पंचायत खबर पर मनाये जाने वाले दलहन पखवाड़े में गाजीपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ट वैज्ञानिक डॉ धर्मेंद कुमार सिंह से दलहनी फसलों विशेष रूप से चने के उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलूओं पर बातचीत की पंचायत खबर के रोविंग एडिटर अमितेश सिंह (अवैतनिक) ने। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश…
भारत में चना का क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता क्या है?
भारत मे चना का कुल क्षेत्रफल 68.6 लाख हेक्टेयर,उत्पादन 53.5 लाख टन तथा उत्पादकता 780 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है।
चने की खेती किस प्रकार के जमीन में सफलता पूर्वक की जा सकती है?
चना की खेती बलुई दोमट मिट्टी से लेकर दोमट तथा मटियार भूमि में की जा सकती है। असिंचित और बारानी क्षेत्रों में चना की खेती के लिए चिकनी और चिकनी दोमट भूमि उपयुक्त है।
चना की उकठा अवरोधी प्रजातियां कौन सी हैं?
डी.सी.पी 92—3,के.डब्लू आर 108,जे.जेी.315,जे.जी.16,तथा जे.जी 74 चना की उकठा अवरोधी प्रजातियां हैं।
काबुली चना की नूतन प्रजातियां कौन सी हैं?
जवाहर काबुली—1, पूसा काबुली 1003, चमत्कार बी.जी1053,आई.सी.सी.वी. 2, तथ के.ए.के.2 काबुली चना की नूतन उन्नत प्रजातियां हैं।
काबुली चना की औसत पैदावार कितनी है?
काबुली चना की औसत उत्पादकता 18—20 क्विटल प्रति हेक्टेयर है।
चना में संस्तुत उर्वरक की मात्रा और प्रयोग विधि क्या है?
—चना की अच्छी उपज लेने के लिए 20 किलोग्राम नत्रजन,40 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश, व 20 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है।
—पछेती बुआई की दशा में 40 किलोग्राम नत्रजन,40 किलोग्राम फॉस्फोरस,20 किलोग्राम पोटाश और 20 किलोग्राम गंधक का उपयोग करना चाहिए। बुआई से पहले कुंडो में उर्वरक की पूरी मात्रा का प्रयोग करना लाभप्रद होता है।
— जिन क्षेत्रों में जस्ता की कमी पाई जाती है, वहां 20 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए।
चना में बीज शोधन कैसे करें?
उकठा एवं जड़ विगलन से बचाव के लिए 2.0 ग्रामी थीरम प्लस, 1.0 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधन करना चाहिए।
चना के बीज को राइबोजियम कल्चर से कैसे उपचारित करें?
250 ग्राम का एक पैकैट राइबोजियम कल्चर 10 किलोग्राम बीज को उपचारित करने के लिए पर्याप्त होता है। 50 ग्राम गुड़ अथवा चीनी को आधा लीटर पानी में घोल लेना चाहिए। घोल को गर्म करके ठंढ़ा कर इसमें एक पैकेट राइजोबियम कल्चर को अच्छी तरह से डण्डे से चलाकर मिला देना चाहिए। बाल्टी में 10 किलोग्राम घोल डालकर बीज में मिला देना चाहिए ताकि राइजोबियम कल्चर बीज की सतह पर चिपक जाए। इस प्रकार राइजोबियम कल्चर से सने हुए बीज को कुछ देर तक छाया में सूखा देना चाहिए। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि राइजोबियम से बीजोपचार के बाद कवकनाशी से बीजशोधन न करें।
विभिन्न क्षेत्रों में चना की बुआई का उपयुक्त समय तथा बीज दर क्या है?
बुआई का समय
असिंचित क्षेत्रों में अक्टूबर का दूसरा सप्ताह
सिंचित क्षेत्रों में नवंबर का प्रथम पखवाड़ा में बेहतर है।
बीज दर
बड़े दाने वाली प्रजाति के लिए 80 से 85 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा छोटे दाने वाले प्रजाति के लिए 60 से 65 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जानी चाहिए।
चना की बुआई कैसे करें? इस संबंध में आपकी क्या सलाह होगी?
चने की बुआई देशी हल के पीछे लगे पोरे से कुंडो अथवा सीड ड्रिल से करनी चाहिए। इसके लिए पंक्ति से पंक्ति के बीच की दूरी 30 से.मी तथा पौधे से पौधे के बीच की दूरी 8—10 से.मी रखी जानी चाहिए।
क्या चना के फसल में सिंचाई की आवश्यकता है यदि हां तो कब और कितनी?
चना की खेती असिंचित दशा में की जाती है। यदि पानी की सुविधा हो तो फली बनते समय एक सिचाई अवश्य करनी चाहिए। सिंचित क्षेत्रों में पहली सिंचाई बुआई के 45—60 दिन बाद तथा दूसरी सिंचाई फलियों के दाना बनते समय की जानी चाहिए। लेकिन किसान भाई ध्यान रखें फूल आते समय चना के खेत में सिंचाई बिल्कुल न करें।
अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण ईलाकों में चने की खुटाई की जाती है? आपकी क्या राय है क्या ऐसा किया जाना चाहिए?
जब चने के पौधे लगभग 20 से 25 से.मी के हों तो उसका उपरी भाग तोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से पौधों में शाखाएं अधिक निकलती है। फलस्वरूप उपज में वृद्धि होती है। चना की खुटाई बुआई के 30 से 40 दिन के बीच कर लेना चाहिए। उसके बाद ऐसा करने से फसल को नुकसान हो सकता है।
अंकुरित चना खाने के क्या लाभ है? क्या इससे स्वास्थ्य बेहतर होता है?
अंकुरित चना खाने से विटामिन सी, विटामिन ई तथा लौह तत्व प्राप्त होते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
कहा जाता है कि चना गुणकारी होने के साथ ही काफी उपयोगी भी है। इसका किस तरह से मूल्यवद्र्धन किया जा सकता है?
हम चने का छोला के रूप में, दाल के रूप में, बेसन के रूप में व मीठे पकवान बनाकर उपयोग कर सकते हैं।
किसान की खेती उसके उन्नत बीज पर निर्भर है। किसान भाई चने का उन्नत प्रजातियों के बीज कहां से प्राप्त कर सकते हैं?
हमारे किसान भाईयों के लिए सरकार ने कई स्थानों पर व्यवस्था की है। उन्नत प्रजातियों के बीज विभिन्न शोध संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, बीज एजेंसियों ब्लॉक कार्यालय आदि से प्राप्त किये जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश में यह सुविधा
1. उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के विक्रय केंद्र
2. कृषि विश्वविद्यालय
3. भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान,कानपुर
4.कृषि विज्ञान केंद्र
5. राष्ट्रीय बीज निगम के विक्रय केंद्र
6. ब्लॉक स्तर पर विकास खंड अधिकारी के कार्यालय
7. साधन सहकारी समिति से प्राप्त की जा सकती है।
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