अमितेश सिंह, वरिष्ट पत्रकार
गाजीपुर: हम प्रकृति द्वारा मिले उपहार के प्रति सचेत नहीं हैं। हमें सुविधाएं तो सब चाहिए,लेकिन उन सुविधाओं को सहेजने की प्रवृति न तो सरकार में है, और न ही नागर समाज में। पीने के पानी की कमी की खबरें हर जगह से आ रही है। धरती का तक़रीबन सत्तर फीसदी हिस्सा पानी है।इसके बाद भी दुनिया के कई हिस्से में लोगो को पीने तक का पानी मयस्सर नहीं है। ऐसे में लाजमी है कि, जल श्रोतों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाए।
लेकिन गाजीपुर जनपद के नगर पालिका को इस से कोई सरोकार नहीं ,यहाँ के पोखरे और तालाब का प्रयोग कूड़ेदान के तौर पर किया जाता है।जी हा ! हम बात कर रहे है नगर के पी जी कालेज परिसर के पश्चिम छोर पर मौजूद तालाब का ,जो अब कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गया है।तीन बीघे में फैले इस पोखरे में सर्दी के दिनों में अप्रवासी पक्षीयो का वास रहता है।स्थानीय निवासी अनिल पाण्डेय की माने तो सालो से कूड़ा डाल कर इस पोखरे के एक चौथाई हिस्से को पाट दिया गया है,ऐसे में लगता है की ये किसी भू माफिया के इशारे पर किया जा रहा है और वो इस पोखरे को पाट कर इस पर अवैध तरीके से निर्माण करने के फ़िराक में है।वही पिछले कई दशक से यहाँ रह रहे कामता प्रसाद सिंह का मानना है कि ,नगर पालिका के कर्मचारियों की इस हरकत से इस इलाके के आम लोगो का जीना मुहाल हो गया है।नगर पालिका के कर्मचारी न सिर्फ यहाँ कूड़ा डालते है बल्कि कूड़े को गिराने के बाद उसको जला भी जाते है।कूड़ा के जलाये जाने से निकलने वाले धुँआ ने यहाँ के लोगो में अस्थमा और तपेदिक जैसे बीमारियो का डर पैदा कर दिया है।पी जी कालेज के कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विवेक सिंह शम्मी का मानना है की इस तरह से नगर पालिका परिसर में पढ़ने वाले तक़रीबन दस हज़ार छात्रो और सैकड़ों कर्मचारियों के स्वास्थय के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता।नगर पालिका के पास जुलाई पहले सप्ताह तक का समय है और उसके बाद भी अगर कूड़ा गिराया जाना चालू रहा तो छात्र और कर्मचारी नगर पालिका का घेराव करने को बाध्य होंगे।परिसर में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है ।मामले की गम्भीरता को देखते हुए शिक्षक संघ ने भी नगर पालिका के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए ,कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है।

