पाकुड़ : जिले के अमड़ापाड़ा और लिट्टीपाड़ा प्रखंड नक्सल प्रभावित है। दोनों प्रखंड के पहाड़ी इलाके में प्राय: नक्सली गतिविधि देखी जाती रही है। कृषि विज्ञान केंद्र ने महेशपुर ने नक्सलियों की मांद में दलहन की खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। केंद्र की ओर से किसानों को मुफ्त में दलहन का बीज व अन्य सामग्री उपलब्ध कराया गया। पहाड़िया किसान अपने-अपने खेतों में अरहर की फसल भी लगा चुके हैं। आने वाले समय में किसानों को दलहन की खेती से काफी लाभ पहुंचेगा।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन व कलस्टर फ्रंटलाइन डिमोंस्ट्रेशन के तहत अमड़ापाड़ा प्रखंड के टुटरापहाड़ी पहाड़ व आसपास गांव में करीब 10 हेक्टेयर की जमीन पर अरहर की खेती शुरू की गयी है। इससे कुल 87 किसान जुड़े हैं। सभी किसान खेतों में अरहर बोने का काम भी पूरा कर चुके हैं। वहीं, लिट्टीपाड़ा प्रखंड के बांड़ू गांव में 10 हेक्टेयर जमीन पर अरहर की खेती शुरू हुई है। इससे 39 किसान जुड़े हैं। पहाड़ी इलाके में यह पहला अवसर है जहां दलहन खेती की शुरुआत हुई है। अमड़ापाड़ा के टुटरीपहाड़ी व लिट्टीपाड़ा के बांड़ू पंचायत के आपपास के गांवों में नक्सलियों का डेरा है। इसलिए सरकार की ओर से जो भी प्रयास किया है वह किसी चुनौती से कम नहीं है। अमड़ापाड़ा व लिट्टीपाड़ा के किसान गांडो पहाड़िया, हादिया पहाड़िया, देवा देहरी, महेन्द्र पहाड़िया, चांदो पहाड़िया, खगेंद्र पहाड़िया, जामा पहाड़िया आदि ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र से फसल लगाने का सफल प्रयास किया गया है। किसान जागरूक हो रहे हैं।
पहाड़िया समुदाय को आर्थिक मजबूती देने की कवायद : कृषि विज्ञान केंद्र महेशपुर से मिली जानकारी के अनुसार दलहन व तेलहन की खेती काफी कम मात्रा में होती है। इसको बढ़ावा देने के उद्देश्य से सुदूरवर्ती पहाड़िया गांवों में प्रयास शुरु किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र का मानना है कि दलहन की खेती में काफी हद तक सफलता मिली है। खेतों में फसल लहलहा रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी इलाके में खेती का मुख्य उद्देश्य पहाड़िया समुदाय के लोगों को जागरूक करना है।
सब्जी की खेती पर भी जोर : कृषि विज्ञान केंद्र महेशपुर की ओर से पहाड़ी इलाके में सब्जी खेती पर भी जोर दिया गया है। हालांकि सब्जी की खेती बहुत वृहत पैमाने पर नहीं हुई है। केंद्र की ओर से लिट्टीपाड़ा प्रखंड के बांड़ू गांव में ही दो हेक्टेयर जमीन पर टमाटर व दो हेक्टेयर भूमि में बैगन की खेती की गयी है। यह सिर्फ प्रयोग मात्र है। इससे जुड़े किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा सुविधा मुहैया कराये जाने से काफी मात्रा में सब्जी की खेती हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि ‘केंद्र सरकार के निर्देश पर दलहन खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। पहाड़िया समुदाय के लोगों को दलहन व तेलहन की खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है। इस बार दो प्रखंड में दलहन की खेती शुरू की गई है। (जागरण से साभार)