-खेल सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, यह हर बच्चे के विकास के लिए ज़रूरी है।
-खेल मौज मस्ती से बढ़कर है। यह रह बच्चे के खुशहाल भविष्य और विकास के लिए जरूरी है।
अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस: खेल महज एक मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह बच्चों के विकास का आधार है। खेल बच्चों को व्यवहारिक जीवन के लिए बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से सीखने के अवसर देता है। खेल के जरिए बच्चे दूसरों के साथ कनेक्शन बनाते हैं, चुनौतियों का सामना करना सीखते हुए अपने डर पर विजय पाते हैं। और खेल बच्चों को तेज़ी से बदलती दुनिया को पनपने में मदद करता है। इसके लिए आपको 11 जून तक का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अपने बच्चे के साथ खेलकर हर दिन को आंनदमयी बनाया जा सकता है। और याद रखियें, आपके पास खेल के जरिए हर दिन अपने बच्चे के साथ यादें बनाने का सुनहरा मौका है।
यूनिसेफ ने की पहल…
यही वजह है कि बच्चों के लिए अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली संस्था यूनिसेफ ने खेल संबधी चिंताओं पर विचार करने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में देश के बड़े रेडियो चैन्लस के प्रोगामिंग हेड्स, सीनियर रेडियो जॉकीज़ और प्रोड्यूसरों ने समेकित रूप से खेल संबंधी चिंताओ और बच्चों पर होने वाले इसके असर पर चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन यूनिसेफ इंडिया द्वारा अपने रेडियो 4 चाईल्ड प्लेटफॉर्म के तहत किया। इस वर्कशॉप में ऑल इंडिया रेडियो, प्राइवेट एफएम चैनल और कम्युनिटी नदी रेडियो के 30 से ज्यादा मीडिया प्रोफशनल्स ने भागीदारी की।
अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस 2025 की थीम?
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस की थीम है “हर दिन खेलों को चुनें”। यह थीम सरकारें, व्यवसाय, स्कूल और परिवार सभी को ऐसे निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी जिसमें हर बच्चे को प्रतिदिन खेलने का अधिकार मिल सके। यह हम सभी के लिए एक रिमाइंडर की भांति है, क्योंकि खेलना हर बच्चे का अधिकार है।
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मिलजुल कर रहना:
खेल बच्चों को मिलजुल कर रहना, साथ में खेलना और आपसी झगड़ों को सुलझाना सिखाता है।
भावनाएं समझना और जाहिर करना:
खेल बच्चों को अपनी खुशियाँ, ग़ुस्सा या डर जैसी भावनाएं बाहर लाने का मौका देता है और उन्हें अपने आप को संभालना भी सिखाता है।
दूसरों की भावनाएं समझना:
खेलने से बच्चे यह समझते हैं कि सामने वाले को कैसा लग रहा है। इससे उनके अंदर दूसरों के लिए समझ और अपनापन आता है।
खुद पर भरोसा:
जब बच्चे खेलते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे कुछ कर सकते हैं, इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
हिम्मत और धैर्य:
खेल बच्चों को सिखाता है कि गिरने के बाद कैसे उठना है, और हार-जीत को कैसे सहना है।
बच्चों के लिए खेल क्यों ज़रूरी है– मुख्य बातें
•खेल हर उम्र के लोगों के लिए होता है, बच्चे, बड़े और बुज़ुर्ग सभी के लिए।
•माँ-बाप भी रोज़मर्रा के कामों (जैसे खाना खिलाना या कपड़े पहनाना) में खेल को शामिल कर सकते हैं।
•खेल बच्चों के दिमाग और शरीर दोनों को मज़बूत बनाता है।
•खेल से बच्चों को मज़ा, आराम और खुशी मिलती है। ये उनके मानसिक संतुलन के लिए ज़रूरी है।
•खेल बच्चों के सोचने, समझने और महसूस करने की ताक़त को बढ़ाता है।
•खेल रिश्ते बनाने, डर को जीतने और मुश्किलों का सामना करने में मदद करता है।
•हर माँ-बाप को चाहिए कि वो रोज़ थोड़ा समय बच्चों के साथ खेलने में बिताएं, सिर्फ स्कूल तक ही अपनी जिम्मेदारी को सीमित न रखें।
•कम मोबाइल और टीवी, ज़्यादा खेल– यही सही रास्ता है।
•माँ-बाप या घर के बड़े जब बच्चों के साथ खेलते हैं, तो बच्चों को प्यार और सुरक्षा का एहसास होता है।
•खेल से बच्चों में ज़रूरी जीवन कौशल (जैसे बातचीत, समझदारी, धैर्य) बनते हैं।
•बच्चों को खेलने के लिए समय, जगह और एक सुरक्षित माहौल मिलना बहुत ज़रूरी
है।


