पिछले माह आम बजट करते हुए और उससे पहले फसल बीमा योजना की बात करते हुए केंद्र सरकार की तरफ से यह कहा गया कि अगले पांच साल में किसानों की आमदनी दुगुनी। कोई इसे कसीनो मॉडल बताने लगा, तो कोई आगामी पांच राज्यों में चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा किसान मतदाताओं को लुभाने की कवायद। कोई ग्राम देवता को खुश करने वाला बजट कहता हुआ दिखा तो कोई किसान देवता को। लेकिन उस वक्त कहां किसी को अंदाजा था कि इंद्र देवता अब बेमौसम बरसात और ओला वृष्टि के जरिए किसानों की रवी फसल चौपट कर देंगे। कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है विगत दिनों में रूक रूक कर तो कभी तूफानी बारिश। जी हाँ मौसम किसानों को खून के आंसू रुलाने पर आमादा है। खरीफ की फसल को जब पानी की जरूरत थी बादल धोखा दे गए। रबी की फसल तैयार हुई तो बेमौसम मेघा बरस गए। मार्च माह के आरंभ से शुरू हुई बरसात का सिलसिला रुक-रुक कर जारी है। शनिवार को जो बारिश हुई उसने किसानों को तगड़ा झटका दिया। खेतों में खड़ी बची-खुची फसल भी बर्बाद हो गई। फसलें पूरी तरह से पक गईं थीं। आंधी और बारिश से फसलें जमीन पर लोट गई हैं। इसका असर दाने पर भी पड़ा है।
धरती पुत्र का दुर्भाग्य है कि जब फसल तैयार होने को होती है तो इस प्रकार मौसम के बदले तेवरो से वह समय की मार का शिकार हो जाता है। अन्नदाता को उम्मीद थी कि गेहंू की फ सल पकने के बाद वह उसे मंडी में बेच कर साहूकार के कर्ज से कुछ हद तक मुक्त हो पाएगा लेकिन इस बे-मौसमी वर्षा से उसे अपने सपने टूटते हुए नजर आ रहे हैं। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राज्स्थान के बड़े हिस्से में फसलों की भारी तबाही हुई है।
हरियाणा: हरियाणा में बेमौसम बरसात ने फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। जींद में जमकर ओले बरसे, जिससे गेहूं की फसलें बर्बाद हो गई है। रोहतक भी बारिश के साथ ओले गिरने से फसलें तबाह हो गईं। किसानों ने सरकार से 50 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजे की मांग की है।
ओलावृष्टि ने किया फसलों को बर्बाद
हरियाणा के कई जिलों में सैंकड़ों एकड़ फसल तबाह हो गई है। तेज हवा और बारिश ने फरीदाबाद, पलवल, गुडग़ांव, सोनीपत, पानीपत और आसपास के क्षेत्रों में फसलों को भारी नुक्सान पहुंचाया है। बारिश ने अकेले भिवानी जिले के करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों को बेहाल कर दिया है। इसके चलते किसानों ने डी.सी. से मुलाकात कर मुआवजा देने की मांग की है।
राजस्थान: फसलों और किसानों के साथ पशु-पक्षियों पर भी बारिश की मार पड़ी है। राजस्थान के बीकानेर में ओलों की चपेट में आने से 12 मोरों की मौत हो गई।
पंजाब : पिछले 2 दिन से पंजाब में हो रही बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बारिश से कई क्षेत्रों में गेहूं की खड़ी फसलें बिछ गई हैं। बेशक सरकारी तौर पर अभी नुक्सान का अनुमान लगाने के लिए कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई लेकिन गैर-सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हजारों एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल को भारी क्षति हुई है, जो पक कर तैयार होने वाली थी। पंजाब के मालवा क्षेत्र में अधिक नुक्सान की रिपोर्टें हैं। फरीदकोट, भटिंडा, संगरूर, बरनाला, मुक्तसर व लुधियाना जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान लगातार रुक-रुक कर बारिश हुई है। अभी भी बारिश रुकी नहीं है। इस कारण और अधिक नुक्सान होने की आशंका है। कई जिलों में बादल छाए हुए हैं।
उत्तर प्रदेश: मौसम विज्ञानी डॉ. अनुपम पांडेय कहते हैं कि तापमान तीस डिग्री सेल्सियस के ऊपर नीचे होने से वायु दाब बढ़ा और पश्चिमी हवाओं के साथ बादल आ गए। इसके चलते न केवल इलाहाबाद बल्कि आसपास के जिलों में भी बारिश हुई है। हालांकि बादल एक-दो दिनों तक ही आसमान में छाए रहने का अनुमान है। बारिश होने की भी संभावना बनी है। उसके बाद मौसम फिर वैसा ही हो जाएगा। बदायूं में बढ़ते तापमान के बीच शुक्रवार की रात मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया। रात करीब बारह बजे आसमान में बादल छाए और बूंदाबांदी शुरू हो गई। इसी के साथ आंधी शुरू हो गई। जिले में म्याऊं, उसावां अलापुर, दातागंज इलाके में गेहूं की फसल गिर गई। अंधड़ से उन्हीं खेतों में गेहूं की फसल गिरी है, जिनमें शुक्रवार को दिन में सिंचाई की गई थी। किसानों का कहना है कि इस समय मौसम खराब नहीं होना चाहिए। वरना पिछले साल की तरह फसल बर्बाद होगी और भारी नुकसान होगा।
जय किसान आंदोलन ने की मुआवजे की मांग
जयकिसान आंदोलन ने बेमौसम बरसात को देखते हुए किसानों को अविलंब मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2015 में भी इस मौसम में देश के अधिकांश हिस्सों में फसल बर्बाद हो गयी थी। लगभग 106 हेक्टेयर भूमि में फसल बर्बाद हुई थी। इस वर्ष भी हरियाणा, पंजाब,उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से फसल नुकसान की खबर आ रही है। सरकार को समय समय रहते किसानों को मुआवजा देना चाहिए,नहीं तो पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी आत्महत्या की घटनायें सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से उन किसानों को अविलंब मदद करे,जिनका फसल नुकसान हुआ है।


