बोआई के बाद न दें पानी, 15 दिन पर छिड़कें यूरिया
पंचायत खबर टोली
मऊ : पशुपालन से संबंधित किसानों के लिए यह सचेत होने का समय है। हरा चारा के लिए बरसीम की बोआई का यह श्रेष्ठ काल चल रहा है। बोआई के दौरान गहरी सिंचाई व पलेवा करने के बाद मिट्टी बैठ जाने पर ही बीज का छिड़काव करें। बोआई के बाद बीज जमकर कर बढ़ा होने तक पानी न दें। 15 दिन बाद आवश्यकतानुसार यूरिया का छिड़काव करने की सलाह कृषि विशेषज्ञों ने दी है। इस दौरान खरीफ की मुख्य फसल धान कटाई-मंडाई सहित गेहूं के खेत की तैयारी के प्रति भी सचेत रहने की नसीहत दी है।


जिला वैज्ञानिक सलाहकार व केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.एनके सिंह ने बताया कि बरसीम की बोआई का यह सबसे उत्तम काल चल रहा है। धूप होने की दशा में बीज जमाव के प्रतिशत में आशातीत वृद्धि होगी। बरसीम के खेत में गोबर की खाद का प्रयोग अवश्य करें। इससे हरा चारा में जैविकता की मात्रा का विकास होता है। दुधारू पशुओं के लिए बरसीम में जई व सरसों भी अवश्य डालें। इससे संपूर्ण हरा चारा पशु को प्राप्त हो जाता है। बोआई के 15 दिन बाद ही वृद्धि के लिए यूरिया का प्रयोग करें। इससे पहले अधिक मात्रा में यूरिया डालने से बरसीम के गलने का डर भी बना रहता है। मौसम को देखते हुए डा. सिंह ने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि धान की देर से पकने वाली प्रजातियों में कटाई से पूर्व ही सिंचाई कर देना लाभकारी होगा। इससे गेहूं की बोआई से पूर्व सिंचाई की समस्या का समाधान हो जाएगा।
आलू का मेंड बनाएं मोटी
डा. सिंह ने आलू उत्पादक किसानों सचेत करते हुए कहा की बोआई के समय अालू की मेंड़ मोटी बनाएं। मेंड़ पतली होने से दानों की संख्या के साथ उसकी उत्पादकता भी प्रभावित होती है। आलू की बाेआई से प्रजाति चयन, खेत की गहरी जोताई कराकर खर-पतरवार को निकाल देना चाहिए। बोआई के दौरान आवश्यकता से अधिक उर्वरक के प्रयोग से किसानों को बचना होगा।


