
Madhya Pradesh: विदिशा जिले के गंजबासौदा में गांव सुनारी के रहने वाले 50 वर्षीय किसान राजेंद्र सिंह जो परंपरागत खेती के साथ औषधीय फसल अश्वगंधा की खेती में अपना भविष्य देखा है। उन्होंने एक बीघा जमीन में अश्वगंधा की बुवाई की है। जिससे तीन-चार क्विंटल पैदावार मिलने का अनुमान है। और करीब एक लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा हासिल होगा। परंपरागत फसल के मुकाबले यह मुनाफा के मामले में दोगुना से ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि कृषि के क्षेत्र में प्रयोग करने के लिए काफी कुछ है। किसान बदलते दौर के साथ खेती में प्रयोग कर भी रहे हैं। और उन्हें इसका लाभ मिल रहा है। हालांकि किसान अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर बागवानी और औषधीय फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे है। क्योंकि इनमें लाभ अच्छा होता है। साथ ही ज्यादातर फसलों में कम समय में उपज भी हासिल हो जाती है। औषधीय पौधों की खेती कम समय में तैयार होने के साथ ही मोटा मुनाफा देने में सक्षम है। और कुछ औषधियां तो ऐसी है। जिनमें लागत ना के बराबर होती है।
राजेंद्र के परिवार के पास 35 बीघा खेत है
राजेंद्र ने बताया कि उनके क्षेत्र में ज्यादातर लोग गेहूं और चने की खेती करते हैं। जिसमें लागत और मेहनत ज्यादा लगती है। लेकिन मुनाफा उतना नहीं होता। इसलिए उन्होंने वैकल्पिक तौर पर अश्वगंधा की खेती शुरू की है। वह बताते हैं उनके पास 35 बीघा खेत है। जिसमें वह और उनका परिवार गेहूं, चना, मसूर, तेवड़ा और धनिया की खेती कर रहे हैं। सारी लागत और खर्चे निकालने के बाद उन्हें सालाना करीब 8 लाख रुपये का ही मुनाफा होता है।
एक साल पहले अश्वगंधा की खेती के बारे में पता चला
राजेंद्र ने बताया कि एक साल पहले जन अभियान परिषद के लोग उनके गांव आए थे। और अश्वगंधा की खेती को लेकर जानकारी दे रहे थे। तभी मेरी इस खेती में रुचि बढ़ी। इसके बाद कृषि विभाग से भी इस औषधि की खेती की जानकारी हासिल की और साथ ही अश्वगंधा की मंडी और इसके भाव को लेकर भी जानकारी जुटाई। फिर करीब छह महीने अच्छे से सब जांच-परखकर एक बीघा खेत में अश्वगंधा की फसल लगाई।
ये भी पढ़े…
गेहूं की जड़ में डाल दें ये चीज, होगी बंपर पैदावार, मिलेगा मुनाफा जोरदार
अश्वगंधा 35-40 हजार रुपये क्विंटल बिक रहा
उन्होंने बताया कि अश्वगंधा की बिक्री के लिए मुख्य मंडिया नीमच-मंदसौर में हैं। अभी इसका भाव 35-40 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। एक बीघा में करीब 3-4 क्विंटल उत्पादन होता है। तो अगर बेचने के समय भी भाव यही चलता है। तो 1 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा होगा। राजेंद्र ने अगले साल 10 बीघा में अश्वगंधा की खेती करने की योजना बनाई है। जिससे उन्हें प्रति बीघा 1 लाख रुपये के हिसाब से 10 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता है। यह सीधे तौर पर पारंपरिक खेती के मुनाफे का डबल से ज्यादा होगा।
फसल हो जाती है तैयार 5 महीने में
अश्वगंधा की खेती 5 महीने की होती है। नवंबर इसकी बुवाई के लिए बढ़िया रहता है। और मार्च से अप्रैल तक फसल पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। एक बीघा में बुवाई के लिए 2 किलोग्राम बीज बहुत होते हैं। इसके लिए उन्हें एक हजार रुपये किलोग्राम के हिसाब से बीज मिले थे। और खेत तैयार करने में एक हजार रुपये और खर्च हुए। उन्होंने अच्छी पैदावार के लिए गोबर खाद का इस्तेमाल किया है। वह फसल को महीने में दो बार 15 दिन के अंतराल में पानी देते हैं। समय पर पानी नहीं देने से फसल को नुकसान होने की आशंका रहती है।


