कंटिजेंसी प्लान: गर्मी में पेयजल संकट दूर करने के लिए स्वीकृत हुए 36 में से केवल 5 ट्यूबवेल ही शुरू

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जालोर: गर्मी के मौसम में पेयजल संकट होना आम बात है। आग लगने पर कुंआ खोदने की कहावत जलदाय विभाग पर प्रभावी रूप से लागू होती है। गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से निजात दिलाने को जिले के अलग अलग हिस्सों में स्वीकृत 36 ट्यूबवेल में से अब तक 5 ही खुद पाए हैं। देरी का खामियाजा पेयजल संकट के रूप में आमजन काे भुगतना पड़ रहा हैं। सूत्रों की मानें तो देरी के चलते अब अधिकतर ट्यूबवेल मई अंत या जून मध्य तक ही खुद पाएंगे।

खुदाई के बाद बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन होगा और उसके बाद सप्लाई हो पाएगी। सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते भीषण गर्मी में पेयजल संकट की स्थिति में टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ेगा। विभागीय अधिकारी भी दबी जुबान में स्वीकारते हैं कि प्लान भेजने और उसके बाद प्लान स्वीकृति में देरी से ये स्थिति बनती है। इसमें सुधार होना चाहिए।

कारण- गर्मी में पानी उपलब्ध करवाने विभागीय स्तर पर प्लान तैयार ही देरी से होता है, जिसके बाद स्वीकृति और शुरू होने में भी 2 माह लग जाते हैं।

असर- मार्च से शुरू होने वाली प्रक्रिया अप्रैल-मई अंत तक पूरी होती है। गर्मी भी बढ़ जाती है। ट्यूबवेल समय पर नहीं खुदने से पेयजल संकट की स्थिति।

जालोर- 16 स्वीकृत, 1 ही शुरू

जालोर शहर समेत आसपास के गांवों के लिए 16 नए ट्यूबवेल की खुदाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। एईएन राकेश सैनी ने बताया कि 16 में से 9 बोरवेल खुद चुके हैं, जिसमें से केवल 01 ट्यूबवेल छीपरवाड़ा में शुरू हुआ। स्वीकृत सभी ट्यूबवेल समय पर शुरू हो जाते तो नर्मदा परियोजना में क्लोजर की इस स्थिति में पेयजल स्थिति बेहतर हो पाती।

भीनमाल- 16 में से 4 शुरू हुए

भीनमाल में कंटीजेंसी प्लान के तहत 16 ट्यूबवेल स्वीकृत हुए थे। एक्सईएन हेमंत कुमार ने बताया कि अब तक केवल बैतरना, मणधर, सांवलावास, करवाड़ा में ट्यूबवेल की खुदाई के बाद शुरू हो पाए हैं। शेष 12 स्थानाें के लिए भी काम चल रहा है। विभागीय स्तर पर 19 नए ट्यूबवेल का प्रस्ताव भी अभी भेजा गया है।

सांचौर- चारों का काम बाकी

सांचौर क्षेत्र में नए ट्यूबवेल खुदाई का प्रस्ताव ही अप्रैल माह में भेजा गया। यहां 4 नए ट्यूबवेल खुदने है। एक्सईएन बाबूलाल वर्मा का कहना है कि प्रस्ताव भेजने में देरी के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। अब स्वीकृति मिलने के साथ मई माह के अंत तक ट्यूबवेल की खुदाई के साथ सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।

पीएचईडी Vs डिस्कॉम- दोनों विभागों के बीच बड़ा पेच

जलदाय विभाग के अधिकारी बोरवेल खुदाई के बाद पानी की उपलब्धता होने पर बिजली कनेक्शन के लिए फाइल लगाते हैं। अक्सर जलदाय विभाग की ओर से फाइल लगाने के बाद कनेक्शन में डिस्कॉम की ओर से 15 से 20 दिन का समय लग जाता है। इससे ट्यूबवेल खुदाई के बाद उसे शुरू होने में भी अतिरिक्त समय लगता है।

गड़बड़ी यहां… प्रस्ताव ही फरवरी-मार्च में भेजते हैं

गर्मी शुरू होते ही जालोर जिले में पानी की डिमांड बढ़ जाती है। पश्चिमी राजस्थान में तो पेयजल संकट की स्थिति बनती है। पेयजल समस्या से निजात के लिए सरकार की तरफ से प्लान मांगे जाते हैं, लेकिन ये प्लान मार्च में तैयार होने के बाद भेजे जाते हैं। जिसके बाद स्वीकृति में ही महीनेभर का समय लग जाता है। इस स्थिति में अप्रैल माह शुरू हो जाता है। स्वीकृति के बाद बोरवेल खुदाई और उसके बाद कनेक्शन में एक माह से अधिक का समय लग जाता है। तब तक गर्मी की सीजन के दो माह निकल जाते हैं।

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