सीएम योगी ने रेशम से खेती करने का किसानों का बताया तरीका, किसानों का होगे डबल इनकम

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लखनउ। प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने का प्लान तैयार कर लिया है। सरकार आने वाले वक्त में बड़ी संख्या में किसानों को रेशम की खेती से जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी किसानों को अपने खेत की मेड़ पर शहतूत( रेशम) लगाने की सलाह दी है। इससे किसानों को प्रति 80 हजार रुपये से लेकर 1.25 लाख रुपये की आमदनी हासिल होगी। उत्तर प्रदेश के 57 जिलों में रेशम उत्पादन होता है। इसके कारोबार को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी में एक सिल्क एक्सचेंज भी खोला गया है।

प्रदेश में 350 टन रेशम का होता है उत्पादन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यूपी से जब उत्तराखंड जब अलग हुआ था, तब उत्तर प्रदेश में 22 टन रेशम का उत्पादन होता था. अब प्रदेश में ये उत्पादन बढ़कर 350 टन हो गई है. सरकार अगले 2 से 3 साल में रेशम कारोबार को बूस्ट कर किसानों की आय कई गुना बढ़ाना चाहती है.

कैसे होती है रेशम की खेती

रेशम का उत्पादन शहतूत के पेड़ पर उगाया जाता है. इस पेड़ के पत्तों पर कीट अपने लार से रेशम बनाते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक एक एकड़ में 500 किलोग्राम रेशम के कीटों की जरूरत पड़ती है. सिल्क वर्म की आयु दो से तीन दिन की मानी जाती है. यह रोजाना 200 से 300 अंडा देने की क्षमता रखती है. 10 दिन में अंडे लार्वा निकलता है. लार्वा अपने मुंह से तरल प्रोटीन का स्त्राव करता है. जैसे ही यह प्रोटील हवा के संपर्क में आता है, यह कठोर होकर धागे का रूप ले लेता है. इसे ककून कहते हैं. ककून का उपयोग रेशम बनाने में किया जाता है. गर्म पानी डालने पर ककून पर मौजूद कीट मर जाते हैं. इस ककून को फिर रेशम के रूप में धाला जाता है.

रेशम की खेती में है बंपर मुनाफा

रेशम के इस धागे का इस्तेमाल इस्तेमाल साड़ियां और दुपट्टे को बनाने में किया जाता है. इसके धागे की कीमत 2 हजार से 7 हजार रुपये किलो है. ऐसे में अगर किसान तरीके से रेशम की खेती करे तो कम ही वक्त में लाखों का मुनाफा हासिल कर सकता है

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