दलहन के बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को एनएफएसएम के तहत मिल रही है हर सुविधा

0
556

पंचायत खबर टोली
मऊ : सरकार का प्रयास है कि देश में दलहन की पैदावार बढ़े। इसके लिए कंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत इस साल को सरकार द्वारा दलहन वर्ष के रूप में घोषित किया गया है। साल समाप्त हो रहा है। किसान भाई रबी की बुआई में लगे हुए है। अभी तक जो स्थिति रही है उसमें खाद्य पदार्थों में दलहन की बढ़ती मांग के चलते इसे आयात करना पड़ रहा है। हम आगे चलकर आत्मनिर्भर हों,अपनी जरूरत के अनुरूप दलहन का पैदावार कर सकें इसके लिए सरकार द्वारा इसमें नवीन प्रजातियों के विकास सहित इसके अधिकाधिक उत्पादन के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

pulsesssssssss_oबदलते मौसम में रहें सावधान
खेती किसानी का काम वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद मौसम के मिजाज पर निर्भर है। अभी तक जो मौसम का मिजाज रहा है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मौसम दलहन की फसल के अनुरूप है।   घोषित वर्ष में दलहन की फसल अब तक बहुत ही अच्छी चल रही है। इस दौरान कृषि विभाग भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के माध्यम से इसके विकास में लगा हुआ है। हालाकि अपनी तरफ से किसान भाईयों को कुछ सावधानियां भी बरतनी होगी। देर से वर्षा होने की दशा में बेहतर उत्पादन की ओर बढ़ रही अरहर की फसल के बचाव को लेकर भी व्यापक सचेत रहना होगा। कोहरा के प्रभाव में वृद्धि और कीट-रोग नियंत्रण पर भी फोकस करना होगा। इस दौरान बीज, रसायन व सिंचाई के लिए विभागीय से 50 से 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। इस वर्ष जिले भर में 11 हजार हेक्टेयर में इसका उत्पादन किया जा रहा है।

pppppk_oक्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
उप निदेशक कृषि डा.आशुतोष मिश्र की राय है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन द्वारा दलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसमें किसानों को सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। दलहन की मुख्य फसल अरहर सहित रबी सीजन में चना, मटर व मसूर के उत्पादन बढ़ाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। जिले में 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में उत्पादन किए जाने के दौरान 22 लाख रुपये बीज पर अनुदान दिया जा चुका है। बीज की बोआई के लिए मल्टी क्राप प्लांटर मशीन पर 15 हजार रुपये का अनुदान विभाग द्वारा प्रदान किया जा रहा है। फसल से रोग-कीट के बचाव वाले रसायन कार्बेंडाजिम व थीरम पर 50 प्रतिशत तो बीज शोधन के लिए ट्राइकोडर्मा पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। सिंचाई के लिए एचडीपीई पाइप पर 50 प्रतिशत या अधिकतम 15 हजार रुपये तथा लपेटा पाइप पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। गत की अपेक्षा इस वर्ष 20 प्रतिशत अधिक क्षेत्रफल में इसका उत्पादन किया जा रहा है।

सिंचाई के समय यूरिया जरूर छिड़कें

arhar_2282337fकृषि वैज्ञानिक की राय में किसान भाईयों को कोहरे के वक्त ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।  कोहरा का प्रभाव सघन होते ही अरहर सहित सभी फसल में फूल झड़ने की संभावना बढ़ जाती है। फलीबेधक कीट का प्रभाव भी बढ़ता है जो कोमल फलियों के दानों को भीतर से समाप्त कर देते हैं। ऐसे में फसल की हल्की सिंचाई करने के साथ दो प्रतिशत यूरिया का छिड़काव करने से फूल के गिरावट में व्यापक कमी आ जाती है। कीट का प्रकोप होते ही तत्काल रसायन का प्रयोग करना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here