आयुवेर्दाचार्य डॉ. आर. अचल बताते हैं- मार्च और अप्रैल का महीना वसंत ऋतु का होता है। इस दौरान मौसम करवट बदल रहा होता है। हमारे शरीर पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। आसलपन और भारीपन इस मौसम के प्रमुख लक्षण हैं। इस मौसम में सूरज की तीखी होती किरणें सर्दी के जमे कफ को पिघला देती है। जिसके चलते पंचाग्नि मंद हो जाती है और फ्लू जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। वसंत में बदलते मौसम में न्यूमोनिया, कफ और सांस की बीमारियों का डर बढ़ जाता है। सर्दी जा चुकी है। गर्मी लाव-लश्कर के साथ आने को तैयार बैठी है। फिलहाल ऋतुराज वसंत का मौसम है। इसे आप मौसम का ट्रांजिशन पीरियड रह सकते हैं। हमारे शरीर को एक-मौसम से दूसरे मौसम में ढलने के लिए थोड़े वक्त की जरूरत होती है। जिसके लिए कुदरत ने सर्दी और गर्मी के बीच वसंत की रचना की, इसे आप मौसम का जंक्शन भी बोल सकते हैं। लेकिन यह खुशनुमा वसंत ऋतु लापरवाही बरतने पर भारी पड़ सकती है। इस मौसम में बीमार पड़ने की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे में आयुवेर्दाचार्य से वसंत के दौरान खानपान का सही तरीका और लाइफस्टाइल जान लेते हैं। यह भी कि इस मौसम में क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए।
सर्दी में हल्की-सी कमी होते ही लोग गर्मी की औपचारिक घोषणा कर देते हैं। फिर आइसक्रीम से लेकर कोल्ड ड्रिंक्स और फ्रिज के पानी का सिलसिला चल निकलता है। मगर वसंत में ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। वसंत का महीना कफ दोष को बढ़ाने वाला होता है। पित्त और वात यानी वायु दोष इस महीने में उतना परेशान नहीं करता। ऐसे में ठंडी चीजों को खाना या पीना कफ को बढ़ा सकता है। जिसके चलते सर्दी-जुकाम-खांसी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
नींबू, इमली, खटाई-मिठाई, फ्रिज में रखा खाना कर देगा बीमार डॉ. अचल बताते हैं कि वसंत के मौसम में केला, देर से पचने वाले ठंडी चीजें, ज्यादा तेल-घी वाला खाना, तल-भुना खाद्य पदार्थ, अम्लीय पदार्थ जैसे नींबू, ईमली, खटाई; मिठाई, फ्रीज में रखा खाना, रसदार फल जैसे संतरा, मौसमी, कोल्ड ड्रिंक्स बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। वसंत के मौसम में ठंडे इलाकों में जाने से बचना चाहिए। एसी में सोना खतरनाक हो सकता है। पंखा भी तभी चलाएं जब बहुत आवश्यकता महसूस हो।
इस फॉमूर्ले से वसंत में खिली रहेगी सेहत
डॉ. अचल बताते हैं- ऊपर बताए गए लक्षणों का पता चलते ही इन्हें रोक देना स्वास्थ्य रक्षा के पहले चरण में ही सफलता है। इसके लिए दूषित कफ को निकालने के लिए वमन करना चाहिए। इसमें नाक में जल या तुवरक तेल, अणुतेल, षडविन्दु तेल, कटल क्वाथ आदि का प्रयोग किया जाता है। नमक मिले गुनगुने पानी से गरारा करना फायदेमंद है। इस मौसम में हल्का और जल्दी पचने वाला नाश्ता व भोजन करना चाहिए। भोजन में जौ, गेंहू, परवल, आलू जैसी चीजें सुविधानुसार लेनी चाहिए। मुनक्का, महुआ आदि औषधियों से बने सिधु, आसव, अरिष्ठ, सुरा चारे से छगुने जल मिला कर लिया जा सकता है। अदरक, विजयसार, चंदन, शहद, नागरमोथा, गुर्च, अरुषा, सोंठ, पीपल, काली मिर्च मिश्रित जल सुबह के समय अवश्य लेना चाहिए। इस मौसम में व्यायाम, उबटन, अभ्यंग यानी तेल मालिश करना चाहिए। गुनगुने पानी से नहाना चाहिए। दोपहर में बागीचों, पुष्पित फूलों, पक्षियों के साथ खुली हवा मे बिताना चाहिए। इस तरकीबों के सहारे वसंत में आपकी सेहत फूल जैसी खिली रहेगी।

