विषाक्त मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत मामले पर कोर्ट का आया फैसला

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चंदन कुमार

सारण: ऐसा नहीं है विषाक्त मिड डे मिल स्कूलों में मिलने का सिलसिला रूक गया हो, और न ही बच्चों के इससे प्रभावित होने, बीमार होने और यहां तक की मारे जाने का। आपको याद ही होगा छपड़ा के गंडामन गांव की घटना। खैर इस मामले में फैसला आ गया है और दोषियों के खिलाफ अदालत ने कड़ी कारर्वाई करते हुए सजा मुकर्रर की है।

मशरक में विषाक्त मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत मामले में पर कोर्ट ने तत्कालीन प्रधान शिक्षिका मीना देवी को 17 साल की सजा सुनाई है। जिस मिड डे मील योजना के माध्यम से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने कवायद कर रही है।

gandamannnवह 16 जुलाई 2013 को सारण जिले के मशरक प्रखंड के धर्मासती गंडामन स्कूल के लिए अभिशाप बन कर आया था। विषाक्त मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत हो गयी थी। और दर्जन भर बच्चे बीमार हो गये थे। इस घटना का शिकार हुए आशीष के पिता अखिलानंद मिश्र ने मशरक थाने में ‍प्राथमिकी दर्ज कराते हुए मीना देवी समेत अन्य अज्ञात को अभियुक्त बनाया था।

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मिड डे मील कांड में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। तत्कालीन प्रधान शिक्षिका मीना देवी को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने 17 साल की सजा के साथ-साथ तीन लाख 25 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। एक धारा में दस साल की सजा सुनायी गयी है. वहीं एक में सात साल की सजा सुनायी गयी है. धारा 304 में दस साल की सजा और ढाई लाख रुपया जुर्माना. धारा 308 में सात साल की सजा और सवा लाख रुपया जुर्माने की सजा सुनायी गयी है। दोनों सजा अलग-अलग चलेगी.

24 अगस्त को हुई थी सुनवाई

इससे पूर्व मशरक के गंडामन धर्मासती स्थित विद्यालय में विषाक्त मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत के मामले में कोर्ट ने तत्कालीन प्रधान शिक्षिका मीना देवी को दोषी करार दिया था. वहीं, कोर्ट ने मीना देवी के पति अर्जुन राय को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय विजय आनंद तिवारी ने अधिवक्ताओं से खचाखच भरे न्यायालय में गंडामन मामले में फैसला सुनाते हुए मुख्य अभियुक्त व विद्यालय की तत्कालीन प्रधान शिक्षिका मीना देवी को भादवि की धारा 304 और 308 के तहत दोषी करार दिया था।

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