सुप्रीम कोर्ट में पहली बार बधीर वकील ने की जिरह

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कोर्ट में आपने कई बार वकीलों को बहस करते देखा और सुना होगा। लेकिन क्या आपने बधिर वकील को कोर्ट परिसर में जिरह करते देखा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार एक बधिर वकील को अदालत में जिरह करने की इजाजत दी है।
सुनने में आपको अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में पहली बार एक बधिर महिला युवा वकील ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से देश के मुख्‍य न्‍यायधीश यानी CJI के सामने अपने केस में बहस की। सारा सन्नी को भारत की पहली पंजीकृत बधिर अधिवक्ता के रूप में जाना जाता है। अब वह सुप्रिम कोर्ट में जिरह करने वाली भारत की पहली बधिर वकील बन गई है। सन्नी ने हाल ही में विकलांग के अधिकारों से जुड़े मामले में अपनी दलीलें सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी।

यह कैसे हुआ संभव

रॉयचौधरी ने संकेत भाषा के माध्यम से सन्नी की सारी दलीलें जजों के सामने रखी और फिर जजों की सारी टिप्पणियां, आदेश सन्नी तक पहुंचाईं। इस मामले की अदालती कार्रवाई को 37 नंबर पर सूचीबद्ध होने के बावजूद अदालत ने सन्नी और रॉयचौधरी को पूरे दिन की कार्रवाई देखने की इजाजत दे दी। रॉयचौधरी ने दूसरे मामलों में भी पीठ द्वारा दी गई टिप्पणियों और आदेशों का सन्नी के लिए अनुवाद किया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रॉयचौधरी के हुनर से प्रभावित होकर उनकी तारीफ करते हुए कहा कि जज जिस रफ्तार से बोल रहे हैं रॉयचौधरी उसी रफ्तार से अनुवाद कर रहे हैं यह “वाकई अद्भुत” है।
सन्नी की इस उपलब्धि ने भारतीय न्याय व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती को रेखांकित किया है। न्यायिक व्यवस्था देश के सभी नागरिक के लिए है लेकिन मूक-बधिर और अन्य रूप से विकलांग लोगों तक कानून की पहुंच हमेशा से एक चुनौती रही है। आजादी के 74 साल बाद 2021 में सन्नी का देश की पहली बधिर अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण करवाना अपने आप में इस चुनौती का सबूत है।

कानून को सुलभ बनाना

माना जाता है कि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ इस विषय को लेकर विशेष रुप से सक्रिय हैं। उन्होंने कई बार न्याय तक पहुंच को सबके लिए सुलभ बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने 2022 में सुप्रीम कोर्ट परिसर का एक विस्तृत एक्सेसिबिलिटी ऑडिट भी करवाया था ताकि अदालत आने पर विकलांग लोगों द्वारा महसूस की गईं सभी चुनौतियों का पता लगाया जा सके।
लेकिन सन्नी का उदाहरण व्यवस्था के खुद को सुधारने से ज्यादा एक व्यक्ति के जीवट, आत्मविश्वास और सभी बाधाओं को लांघने के निश्चय की कहानी है। सन्नी केरल के कोट्टायम की रहने वाली हैं। उनकी जुड़वां बहन मरिया और बड़े भाई प्रतीक भी बधिर हैं। लेकिन तीनों के माता-पिता सन्नी और बेटी ने तीनों बच्चों की उनके सपने पूरे करने में पूरी मदद की।शुरुआती चुनौतियों के बाद सन्नी को सेंट जोसफ लॉ कॉलेज में दाखिला मिल गया, जहां से उन्होंने वकालत की पढ़ाई की। फरवरी 2021 में डिग्री हासिल करने के बाद वह कर्नाटक बार काउंसिल की सदस्य बन गईं। आज वह कई अदालतों में जिरह कर रही हैं।

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