बुजुर्ग महिला किसान ने लौकी खेती से बदली किस्मत, कम लागत में ज्यादा मुनाफा

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पूजा श्याम देव

 

Uttar Pradesh:  बहराइच जिले की ग्राम कटका की रहने वाली मंजू एक महिला किसान हैं। जो लौकी की खेती करती हैं। मंजू का कहना है कि लौकी की खेती से ही इन्होंने अपने सारे सपने पूरे किए हैं। बुढ़ापे में लौकी की फसल ही इनका सहारा बनी। वह लौकी को बेचकर ही घर चलाती हैं। इसके साथ ही कुछ पैसे बच्चों की पढ़ाई के लिए भी इकट्ठा कर रही हैं।

 

बुजुर्ग महिला किसान मंजू देवी ने बताया कि उन्होंने लौकी की खेती से बहुत कुछ मुकाम हासिल किया है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के खर्चे तक सब कुछ लौकी की खेती से ही पूरा हुआ है। वह लौकी की खेती पिछले 50 सालों से करती आ रही हैं। इसके अलावा वह बाकी महिला किसानों को भी लौकी की खेती के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने बताया कि लौकी की खेती में लागत कम और मुनाफा अधिक होता है। इस वजह से लौकी की खेती सबको करनी चाहिए।

महिला किसान ने बताया कि लौकी की खेती किसान साल भर कर सकते हैं। लेकिन हर मौसम में बुवाई से लेकर कटाई तक इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी है। इस समय कई किसान गर्मियों में बोई जाने वाली लौकी की फसल लगाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में किसानों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं। कि लौकी की खेती में क्या करें जिससे उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। हालांकि लौकी की खेती से बढ़िया उत्पादन मिलता है।

 

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बुवाई करते समय इन बातों का रखे ध्यान
गर्मी की फसल की बुवाई फरवरी माह के आखिर महीना या​नी मार्च में की जाती है। गर्मी के मौसम मे अगेती फसल लगाने के लिए इसका पौधा पॉली हाउस में तैयार करके इसकी सीधी रोपाई कर सकते हैं। इसके लिए प्लास्टिक बैग या फिर प्लग ट्रे में कोकोपीट, परलाइट, वमीर्कुलाइट, 3:1:1 अनुपात रखकर इसकी बुआई करते हैं।

बरसात की फसल कब लगाएं
बरसात की बुवाई जून से जुलाई के बीच बोया जाता है। और फसल अक्टूबर-नवंबर में तैयार हो जाती है। इस फसल की बुआई या रोपाई नाली बनाकर की जाती है। जहां तक संभव हो नाली की दिशा उत्तर से दक्षिण दिशा मे बनाई जाती है। फिर पौध व बीज की रोपाई करते है। गर्मियों मे नाली से नाली की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए और बरसात में नाली से नाली की दूरी 4 मीटर रखें। पौधे से पौधे की दूरी 90 सेंटीमीटर रखें। हालांकि इसी मौसम में फसलों पर लाल कीड़े जिसे हम रेड पंम्पकीन बीटल भी कहते हैं। इसका प्रकोप बहुत अधिक फैलता है। इससे बचने के लिए किसान भाई डाईक्लोरोफांस की मात्रा 200 एमएल को 200 मिली लीटर पानी में घोल बनाकर 1 एकड़ की दर सें छिड़काव करें। इस कीट को मारने के लिए सूर्योदय से पहले ही छिड़काव करना चाहिए। सूर्योदय के बाद ये कीट जमीन के अंदर छिप जाते हैं।

 

लौकी की खेती में है ज्यादा मुनाफा
जिले की महिला किसान मंजू लौकी की खेती कर रही हैं। जिससे इनको अच्छा मुनाफा हो रहा है। खेतों में बीजों की रोपाई से लगभग 50 से 55 दिनों के बाद इसकी फसल में लौकी आना शुरु हो जाती हैं। जब सही आकार और गहरा हरा रंग में ठीक-ठाक प्रकार का दिखने लगे तब उनकी तुड़ाई करते हैं। लौकी की तुड़ाई के तुरंत बाद उन्हें पैक कर बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता हैं। लौकी की खेती के लिए एक एकड़ में लगभग 15 से 20 हजार की लागत आती है। और एक एकड़ में लगभग 70 से 90 क्विंटल लौकी का उत्पादन हो जाता है। बाजारों में भाव अच्छा मिल जाने पर 80 हजार से एक लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती हैं।

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