आलोक रंजन, युवा पत्रकार
गंगा का प्रवाह थमा सा है। अठखेलियां दिख नहीं रहीं. कल-कल निनाद सुनाई नहीं दे रहा, तो क्या हो रहा, बताते हैं…चलिए कर्नाटक स्टेट घाट, वहां निनाद सुनाई देगा रंगीन पानी का जो नाले के मार्फत गिर रहा गंगा में। इसे देख सामान्य जन तो ठिठक जा रहा। पर प्रशासन को ये नहीं दिखता। ये और कहीं से नहीं उस घाट किनारे की बस्तियों सो आ रहा है। आसपास की फैक्ट्र्यों से सीवर लाइन के रास्ते आ रहा है। इसे रोकने के लिए कभी भाजपा पार्षद स्व नारायण मिश्र ने मिनी संसद से सड़क तक आवाज बुलंद की थी। संकट मोचन मंदिर के महंत पर्यावरणविद् स्व. प्रो. वीरभद्र मिश्र ने संघर्ष छेड़ा था पर उन दोनों आवाज नक्कारखाने में तूती बन कर रह गई।ये है प्रसिद्ध श्मशान हरिश्चंद्र घाट जो धोबी घाट में तब्दील हो गया है। सुबह से ही यहां गंगा का कलरव नहीं पाटों पर पिटते कपड़ों की थाप सुनवाई देगी। घाट पर बने प्लेटफार्म की रेलिंग कपड़ा सुखाने के काम आते हैं, बे रोक टोक।
इसी हरिश्चंद्र घाट पर तबेला, गाय भैंस जुगाली करतो दिख जाएंगी हर आम आदमी को पर नहीं दिखता तो हमारे प्रशासन को, क्यों दिखे? वो तो भव्यता का चश्मा जो पहन रखे हैं। ये तबेला और कहीं नहीं काशी के इकलौते विद्युत शवदाह गृह के नीचे है। अब लघुशंका करते कोई दिख जाए तो उसका क्या दोष, कचरा ही तो है गंदगी ही तो है फिर एक के लघुशंका करने से हंगामा क्यो बरपा। ऐसे ही एक से ग्यारह और जानें कितने एक पर एक।
काशी के घाट, अर्द्ध चंद्राकार ये घाट जो देते हैं सुबह -ए-बनारस को आकार। जिसकी भव्यता विश्व प्रसिद्ध है। जिसे देखने दुनिया भर के पर्यटक आते हैं। ये घाट हैं उत्तर वाहिनी गंगा के सुरम्य तट पर। पर ये क्या न गंगा का कल-कल निनाद, न घाटों की भव्यता। क्या केवल वीवीआईपी घाट ही हैं काशी के पर्यटकों के आकर्षण। क्या कोई बता सकता है गंगा जल नीला होता है।नेहरू से मोदी तक का गुणगान करने वाले काशी के विशिष्ट जन, एलिजाबेथ से शिंजो आबे तक के आतिथ्य, क्या कभी सोचा केवल गिने चुने घाटों पर मखमली चादर बिछाने या फाउंटेन लगाने से काशी के घाटों की भव्यता आएगी। गिने चुने घाटों पर सांस्कृतिक आयोजनो से गंगा का आंचल उज्ज्वल धवल हो जाएगा।
योजनाओं के आईने घाट ए बनारस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी को दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर खास जगह दिलाने के लिए खाका तैयार ही नहीं हुआ है बल्कि योजनाएं जल्द ही मूर्त रूप लेने वाली है। कई योजनाओं के डीपीआर तैयार हो गए हैं। अस्सी घाट पर लाइट एंड साउंड लेजर शो
लगभग 10 करोड़ की लागत से अस्सी घाट पर लाइट एण्ड साउण्ड लेजर शो का डीपीआर तैयार किया गया है। जिसे शीघ्र शासन को भेज दिया जाएगा। इस लेजर शो की विशेषता होगी कि यह गंगा में लगभग 25 फीट अन्दर से किया जायेगा तथा शो के दौरान उठने वाली लेजर की चौड़ाई लगभग 100 फीट तथा ऊचाई 45 फीट होगी। इस लाइट एण्ड साउण्ड लेजर शो में घाट पर कोई पक्का निर्माण नही होगा। यही नहीं वाराणसी में पर्यटन को बढ़ावा देने केउद्देश्य से राजघाट से अस्सी तक 42 सीटर रीवर क्रूज चलाया जाएगा. इसके लिए डीपीआर तैयार कर जल्द शासन को भेज दिया जाएगा। इस पर लगभग 15 करोड़ रूपये का व्यय होगा। रीवर क्रूज एवं अस्सी घाट पर होने वाले लाइट एण्ड साउण्ड लेजर शो की डीपीआरतैयार करने वाली संस्था आगामी 3 से 5 वर्ष तक इसका रखरखाव करेगी। तत्पश्चात् पीपीपी के आधार पर इसका संचालन होगा। घाटों के सौंदर्यीकरण को 3.60करोड
घाटों के सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग ने नगर निगम को दिए हैं 3.60 करोड़। इससे घाटों पर डस्टविन, छतरी, चौकी आदि रखे जाएंगे। साथ ही प्रकाश व साइनेज आदि की व्यवस्था 31 मार्च तक पूरी होगी। हेरिटेज वॉक की समीक्षा के दौरान पर्यटन विभाग के अधिकारी हेरिटेज वॉक के लिए चिन्हिंत गलियों का भ्रमण कर व्यापक साफ-सफाई की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। गंगा घाट किनारे की चिन्हिंत गलियों की साफ-सफाई के लिए वार्डवार टीम तैयार होगी और सफाई सुपरवाइजरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ये भी होंगे
इसके अलावा प्रसाद योजनान्तर्गत बुद्धा थीम पार्क का विकास, सारंगनाथ तालाब का सौन्दर्यीकरण, गुरूघाम मंदिर का सौन्दर्यीकरण, कैथी स्थित मारकण्डेय महादेव मंदिर के पास 50 मीटर लम्बाई में पक्का घाट का निर्माण, मारकण्डेय महादेव मंदिर का समेंकित विकास आदि कार्यो के लिये लगभग 50 करोड़ रूपये के डीपीआर का प्रस्तुतीकरण किया गया। इन कार्यो कीशासन स्तर से सैद्वान्तिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। सारनाथ में 8 करोड़ 56 लाख की लागत से बनने वाले लाइट एण्ड साउण्ड सिस्टम के डीपीआर को शासन स्तर से मंजूरी मिल गयी है और संबंधित शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।


