगाम लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गायों को ट्रकों में ले जाने पर रोक लगाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम में प्रावधान करने की जरूरत है।
राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के प्रणेता और जाने-माने चिंतक गोविंदाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के समग्र विकास के लिए गोहत्या पर रोक लगाना सबसे जरूरी है। इस दिशा में संसद में संपूर्ण गोहत्या निषेध कानून बनाए जाने की जरूरत है। यह हमारी सरकार से मांग है। गोविंदाचार्य ने कहा कि ‘गोवंश के हितों को ध्यान में रखते हुए गोरक्षा, गोपालन और गौ संवर्धन के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार में गो मंत्रालय की स्थापना की जाए।
गंगा और गाय साम्प्रदायिक मुद्दा नहीं बल्कि सभ्यता और देश की पहचान से जुड़ा विषय है। यह अर्थव्यवस्था, पर्यावरण समेत व्यापक संदर्भ वाला विषय है। ऐसे में गंगा और गाय की सुरक्षा वक्त की जरूरत है। उन्होने कहा कि आजादी के बाद से देश में प्रति मनुष्य मवेशियों के अनुपात में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। आजादी के समय एक मनुष्य पर एक मवेशी था जबकि आज 7 मनुष्य पर एक मवेशी का अनुपात रह गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में केंद्र स्तर पर गोवध प्रतिरोधक कानून लाया जाना चाहिए, साथ ही वनभूमि का अतिक्रमण रोका जाना चाहिए।
गो रक्षा के लिए जारी हुए निर्देशपत्र
राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन एवं अन्य गोरक्षा संगठनों द्वारा गोरक्षा के विभिन्न बिन्दुओं पर एक निर्देश पत्र तैयार किया गया है। इसके तहत यह मांग की गई है कि देश में संपूर्ण गोहत्या बंदी का केंद्रीय कानून बने, भारतीय गोवंश पर छाए संकट को दूर करने के लिए गोमांस के निर्यात को प्रतिबंधित किया जाए, गोचर भूमि को सरकारी एवं गैर सरकारी अतिक्रमण से मुक्त किया जाए।
गोविंदाचार्य ने कहा कि आजादी के बाद से देश में प्रति मनुष्य मवेशियों के अनुपात में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। आजादी के समय एक मनुष्य पर एक मवेशी था जबकि आज 7 मनुष्य पर एक मवेशी का अनुपात रह गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में केंद्र स्तर पर गोवध प्रतिरोधक कानून लाया जाना चाहिए, साथ ही वनभूमि का अतिक्रमण रोका जाना चाहिए।
गौरतलब है कि 7 नवम्बर 1966 को गौ रक्षा आंदोलन स्वामी करपात्री जी महाराज के नेतृत्व मैं बोट क्लब इंडिया गेट पर हुआ। जहाँ संसद का घेराव करते हुए संतो और गौभक्तो के ऊपर गोलियां चला दी थी,जिसमे सैकड़ो गौभक्त का बलिदान हुआ व घायल हुए,क्योंकि सभी संत समाज गौहत्या बंद की मांग कर रहे थे। उस समय इंदिरा गांधी के नेतृत्व में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।

