संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: देश का किसान नोट बंदी की मार झेल रहा है। जगह—जगह से खबरें आ रही हैं कि किसानों को रबी की तैयारी के लिए खाद—बीज, दवाई या अन्य खेती से जुड़े सामानों को खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि केंद्र सरकार हरसंभव वह प्रयास कर रही है कि किसानों पर नोटबंदी की मार कम से कम हो। राहत के कई उपाय किये गये है। इस बीच एसोचैम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में जिसका विषय था कि किसान बाजार से कैसे जुड़े, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह इस बात के प्रति आशान्वित दिखे कि उनका मंत्रालय किसानों को बाजार से जोड़ने और उनकी आमदनी को दुगुना करने के घोषित लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राधा मोहन सिंह ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केन्द्र सरकार अनाज का उत्पादन बढाने, लागत कम करने तथा किसानों की आमदनी के अन्य साधनों खोलने के साथ उनकी उपज की उचित मार्केटिंग का जी तोड़ प्रयास कर रही है। अब यह जरूरी हो गया है कि बाजार, किसान की पहुच के अन्दर हो और उनके और उपभोक्ताओं के बीच कोई बिचौलिया नहीं हो, उपज का मूल्य पारदर्शी तरीके से तय हो और किसान को उनकी उपज का अविलंब भुगतान हो। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार देश भर में एक ऐसा ढांचा खड़ा कर रही है जिसमें बाजार सीधे खेत से जुड़ जाएंगे और उपभोक्ता सीधे किसान के खेत से उपज खरीद सकेंगे।
राष्ट्रीय कृषि बाजार दिलाएगा अच्छी कीमत
केन्द्र सरकार किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत दिलाने के लिए पहले ही राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम अप्रैल 2016 में लांच कर चुकी है। ई-नाम पोर्टल से मार्च, 2018 तक कुल 585 मंडियों को जोड़े जाने की योजना हैI सितम्बर-2016 तक 200 मंडियों के लक्ष्य के सापेक्ष 10 राज्योंज की 250 मंडियों को ई-नाम से जोड़ दिया गया हैI उन प्रदेशों की मंडिया ई-नाम से जुड़ सकती हैं जिन्होंने अपने विपणन कानूनों में तीन सुधार कर लिये हैं – ई ट्रेडिंग की व्यवस्था, एकल बिंदु पर मंडी शुल्क की उगाही और सिंगल लाइसेंस से पूरे प्रदेश में व्यापार। हालांकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दो प्रमुख राज्य् बिहार और केरल कोई मंडी कानून न होने से अभी ई-नाम परियोजना से नहीं जुड़ पा रहे हैं। कृषि मंत्री ने इन राज्यों की सरकारों से किसान हित में मंडी कानून बनाकर ई-नाम परियोजना से जोड़ने का अनुरोध किया है।
ई नाम से घर बैठे आॅनलाईन ट्रेडिंग
कृषि मंत्री ने कहा कि ई-नाम की इस नयी व्यवस्था में अब किसान कहीं भी बैठकर ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए अपनी फसल बेच सकता है तथा इसके जरिए वह उपज की गुणवत्ता के अनुसार उत्तम मूल्य प्राप्त कर सकता है। यदि उसे मूल्य पसंद ना हो तो वह ऑनलाइन की गयी सर्वोच्च बोली खारिज भी कर सकता है। किसान को ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था भी है। इसके अतिरिक्त किसानों को उपभोक्तााओं से सीधे जोड़ने के लिए वर्तमान सरकार किसानों के खेत से उत्पाद की सीधा खरीद को प्रोत्साेहित कर रही है। इसके लिए 22 राज्यों ने अपने विपणन कानूनों में बदलाव भी कर लिया है।
निजी मंडी स्थापित करने का प्रयास
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि देश में कृषि उपज का विपणन, राज्य सरकारों की विनियमित मंडियों के माध्यज से किया जाता है, जिनकी कुल संख्या 6746 है। उन्होंने कहा कि वैसे तो किसानों पर गठित राष्ट्रीय आयोग की सिफारिश के अनुसार 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक मंडी होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में लगभग 580 वर्ग किलोमीटर में एक मंडी हैI मंडियों की संख्याा बढ़ाने के लिए सरकार मंडी कानून में सुधार करवाकर निजी क्षेत्र की मंडियां स्थापित करवाने का प्रयास कर रही है। अब तक 21 राज्यों ने इस संबंध में अपने विपणन कानूनों में सुधार कर लिया है।
