बसपा मुस्लिम कार्ड पर जोरशोर से कायम , मायावती के अफजाल अंसारी मामले पर कुछ नहीं बोलने की क्या है वजह ?

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लखनऊ: यूपी नगर निकाय चुनाव में बसपा अपने मुस्लिम कार्ड पर दमदारी से कायम है। बसपा प्रमुख मायावती ने मुसलमानों को ज्यादा टिकट देने के साथ ही इस मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधा है। वहीं अपने सांसद अफजाल अंसारी की सजा पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन बसपा के सांसद दानिश अली ने अफजाल की सजा को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए इसे ‘मुस्लिम मुक्त विधायिका योजना’ करार दिया है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के बाद से ही बसपा मुसलमानों को अपने पाले में खींचने के लिए जुटी है। उसकी कोशिश है कि विधानसभा चुनाव से छिटका मुसलमान वोट किसी तरह 2024 तक उसकी तरफ आ जाए। नगर निकाय चुनाव में मुसलमानों को ज्यादा टिकट देना बसपा की उसी रणनीति का हिस्सा है। कुल 17 नगर निगमों में 11 में बसपा ने मुसलमान प्रत्याशी उतारे हैं। अब मायावती अपने इस निर्णय को भुनाने की कोशिश में हैं। उन्होंने रविवार को ट्वीट किया कि 17 नगर निगमों में मेयर पद के लिए हो रहे चुनाव में बीएसपी द्वारा मुस्लिम समाज को भी उचित भागीदारी देने को लेकर यहां राजनीति गरमाई हुई है। इससे खासकर जातिवादी और साम्प्रदायिक पार्टियों की नींद उड़ी हुई है। ‘बीएसपी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धांत पर चलने वाली आम्बेडकरवादी पार्टी है। उसी आधार पर यूपी में चार बार अपनी सरकार चलाई। मुस्लिम और अन्य समाज को भी हमेशा उचित प्रतिनिधित्व दिया। अत: लोगों से अपने हित पर ज्यादा व विरोधियों के षड्यंत्र पर ध्यान न देने की अपील है।

2024 की तैयारी है मुस्लिम कार्ड

बसपा प्रमुख के इस बयान से साफ है कि वह नगर निकाय चुनाव में मुस्लिम कार्ड को खुलकर खेलने के मूड में हैं। यही वजह है कि अफजाल अंसारी को सजा हो जाने के बावजूद वह मौन हैं। इससे भी यही इशारा दिया है कि भले ही उनकी सांसदी चली जाए लेकिन पार्टी फिलहाल कोई कार्रवाई करने नहीं जा रही। यहां तक कि बसपा के सांसद दानिश अली ने तो अफजाल के मुद्दे पर भाजपा सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने शनिवार को ट्वीट किया कि ‘विपक्ष मुक्त भारत और मुस्लिम मुक्त विधायिका’ योजना के तहत शीघ्र ही अब अफज़ाल अंसारी की सदस्यता छीन ली जाएगी लेकिन सत्ताधारी पार्टी के सांसदों और विधायकों के मुकदमे सदियों तक चलते रहेंगे… न किसी को सजा होगी और न किसी की सदस्यता छीनी जाएगी। ये है ‘नये भारत’ का नया दस्तूर।

अतीक अहमद पर मायावती की चुप्पी बरकरार

इससे पहले अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता के मुद्दे पर भी मायावती लंबे समय तक मौन रहीं। अंत में जब नामांकन शुरू हो गया और लगा कि वह अब चुनाव नहीं लड़ सकतीं तब मायावती ने कहा कि उनको टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी से अब भी नहीं निकाला। कुल मिलाकर बसपा का मुस्लिम कार्ड लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी है। यदि नगर निकाय चुनाव में कुछ भी मुस्लिम उनके साथ आ जाते हैं तो इसका लाभ लोकसभा चुनाव में मिलेगा।

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