गाजीपुर के इन युवाओं ने ली गायों की जिम्मेवारी, न हो लॉक डाउन में परेशानी

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अमितेश सिंह
रोविंग एडिटर

गाजीपुर: कोरोना महामारी के इस दौर में बचाव का मूल मंत्र है सोशल डिस्टेंसिग और तरीका रखा गया है लॉक डाउन का। लेकिन इंसान को तो ये लॉक डाउन और कोरोना महामारी के खतरे में समझ में आ गए लेकिन इंसान पर निर्भर जर जानवर ये समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो सड़कें, जो बाजार, कल तक इंसानों से गुलजार रहता था और माल म​वेशियों के भोजन की व्यवस्था करता था वो खाली क्यों हैं? और जब मौआर ही परेशान है, अपने—अपने घरों में बंद है तो मवेशी भी चिंता कौन करे। जी हां यह नजारा है गाजीपुर के सब्जी मंडी का। जहां लॉक डाउन के यदि कोई गाय या अन्य जानवर मंडी में किसी किसान या व्यापारी की सब्जी पर मुंह मारने लगे तो लठ लेके दौराना नहीं भूलते थे। लेकिन आज मंडी सूनी पड़ी है। किसानों को किसी गाय या अन्य जानवर का भय नहीं है। लेकिन इन बेजुबानों की खाली पेट भरने का सहारा भी तो ​इंसान ही था और वही इंसान न तो गायों के पीछे लठ लेके भगा रहा है और न ही उसके पीछे भाग रहा है। कुछ इसी तरह का नजारा गाजीपुर के पुरानी सब्जी मंडी में प्रतिदिन शाम 5:00 बजे देखा जा सकता है जहां कई दर्जन गाय इकट्ठा हो जाती हैं और युवाओं की टोली सभी गायों को श्रद्धा भाव से चारा खिलाती नजर आती है।

जी हां, जैसा कि ज्ञात है कि कोविड-19 महामारी का असर इंसानों पर ही नहीं बेजुबानो पर भी पड़ा हुआ है क्योंकि बेजुबान इंसानों के सहारे ही अपनी जिंदगी जीते हैं। लेकिन मौजूदा समय में जब इंसान खुद अपने घरों में कैद हो गया तब इन बेजुबान का कोई भी पूछने वाला नहीं रहा। ऐसे में इन लोगों को तड़पना और भूख से बेहाल हालात को देखकर कुछ युवा आगे आए और फिर यह सिलसिला चल पड़ा और अब प्रतिदिन शाम के 5:00 बजे से क्षेत्र की करीब 40 से 50 गाय भोजन की आस लिए एक जगह इकट्ठा हो जाती हैं और फिर युवाओं का एक-एक कर सभी गायों को चारा देना और फिर पानी के लिए लगाए गए नाद में पानी देना उनकी नित्य की प्रक्रिया बन गई है।


मानवीय सोच रखने वाले गौ सेवक इन युवाओं की टोली को देखकर जब उनसे इस बाबत बात की गई तो टीम को लीड कर रहे विनोद विश्वकर्म बताया कि उनके इस एरिया में पुरानी सब्जी मंडी पिछले कई सालों से चली आ रही है जिसके सहारे दर्जनों गाय को आहार मिला करता था। लेकिन लॉक डाउन के बाद सब्जी मंडी बंद हो जाने के कारण इन गायों का दर्द देखा नहीं गया और फिर कुछ युवाओं ने उसी दिन प्रण लिया और फिर शुरू हो गया गौ सेवा का यह कार्यक्रम जिसके लिए यह लोग प्रतिदिन कुछ पैसा मिला कर सब्जियों को खरीदते हैं फिर उसकी अच्छी तरह से धुलाई कर उसे सैनिटाइज करते हैं और फिर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर शाम 5:00 बजे का इंतजार करते हैं। विशेष बात यह है ​कि जैसे ही 5 बजता है तो गायें खुद एक-एक कर चली आती हैं और फिर यह लोग सभी गायों के सामने चारा और पानी की व्यवस्था करते हैं। यह पूछे जाने ​पर कि यह व्यवस्था कब तक चलाई जाएगी इस टीम के सदस्य अनिल विश्वकर्मा कहते हैं कि हमारा प्रयास है कि जब तक लॉक डाउन चलता रहेगा हम इस व्यवस्था को बनाए रखेंगे। यदि लॉक डाउन खत्म होने के बाद मंडी खुल जाएगी तो स्वाभाविक है कि गायों को चारा मिलने लगेगा। लगे हाथ अनिल यह भी जोड़ते हैं कि न सिर्फ मंडी में बल्कि अन्य जगहों पर भी इस तरह के प्रयास किये जाने चाहिए साथ ही सरकार को भी इस दिशा में व्यवस्था करनी चाहिए ताकि अकस्मात हुए इस लॉक डाउन में गौ माता को भर पेट चारा मिलता रहे।

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