संस्कृति की चेतना जरूरी, स्वार्थ छोड़कर परमार्थ को सोचे: आरिफ मोहम्मद खान

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शाश्वत सिंह

 

“शुद्ध हवा, शुद्ध पानी और शुद्ध आहार की आवश्यकता:गोविंदाचार्य

: अपनी जिंदगी जल, जानवर, जंगल और प्रकृति के साथ तालमेल कर ही अच्छी चल सकती है इसलिए जरूरी है कि हम जो भी कर सकते हैं करें।

 

 

पटना:  पटना के बापू सभागार में आयोजित ‘प्रकृति संवाद बिहार‘ कार्यक्रम अध्यक्षता कर रहे बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने संघ विचारक के एन गोविंदचार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे साधु आदमी हैं।
साथ ही उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वैज्ञानिकों के माने तो प्रकृति लाखों वर्ष पुरानी है। बौद्धिक विकास की अवधि दस हजार साल से भी काम है और संस्कृति का विकास शुरू हुआ। आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि उन्हें इस बात से इनकार नहीं है कि इंद्रप्रस्थ बनाने के लिए खांडवप्रस्थ का विनाश जरूरी होता है। खांडवप्रस्थ में आग लगने के बाद ही संस्कृति बनती है। लेकिन उस संस्कृति की यात्रा कैसी होगी, ये जरूरी है। प्रकृति अपनी रोटी खाना, विकृति दूसरों की रोटी छिन कर खाना और संस्कृति अपनी रोटी दूसरों के साथ साझा करके खाना है। संस्कृति की चेतना ही है की स्वार्थ को छोड़कर परमार्थ के बारे में सोचा जाए।

 

 

 

 

 

“कमजोर, बलहीन प्रतिष्ठा से जीवन गुजारे”
उन्होंने कहा कि शतपथ ब्राह्मण में जिस सभ्य समाज की व्याख्या की गई है, वहां मत्स्य न्याय नहीं होता है। कमजोर, बलहीन भी प्रतिष्ठा के साथ जीवन गुजार सके ये जिम्मेदारी हमारी है।

 

 

“विकास नस्लों का जीवन ‘खांडवप्रस्थ’ न बना दे”
उन्होंने कहा कि विकास के लिए खांडव प्रस्थ को जलना ही होगा, लेकिन ऐसा विकास न हो जो आने वाली नस्लों की जीवन खांडव प्रस्थ न बना दे। विकास हो, लेकिन प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन भी जरूरी है।

 

 

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गीता में सभी धर्म ग्रंथों का निचोड़
इसी क्रम में उन्होंने कहा कि हमारे जितने भी धर्म ग्रंथ है उन सब का निचोड़ भागवत गीता में है।

 

 

 

‘प्रकृति की शक्तियां ही देव’
उन्होंने कहा कि एक शब्द बार-बार आता है देव। प्रकृति की शक्तियां को देव कहा जाता है। फोर्स ऑफ द नेचर।
इस मौके पर देश की जनता को आगाह करते हुए संघ विचारक के एन गोविंदाचार्य ने कहा कि शुद्ध हवा, शुद्ध पानी और शुद्ध आहार आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत आवश्यक है। इसके लिए जो कर सकते हैं कीजिए। अपनी जिंदगी जल, जानवर, जंगल और प्रकृति के साथ तालमेल कर ही अच्छी चल सकती है।

 

 

 

उन्होंने बताया कि वे मिर्जापुर मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने गए थे। वहां लोगों ने बताया कि नीलगाय बड़ी समस्या हो गई है। 50-60 की संख्या में नील गायों का झुंड चुपके से खेतों में आता है और रात में खेत साफ कर चला जाता है। उन्होंने बताया कि खेतों में उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इससे घास और फसल जहरीली होती जा रही है। जिसका सेवन नीलगाय करती हैं। पहले नीलगाय के नवजात बच्चों का शिकार सियारों के अधिक करने से उनकी आबादी बहुत नहीं बढ़ पाती थी। लेकिन अब खेतों में रसायन का उपयोग सियार की आबादी को प्रभावित किया है, और नीलगाय परेशानी बन रहे हैं।

 

 

 

प्रकृति संवाद के इस कार्यक्रम में देश भर से आये प्रकृति प्रेमी, पर्यावरण विद् उपस्थित रहे। साथ ही झारखंड के विधायक और संघ से लंबे समय तक जुड़े रहे सरयू राय ने भी अपनी बात रखी। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे भी प्रकृति केंद्रित विकास मंच, दिल्ली द्वारा आयोजित प्रकृति संवाद कार्यक्रम के समापन सत्र में सम्मिलित हुए।

 

इनपुट: ​नीतीश कुमार

 

 

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