सपना दिखाये थे क्योटो का.. यहां तो सीवर का पानी तैर रहा है

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बनारस से आलोक रंजन की रिपोर्ट

शहर के मध्य रहने वाले लोग कल दोपहर तक खुद को खुशनसीब समझते थे। उनका कहना था कि चाहे कुछ भी हो जाये, लेकिन उनके घर तक बाढ़ का पानी नहीं पहुंच सकता। लेकिन इस वर्ष आये बाढ़ ने ये तिलस्म तोड़ दिया और शहर के मध्य सीवर रूपी बाढ़ का पानी फैल गया। रातो-रात अपने घर का सामान पानी में तैरता देख लोग हतप्रभ रह गये।

सामानों को सुरक्षित स्थल पर ले जाने के बाद इलाके का जायजा लेने पर मालूम पड़ा कि लगभग सभी घरों का यही हाल है। आज सुबह तक शहर के कई ऐसे इलाकों में घुटने भर से ज्यादा पानी था, जहाँ मुसलाधार बारिश होने के बाद भी जल-जमाव नहीं होता है।

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बता दें कि एक सप्ताह से आदमपुर, हनुमान फाटक, तेलियाना, गोला, अम्बिया मण्डी, गोलगड्डा, पठानी टोला, छित्तनपुरा, कोईला बाजार, उधर जैतपुरा के छोहरा, राजाबाजार, कच्चीबाग, कमलगढ़हा, रसूलगढ़, जैतपुरा छहमुहानी सहित आस-पास के इलाकों में सीवर का गन्दा पानी लगा हुआ है।

कई इलाकों में पहुंचा सीवर रूपी बाढ़ का पानी

कल रात में शहर के मध्य स्थित नई सड़क, दालमण्डी, चहमामा, घुंघरानी गली, कोदई चौकी, औरंगाबाद इलाके में सीवर चोक कर गया। कुछ देर तक लोगों को समझ में नहीं आया कि वह क्या करें, लेकिन रात होते-होते जब उनके घरों में रखा सामान सीवर रूपी बाढ़ के पानी में तैरने लगा तो लोग भयभीत हो गये। नईसड़क के मोहम्मद अहमद ने बताया कि उनके घर में सीवर का गन्दा पानी घुस चुका है।

तेज बदबू और मल-जल की वजह से परिवार मकान खाली करने को मजबूर है। इसी इलाके के मोनूद्दीन सहित दर्जनों लोगों के घर में भी पानी प्रवेश कर चुका है। दूसरी ओर रविन्द्रपुरी, शिवाला, साकेतनगर में भी सीवर ओवर फ्लो कर लोगों के घरों में घुसने वाला है। इस सम्बन्ध में नगर निगम का कहना है कि जब तक बाढ़ का पानी कम नहीं होता है, तब तक सीवर की सफाई नहीं की जा सकती है।

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काशी के चौरासी घाटों को डूबोने के बाद अब गंगा का पानी सड़क ओर बढ़ चला है। आज सुबह भैसासुर घाट की सीढिय़ों के डूबने के बाद पानी रोड पर हिलोरे मार रहा था। वहीं शहर के कई इलाकों में बाढ़ के कारण सेवार चोक होने की समस्या उत्पन्न हो गयी है। क्षेत्र में भारी जल-जमाव के कारण लोग अपने घरों में कैद हैं।

दूसरी ओर बाढ़ में फंसे लोगों की स्थिति दयनीय हो गयी है। जहाँ बच्चों को पिलाने के लिए दूध नहीं है, वहीं बड़े-बुजुर्गों को खाना भी मयस्सर नहीं हो रहा है। बाढ़ से घिरे इलाकों में ना तो प्रशासनिक अधिकारी जा रहे हैं और ना ही कोई जनप्रतिनिधि, ऐसे में बाढ़ पीडि़त अब मां गंगा से ही दया की आस लगाये बैठे हैं।

बता दें कि रविवार सुबह गंगा में प्रति घण्टे एक सेण्टीमीटर का बढ़ाव रिकार्ड किया गया है। जल आयोग के मुताबिक अगले चौबीस घण्टे तक बढ़ाव जारी रहेगा। पहले से बाढ़ में डूबे इलाकों में रहने वाले लोग इस बात से भयभीत हैं। नक्खीघाट, शैलपुत्री, कोनिया, पूलकोहना, सरायमोहना, रसूलगढ़ के साथ ही नगवां में स्थित गंगोत्री बिहार, हरिओमनगर, सामनेघाट, शिवाजी नगर कालोनी व अस्सी सहित दर्जनों कालोनियां बाढ़ में पूरी तरह से डूब चुकी है।

बाढ़ में फंसे लोगों का कहना है कि अब तक उनसे मिलने ना तो कोई प्रशासनिक अधिकारी आया और ना ही कोई जनप्रतिनिधि। संकठा सिंह कहते है प्रशासनिक प्रयास किया जा है पर स्थिति तो बहुत ही दयनीय है। वरुणा में उफान के कारण शहर के कई इलाकों में शिविर चोक की समस्या उत्पन्न हो गयी है। हनुमानघाट, तेलियाना, छोहरा, मनहर, कमलगढ़हा, भदऊचुंगी, सोनकर बस्ती सहित आस-पास के इलाकों में घुटने भर से ज्यादा पानी जमा हो गया है। गन्दे पानी में जहाँ श्वांस भी लेना दुभर है, वहीं विषैले जन्तु व मच्छरों ने लोगों को भयभीत कर रखा है।

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