पटाखे है बैन बच्चे है बेचैन तो क्या हुआ…ग्रीन पटाखे है न

0
93
वर्षा वर्मा

—अलग अलग शहरों में सज गई है ग्रीन पटाखों की दुकान… चंडीगढ़ में 12 जगहों पर लगे पटाखों के स्टॉल

green crackers: भारत देश में कई त्योहार बनाए जाते हैं सभी त्योहारों की अपनी मान्यताएं भी है उनमें से ही एक त्योहार दिवाली भी है। यह त्योहार हिन्दू धर्म में काफी धूमधाम से मनाया जाता है और दिवाली के दिन सभी लोग अपने—अपने घरों को सजाते है साथ ही पटाखे भी जलाते है लेकिन कई सालों से पटाखों के कारण प्रदूषण बढ़ जाता है। जिसकी वजह से सरकार ने पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। लेकिन ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति है। यहीं कारण है की दिल्ली, ​हरियाणा और बिहार समेत कई राज्यों में पटाखों पर बैन है लेकिन ग्रीन पटाखों की अनुमति है और दुकानदारों ने दुकानें भी सजा दी है। अगर बात चंडीगढ़ की करें तो वह कुल 96 अधिकृत दुकानों में ग्रीन पटाखों की बिक्री शुरू हो गई है। इन दुकानदारों को पर्यावरण अनुकूल ग्रीन पटाखों की बिक्री की ही अनुमति दी गई है। डीसी ने बिक्री प्रक्रिया पर नजर रखने और अनियमितताओं को रोकने के लिए विशेष निरीक्षण टीमें गठित की गई हैं।

ये भी पढ़े…

बढ़ते प्रदूषण के प्रति सरकार सजग… दिल्ली, हरियाणा और बिहार समेत कई राज्यों में पटाखों पर बैन

निगरानी टीमों का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि दुकानों पर केवल ग्रीन पटाखों ही बिकें। किसी भी प्रकार की अनधिकृत बिक्री पकड़े जाने पर संबंधित दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत दुकानों से ही पटाखे खरीदें और दिवाली पर निर्धारित समय सीमा का पालन करें। चंडीगढ़ में रामदरबार में कार बाजार स्थल, सेक्टर 24 बाल्मिकि मंदिर के पास, सेक्टर 28 गुरूद्वारे के पास, सेक्टर 29 पंप के पास, सेकट्र 30 आरबीआई कॉलोनी के पास, सेक्टर 33 , सेक्टर 37, सेक्टर 43 सेक्टर 46 सेक्टर 49 में पटाखों के स्टॉल लगे हैं जहां से शहरवासी आकर पटाखें खरीद सकते हैं।

राजधानी प्रशासन के आदेश के अनुसार शहरवासी 31 दिसंबर को दिवाली पर रात 8 से 10 बजे और गुरु पर्व पर सुबह 4 से 5 व रात 9 से 10 बजे के बीच ‘ग्रीन पटाखे’ जला सकेंगे। प्रशासन ने हिदायत दी है कि लोग सामान्य पटाखे नहीं जलाएंगे। सिर्फ ग्रीन पटाखे जलाने की ही अनुमति दी है। दूसरे पटाखे या समय के बाद पटाखे जलाते पकड़े जाने पर पुलिस केस भी दर्ज कर सकती है। बता दें कि ग्रीन पटाखे हवा में कम जहरीले कण छोड़ते हैं। जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है। ग्रीन पटाखों पर ‘ग्रीन’ और ‘ई’ मार्किंग होती है। जिससे इन्हें पहचाना जा सकता है

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here