तकनीक का सहारा लेकर 6 सालों में किसान बना करोड़पति

खेती और किसानी को अक्सर घाटे के सौदे के रूप में परिभाषित किया जाता है, अक्सर हमें किसानो की आत्महत्या की खबरें सुनायी देती है, और हाल ही में कृषि कानूनों का विरोध हम सबके सामने है, ऐसे में क्या खेती किसानी को केवल एक नकरात्मक अजीविका के तौर पर देखा जाना सही है? तो इसका जवाब है कि नहीं! यहां हम एक ऐसे किसान की बात करने वाले है जो केवल कुछ सालों में ही खेती किसानी करके करोड़पति बन गया। आपको शायद यह असंभव सा लगे लेकिन ये संभव हुआ है। 6 साल पहले तक कुछ हजार रुपयों की कमाई करने वाले इस किसान ने पिछले 6 साल में करीब-करीब डेढ़ करोड़ रुपये खेती से कमाये हैं। यह कहानी है दौसा जिले के एक छोटे से गांव श्रीगणेशपुरा में रहने वाले किसान कजोड़ मल की है।
कुछ साल पहले तक बाकी किसानों की तरह ही कजोड़ मल की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। कम पढ़ा लिखा होने के चलते कजोड़ मल की सरकारी नौकरी भी नहीं लगी थी। ऐसे में वो एक- एक पैसे के लिए मोहताज था। खेती के जमीन तो थी सिंचाई के लिए पानी भी था लेकिन परंपरागत खेती होने के चलते अच्छा मुनाफा नहीं मिल पाता था।

इसके बाद किसान कजोड़ मल ने खेती को मुनाफे का सौदा कैसे बनाया जाये। इस पर विचार करना शुरू किया। इसी सिलसिले में वो कुछ साल पहले जयपुर जिले के एक गांव में पॉलीहाउस में मजदूरी करने चला गया और वहां पॉलीहाउस में व्यापारिक खेती के बारे में सीखा। इस दौरान कजोड़ मल ने करीब 6 साल तक अलग-अलग पॉली हाउस में काम किया और खेती के नए और आधुनिक तरीके सीखे और फिर अपने खुद के खेत में पॉलीहाउस लगाने का फैसला किया। लिहाजा अब किसान कजोड़ मल को हर साल करीब 36 लाख रुपए का मुनाफा हो रहा है।

किसान कजोड़मल ने बताया कि पॉलीहाउस के लिए 23 लाख रुपए का सरकार से अनुदान मिला और 10 लाख रुपए का खुद ने खर्च किया। अब इन पॉलीहाउस में वैज्ञानिक तरीके से खीरे की खेती की जाती है। इस पॉलीहाउस में मौसम अनुरूप नहीं होने पर भी किसी भी प्रकार की खेती की जा सकती है। पॉलीहाउस में टेंपरेचर मेंटेन करने की व्यवस्था होती है। बेमौसम में खेती करने से बाजार में भाव भी अच्छा मिल जाता है।

क्या है पॉली हाउस

पॉली हाउस प्लास्टिक शीट से बना एक रक्षात्मक छायाप्रद घर होता है, जिसका उपयोग उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। यह अर्धवृत्ताकार, वर्गाकार या लम्बे आकार का हो सकता है। इसमें लगे उपकरणों की सहायता से इसके अन्दर का ताप, आ‌र्द्रता, प्रकाश आदि को नियन्त्रित किया जाता है। पॉली हाउस तकनीक का उपयोग संरक्षित खेती के तहत किया जा रहा है। पॉली हाउस में विभिन्न प्रकार की खेती की जाती है जिससे कि कम समय तथा कम स्थान में अधिक से अधिक उत्पादन होता है।

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