चाईबासा : झारखंड के चाईबासा जिले के टोन्टो प्रखंड के टोन्टो पंचायत के चार गांव प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना में चयनित किया गया है। ये गांव हैं कुदामसदा, लिसी मोती टोन्टो तथा बांदा बेड़ा। इन चारों गांव का विकास गांव के ही लाभुक समिति के द्वारा किया जाएगा।
मुखिया ने की बैठक
गांव के विकास के लिए प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना में जिन योजनाओं को लिया जाना है उसको लेकर पंचायत के मुखिया दीपिका लागुरी ने पंचायत के अन्य जनप्रतिनिधियों गांव के मुंडा और ग्रामीणों के साथ संयुक्त बैठक की, जिसमें गांव के विकास की रूपरेखा और इसके लिए खाका तैयार किया गया। इसके अंतर्गत विकास योजनाओं में गांव में पेयजल की व्यवस्था आवागमन के लिए रोड की सुविधा, व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालय की सुविधा के साथ-साथ गांव के मानचित्र तैयार कर व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास और सिंचाई योजनाओं का चयन किया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि ओम साई खादी ग्रामोद्योग संस्था रांची को यहां पर विकास कार्यों को पूरा करने की जिम्मेवारी होगी।
कार्यकारी एजेंसी के द्वारा ग्राम स्तर पर लाभुक समिति बनाकर विकास कार्य किया जाएगा। इस बैठक में यह भी तय हुआ कि ग्रामसभा सर्वोपरि माना जाएगा और ग्राम सभा के फैसले के अनुरूप ही कार्ययोजना पर काम होगा।
अबुआ आवास योजना पर हुई चर्चा
साथ ही इस बैठक में अबुआ आवास योजना के बारे में भी विचार विमर्श किया और इस बात पर भी जोड़ दिया गया कि एक परिवार में एक से अधिक आवेदन स्वीकार नहीं होगा। पूर्व में जिन्हें आवास मिल गया है उनका आवेदन स्वीकार नहीं होगा। जिनके पास चार पहिया, तीन पहिया वाहन, फ्रीज, ढाई एकड़ से ज्यादा जमीन है इन सभी आबूआ आवास योजना नहीं मिलेगा। सभी को आवास योजना सूची जारी करते हुए जानकारी साझा की।
बैठक में इनकी रही उपस्थिती
इस बैठक में पूर्व मुखिया बाबूराम लागुरी, महाती लागुरी, संजय लागुरी, सिद्धार्थ बोदरा, जयपाल लागुरी, सुनाये लागुरी, सीमा लागुरी, कोडमा लागुरी, लाली लागुरी, बिरंग लागुरी, बाबूराम लागुरी, जुगू लागुरी आदि बड़ी संख्या में महिला पुरुष उपस्थित थे।
क्या है प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना
देश के संविधान में अनुसूचित जनजाती क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किये गये हैं। इसी के तहत जनजातीय उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (Special Central Assistance to Tribal Sub-Scheme -SCA to TSS) योजना लाई गई. ये योजना आदिवासी बहुल गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ बनाने की परिकल्पना करती है। इसमें अनुसूचित जनजाति के लोगों को नेतृत्व करने लायक बनाने के लिए उनकी बुनियादी सेवाओं और सुविधाओं तक पहुंच बनाना है ताकि वो सम्मान का जीवन जी सकें और अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल कर सकें। सरकार ने इसी एससीए-टीएसएस योजना में संशोधन किया है। अब साल 2021-22 से 2025-26 में इस योजना पर ‘प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना -पीएमएजीवाई’ नाम के साथ काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना का लक्ष्य
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना -पीएमएजीवाई का मकसद में जनजाति वाले गांवों को आदर्श स्तर तक लाना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय की 2021-22 से 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत 4.22 करोड़ वाली जनजाति या आदीवासी आबादी वाले गांवों को मॉडल यानी आदर्शगांव बनाए जाने की योजना है। दरअसल इस योजना के तहत आने वाले गांवों की ये आबादी कुल जनजाति आबादी का 40 फीसदी है।
साथ ही इस योजना में कम से कम 50 फीसदी अनुसूचित जनजाति आबादी वाले 36,428 गांवों को मॉडल गांव बनाने की कवायद की जाएगी। इसके साथ ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस दौरान अधिसूचित 500 अनुसूचित जनजाति को भी इस योजना के दायरे में लाये जाने की योजना है।
‘प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना -पीएमएजीवाई’ का लक्ष्य इन गांवों का पूरी तरह से सामाजिक-आर्थिक विकास करना है। जैसे की गांवों की जरूरतों, क्षमताओं और आकांक्षाओं के आधार पर गांव के विकास की योजना तैयार करना। केंद्र और राज्य सरकारों की लाभ वाली योजनाओं का व्यक्ति विशेष और परिवारों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाना। स्वास्थ्य, शिक्षा, कनेक्टिविटी (संपर्क) व आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे में सुधार करना भी शामिल है।
कमियां होंगी दूर
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना का अहम मकसद गांवों के विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करना है. इसके तहत विकास के 8 क्षेत्रों की बड़ी कमियों को दूर किया जाएगा। इन क्षेत्रों में सड़क, दूरसंचार, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य उप-केंद्र, पेयजल, जल निकासी और ठोस ठोस अपशिष्ट प्रबंधन वाले क्षेत्र शामिल हैं। सड़क संपर्क की बात करें तो इसके तहत गांव के अंदर, दूसरे गांवों से गांव को जोड़ने वाली और गांव से ब्लॉक की सड़कों को मजबूत किया जाना है।
वहीं दूरसंचार संपर्क के तहत मोबाइल और इंटरनेट की व्यवस्था को चाक- चौबंद करना है। इसके साथ ही स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य उप-केंद्र, पेयजल सुविधा, जल निकासी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का पुख्ता इंतजाम किया जाना शामिल है। पीएमएजीवाई के तहत प्रशासनिक खर्चों सहित स्वीकृत कामों के लिए हर गांव को 20.38 लाख रुपये की धनराशि मुहैया कराये जाने की योजना थी इस रकम से आदिवासी गांवों में जिस तरह की सुविधाएं नहीं है या जिनकी कमी है वो पूरी की जाएगी।।
बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना के अलावा पीएमएजीवाई के तहत चुने गए गांवों में बुनियादी ढांचे और सेवाओं को मुकम्मल करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बढ़ावा दिया जाता है। इसके लिए उन्हें केंद्रीय और राज्य अनुसूचित जनजाति मद वाले (एसटीसी) फंड के साथ उनके पास मौजूद अन्य वित्तीय संसाधनों को सम्मिलित तौर पर इस्तेमाल में लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।



