किसानों ने फिर से शुरू की मोटे अनाज की खेती, सरकार से मिली सहायता

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वर्षा वर्मा

coarse grains: बिहार के गया जिले में कृषि क्षेत्र में काफी क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है मौजूदा वक्त में जो फसलें विलुप्त होती जा रही हैं। अब उसका दौर वापस लौटता नजर आ रहा है। वहीं यह सब संभव कर रहे हैं वहां के मेहनती किसान सेहत के लिए रामबाण माने जाने वाले मोटे अनाज की खेती यहां के किसानों ने फिर से शुरू कर दी गई है। यह फसल इस जिले से लगभग विलुप्त हो चुकी थी लेकिन इससे होने वाले फायदों और कमाई को देखते हुए यहां के किसान सांवा, बाजरा और मड़ुआ यानी रागी की खेती कर रहे हैं।

मोटे अनाज की खासियत
मोटे अनाज के तहत 8 फसलें आती हैं। इन फसलों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी डिमांड भी है। यह फसल सेहत के लिए फायदेमंद तो हैं ही साथ में इन फसलों की खेती से किसानों की आमदनी भी बढ़ती है। वहीं बाजार में इन फसलों की कीमत 5000 से 7000 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक है। इन फसलों की खासियत यह है कि पुराना होने के बाद भी इसमें कीड़े नहीं लगते है और उपज खराब नहीं होती है।

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मोटे अनाज के फायदे
मोटे अनाज का सेवन करना शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। डायबिटीज सहित कई गंभीर बीमारियों में इसके सेवन करने से लाभ होता है। इसे खाने से हड्डियों में मजबूती आती है दरअसल इसमें प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा भरपूर पाई जाती है साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मोटे अनाज की काफी डिमांड है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने इन फसलों की खेती करने के लिए 2023 में मिलेट्स वर्ष घोषित किया था।

गया जिले के कृषि पदाधिकारी ने बताया कि मोटे अनाज जैसे चना, मसूर, मक्का और तिलहन फसल, सरसों, तीसी के उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के लिए किसानों को सस्ती दर पर बीज और फसल लगाने के बाद प्रति एकड़ 2 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। सरकार यह कदम इसलिए उठा रही है ताकि किसान धान, गेहूं जैसी मुख्य फसल के साथ-साथ ऐसे फसलों के उत्पादन में रुचि लें और बेहतर कमाई करें। वहीं अब लोग भी मोटे अनाज और मिलेट्स क्रॉप फसलों को अपने आहार में शामिल कर और अपनी सेहत में सुधार कर सकते हैं। जाहिर है की ये फसलें प्रोटीन और फाइबर युक्त होती हैं

 

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