- डॉ. शम्भुनाथ सिंह की जन्मशताब्दी पर साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों की भावभीनी श्रदांजलि
संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: विगत रविवार राजधानी के हिंदी भवन में नवगीत के पितृपुरूष माने जाने वाले डॉ सिंह की शताब्दी वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने उन्हे नवगीत आन्दोलन का प्रणेता बताया। साथ ही यह भी रेखांकित किया कि सैकड़ो सालों से यह देश अधूरी क्रांति का देश रहा है। डॉ शम्भुनाथ की कविता भी इस बात की सूचना देती है कि साहित्य में अभी अधूरी क्रांति परी हुई है। उनके सपने को पूरा करना है तो साहित्य के अधूरी क्रांति को पूरा करना होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय संचार मन्त्री मनोज सिन्हा ने डॉ शम्भुनाथ सिंह को याद करते हुए कहा कि नवगीत के उद्भव का श्रेया निराला को जाता है तो उसके उन्नयन का श्रेय शम्भुनाथ को जाता है। मनोज सिन्हा ने यह भी घोषणा किया कि भारत सरकार उनकी याद में डाक टिकट जारी करेगी।
अपने संबोधन में विशिष्ट अतिथि मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि डॉ शम्भुनाथ ने कविता के जरिए हिंदी कविता में जीवन के यथार्थ को कलात्मक अभिरूची को प्रगट किया। इस अवसर पर उन्होंने वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शम्भुनाथ सृजन पीठ की स्थापना की घोषणा राज्य सरकार के साथ मिलकर किये जाने की बात कही।
कई किताबों का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान डॉ. इन्दीवर द्वारा सम्पादित शम्भुनाथ साहित्य समग्र, गीत समय की शिला के, शम्भुनाथ सिंह : गीत से नवगीत तक तथा नवगीत का दस्तावेज़ पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही होशंगाबाद (म.प्र.) के डॉ. विनोद निगम को वर्ष 2017 का डॉ. शम्भुनाथ सिंह नवगीत पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र के बाद द्वितीय सत्र में केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के पूर्व निदेशक डॉ. गंगा प्रसाद विमल की अध्यक्षता में आयोजित परिसंवाद में उनके काव्य, समीक्षा और एब्सर्ड नाटकों पर डॉ. इन्दीवर, जे.एन.यू. के डॉ. ओमप्रकाश सिंह व डॉ. देवशंकर नवीन ने दिया सारगर्भित व्याख्यान दिया। अन्तिम सत्र में प्रख्यात कवि डॉ. माहेश्वर तिवारी की अध्यक्षता एवं यश मालवीय के संचालन में देश भर से आए नवगीतकारों ने काव्यपाठ कियाा। स्वागत राजीव सिंह, बीज वक्तव्य डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, धन्यवाद प्रकाश बी.डी. पचौरी व डॉ. चेतना सिंह तथा कार्यक्रम संयोजन डॉ. रोली, श्रुति व तरुण विजय पचौरी ने किया।
