बाढ़,बिहार,कोरोना की मार,फिर भी तेज है टीकाकरण की रफ्तार…मुख्यमंत्री जो हैं नीतीशे कुमार

संतोष कुमार सिंह
पटना:बिहार में बाढ़ है,नीतीशे कुमार है। यह नारा प्रत्येक साल बिहार में आने वाले बाढ़ के दौरान सुनाई देता है लेकिन इस बार स्थिती उलट है। बिहार में बाढ़ भी है,नीतीशे कुमार भी है और कोरोना की मार भी है। लेकिन इन सब चुनौतियों के बीच चाहे बाढ़ की मार हो, या कोरोना का वार हो,स्वास्थ्य महकमे के लुंज पुंज व्यवस्था की तस्वीर हो..दूर दराज के ग्रामीण ईलाकों में भी टीकाकरण की रफ्तार जिस  गति से चल रहा है और नित नये रिकार्ड कायम कर रहा है उससे यही जाहिर होता है कि बिहार में नीतीशे कुमार के नेतृत्व में अनुभवी सरकार है, जो कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण ही एक मात्र जरिया है इस बात को बखूबी समझती है,और बाढ़ से पहले और बाढ़ के दौरान अधिक से अधिक लोगों को टीकाकरण के दायरे में लाने का हर संभव प्रयास कर रही है।           …टीकाकरण की रफ्तार

सरकार का साफ निर्देश है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जाए। खासकर 45 से अधिक आयु वर्ग के टीकाकरण पर अधिक से अधिक जोर दिया जाए। ग्रामीण स्तर पर पंचायत प्रतिनिधि और स्वास्थ्य कर्मी भी इस बात का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं कि बाढ़ पूर्व शत प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो जाए इसे लेकर तत्परता से कार्य करना होगा।
इस बीच बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में टीकाकरण का जो महा​अभियान चल रहा है उसके लक्ष्य भले ही बड़े हों लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने का जो जज्बा आम से लेकर खास तक दिखाई दे रहा है,उससे यही लगता है कि सबलोग एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों की तर्ज पर टीककरण के चेन को पूरी तरह से तोड़ने के लिए आसमां में सुराग करने को तत्पर हैं। …..टीकाकरण की रफ्तार


क्या कहते हैं आंकड़े
जब बिहार में छह महीने में छह करोड़ टीकाकरण का महाभियान शुरू किया गया तो महाभियान के महज चार दिन में प्रदेश में 11.28 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण संभव हो गया। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 21 जून को विधिवत रूप से टीकाकरण के महाभियान की शुरुआत की और स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य दिया कि आने वाले छह महीने यानी एक जुलाई से 31 दिसंबर के बीच राज्य के शेष बचे छह करोड़ लोगों का टीकाकरण कर दिया जाए। टीकों की आर्पूती की वजह से जून माह में टीकाकरण की गति प्रभावित हुई लेकिन समय के साथ व्यवस्था में सुधार देखा गया।                                                            ….टीकाकरण की रफ्तार
जुलाई से शुरू हुआ है टीकाकरण का महाअभियान

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक जुलाई से टीकाकरण का महाभियान शुरू हो गया। कोविन पोर्टल के आंकड़े के अनुसार पहली जुलाई को सूबे में 1.95 लाख लोगों का टीकाकरण किया गया। लेकिन अगले दिन दो जुलाई को एक दिन में 5.24 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई। शनिवार को एक दिन में 3.21 लाख लोगों को टीकाकरण किया गया, जबकि रविवार को शाम करीब छह बजे तक 88,608 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका था।

हर महीने एक करोड़ लोगों को टीका देने का है लक्ष्‍य

सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे कहते हैं महीने में एक करोड़ लोगों को टीका दिया जाना है। इसके लिए प्रदेश में करीब 27 सौ केंद्र सक्रिय किए गए हैं। 20 हजार से ज्यादा मानव बल को टीकाकरण के कार्य में लगाया गया है। टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने के लिए टीकाकरण वैन भी ग्रामीण क्षेत्रों में चलाई जा रही हैं। मंत्री ने दावा किया कि बिहार अपने तय लक्ष्य को हासिल करेगा और यह काम जनता के सहयोग से ही पूरा किया जाएगा।                                                                                        …..टीकाकरण की रफ्तार


मौसम के मद्देनजर नियमों में बदलाव
टीकाकरण के काम में लगे हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को भीषण गर्मी के दिनों राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने टीकाकरण के नियमों में बदलाव किया गया है। अब सात दिन के बजाय सप्ताह में चार दिन टीकाकरण होगा,यानी पूरे राज्य में पूरे राज्य में सिर्फ सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को ही टीकाकरण का काम किया जाएगा। इसका असर निश्चित रूप से आंकड़ो पर पड़ेगा। सरकार ने सभी सातों दिनों के अनुसार प्रति दिन 3.30 लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य तय किया था लेकिन अब जब हफ्ते में सिर्फ चार दिन वैक्सीन लगाई जाएगी तो हर दिन 5.70 लाख लोगों को वैक्सीन डोज देने के बाद ही छह करोड़ का लक्ष्य पूरा होगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में अब तक एक करोड़ 72 लाख लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।                          ….टीकाकरण की रफ्तार

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