बढ़ती ठंढ..झड़ेंगे अरहर के फूल, आलू होगा प्रभावित..गेंहूं को फायदा

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पंचायत खबर टोली

मऊ : नवंबर बीता जा रहा है। मौसम स्वाभाविक रूप से करवट ले रहा है। ऐसे में इंसान तो इंसान,जानवर, पशु—पक्षी,फसल सब पर इसका मार होता है। सुबह—शाम तेज होती ठंढ। घना होता कोहरा ऐसे में विशेषज्ञों की राय है कि अतिरिक्त सावधानी बरती जाये। । तेजी से बदलते मौसम के बीच खेती-किसानी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की पूर्ण संभावना है। दलहन व आलू के प्रति विशेष रुप से सावधान रहने की सलाह दी गई है। इस मौसम में लापरवाह होते ही सेहत नासाज हो सकता है। चिकित्सक की राय है कि यह मौसम विशेष रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर व जोड़ के रोग से परेशान मरीजों के लिए परेशानी भरा है। इस दौरान इसे लेकर सजग रहने की जरूरत है। अतिरिक्त सावधानी बरते जाने की जरूरत है। केवल दिनचर्या ही नही बल्कि बदलते मौसम के साथ खानपान को लेकर भी व्यापक सावधानी की जरुरत है।

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अतिरिक्त सावधानी बरतें किसान

उपकृषि निदेशक डा.आशुतोष मिश्र बताते हैं कि मौसम के बदलाव का असर सीधे-सीधे खेती-किसानी पर पड़ेगा। गेहूं की फसल के लिए यह लाभदायी होगा। जमाव के बाद फसल की वृद्धि में भी बढ़ती ठंड लाभदायक होगी। इस बीच सुबह-शाम पड़ रही ओस के प्रभाव से दलहन की मुख्य फसल अरहर में फूल झड़ जाने की प्रबल आशंका है। किसानों को इसका विशेष ध्यान रखना होगा। अरहर की फसल की हल्की सिंचाई करने से फूल झड़ने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। फसल में अभी फूल का समय है। ऐसे में दो प्रतिशत यूरिया का घोल बनाकर छिड़काव करने से सुरक्षा चक्र मजबूत होने के साथ अधिक संख्या में फूल व फल आएंगे।

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इसके साथ आलू की फसल को ठंड लगने की सबसे अधिक संभावना होती है। ऐसे में आलू की सिंचाई भी तत्काल करना आवश्यक है। ठंड का प्रभाव होते ही रोगी पौध को उखाड़ कर मिट्टी में दबाने के साथ मैंकोजेब का छिड़काव तुरंत करना अति आवश्यक है। सब्जी की फसल की सिंचाई के साथ कीट व रोग से नियंत्रण के लिए कृषकों को बहुत सचेत रहना होगा। ठंड का प्रभाव होने के बाद उत्पादन में आशातीत गिरावट आएगी। ऐसे में इसके प्रति पहले ही सतर्क रहना लाभदायी होगा। हरा चारा पशु बोआई के 15 दिन बाद ही वृद्धि के लिए यूरिया का प्रयोग करें। इससे पहले अधिक मात्रा में यूरिया डालने से बरसीम के गलने का डर भी बना रहता है।

शुगर व गठिया मरीज को सलाह

वहीं जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ.नम्रता श्रीवास्तव बताती हैं कि मौसमी रोग जैसे सर्दी, जुकाम और बुखार के साथ शरीर में अकड़न, हड्डियों में दर्द तथा शिथिलता बनी रहेगी। एेसी स्थिति होते ही स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो जाना चाहिए। गुलाबी ठंडक का एहसास धीरे-धीरे होने लगा है। मध्य रात्रि के बाद ओस पड़ने लग रही है। इसमें घुली ठंडक सुबह तक बनी रह रही है। दिन चढ़ने के साथ ही धूप के प्रभाव में भी आशातीत वृद्धि हुई है।

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त्वचा को रखें साफ—सुथरा
ऐसे में गठिया, शुगर, ब्लड प्रेशर के प्रभाव में वृद्धि होती है। ऐसे रोगियों को विशेष सावधानी बरतना होगा। इसके साथ ही त्वचा व कृमि रोग का प्रसार भी इसी मौसम में होता है। इसमें स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। दिन में पांच बार साबुन से हाथ साफ करने के साथ नियमित स्नान करना चाहिए। ठंड लगने के दशा में घरेलू उपचार के साथ ही तुरंत चिकित्सक काे दिखाना चाहिए।

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