
नयी दिल्ली: इधर उधर की न बात कर…बस ये बता कि कारवां क्यों लूटा
मुझे रहज़नों से गिला नहीं तिरी रहबरी का सवाल है। ये बहुत ही प्रसिद्ध शायरी है। और यही हो रहा है संसद के सुरक्षा के मामले में। देश—दुनिया ने देखा कि कैसे लोकसभा में दो सिरफिरों ने हंगामा काटा और संसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तमाम सवाल अपने साथ छोड़ गये। जाहिर है संसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। ये सवाल मौजू भी हैं।
आखिर किसी विजिटर को संसद परिसर और फिर लोकसभा या राज्यसभा की गैलरी में प्रवेश देने से पहले किस तरह की जांच प्रक्रिया से गुजरनी पड़ती है? सवाल है कि क्या जांच प्रक्रिया इतनी कमजोर है कि दो लोग जूतों में कलर स्मोक स्टिक छिपाकर लोकसभा पहुंच गए? इन सवालों के बीच एक और चौंकाने वाली बात सामने आई जिससे पता चलता है कि संसद की सुरक्षा व्यवस्था कितनी लचर है। जांच में पता चला है कि सागर और मनोरंजन के पास 45 मिनट तक ठहरने का ही विजिटर पास था, लेकिन वो दोनों 2 घंटे तक लोकसभा की दर्शक दीर्घा में ठहरे और आखिर में वहां अफरा-तफरी मचा दी।
लेकिन जब विपक्ष इन सवालों पर सरकार को घेरती है जो कि उसका हक भी है और देश को भी ये जानने का हक है कि आखिर सरकार संसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इतना लचर रूख कैसे अपना सकती है वो भी उस दिन जब संसद पर हुए हमले की बरसी थी। और जब यही मौजू सवाल यानी संसद की सुरक्षा को लेकर विपक्ष सवाल खड़ा करता है, संसद में सरकार को घेरने की कवायद करता है तो संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही रूक जाती है और । टीएमसी सांसद डेरेक ओ-ब्रायन को सभापति जगदीप धनखड़ ने जारी सत्र के बाकी हिस्से के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया जाता है।
दरअसल संसद की सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा के लिए विपक्ष के 28 सदस्यों ने नोटिस दिए थे, लेकिन सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए इसकी इजाजत नहीं दी।
इसके बाद विपक्ष के सांसद सभापति के आसन के ठीक सामने वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे। सभापति ने नारेबाजी कर रहे सांसदों से अपनी सीट पर वापस जाने को कहा। लेकिन अपना विरोध जाता रहे सांसद इसके लिए राजी नहीं हुए। उन्होंने ‘गृहमंत्री सदन में आओ’ ‘जवाब दो जवाब दो’ के नारे लगाए। इस दौरान सभापति ने नारेबाजी कर रहे सांसदों से नाराजगी जताते हुए उन्हें वापस अपनी सीट पर जाने को कहा लेकिन विरोध कर रहे सांसद नहीं माने और लगातार नारेबाजी करते रहे। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, जेडीयू, आप, समेत कई विपक्षी पार्टियों के सांसद सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा को लेकर नारेबाजी करते रहे। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरिक ओ-ब्रायन को सभापति ने तुरंत सदन से निकल जाने का आदेश दिया। इसके बाद सदन की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा। सदन में हंगामा बढ़ता गया और करीब 11 बजकर 20 मिनट पर राज्यसभा की कार्यावाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। अब तक दोनों सदनों के 15 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है।
लेकिन मूल सवाल यही है सरकार सीधे—सीधे जवाब देने की बजाय इधर—उधर की बात कर रही है और जो तथ्य सामने आ रहे हैं वो बड़ी अनहोनी के टल जाने का संकेत दे रहे हैं। अब यह मामला भी सामने आया है कि इस घटना को अंजाम देने के लिए सिरफिरों ने संसद के मानसून सत्र के दौरान रेकी भी की थी और कथित तौर पर अभेद्य माने जाने वाले संसद की सुरक्षा व्यवस्था को काफी लचर पाया था।
दरअसल सिरफिरों ने मानसून सत्र के दौरान और फिर 18 सितंबर को जब संसद के विशेष सत्र के दौरान नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ था उसी दौरान इस बात की रेकी कर ली थी कि संसद भवन में प्रवेश देने से पहले होने वाली जांच में जूते नहीं खुलवाए जाते हैं। यही कारण है कि इन युवाओं ने जूतों में धुआं छोड़ने वाली कलर स्टिक ले जाने का प्लान बनाया और सफल भी रहे। बड़ी बात यह है कि इससे इस बात की भी पोल खुल गई है कि दर्शक दीर्घा के लिए पास बनवाने में सांसद किस तरह का लुंजपुंज रवैया अपनाते हैं। उससे भी बड़ी बात है कि इन सिरफिरों ने पास भी बनवाया तो भाजपा के सांसद प्रताप सिन्हा से जो कर्नाटक के मैसूरु से सांसद हैं। इन्हीं के सिफारिश पर जारी किये गये पास पर मनोरंजन और सागर ने दर्शक दीर्घा से लोकसभा हॉल में प्रवेश किया था। जिन्हें मात्र 45 मिनट तक ठहरने की ही अनुमति थी, लेकिन दोनों दो घंटे रुके। वहीं, नीलम और शिंदे संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
रेकी में ही लग गया था सिक्यॉरिटी सिस्टम में खामी का पता
चिंता की बात है कि इतने भव्य संसद भवन का सिक्यॉरिटी सिस्टम कितना लचर है इसका अंदाजा सिरफिरे समूह के उस व्यक्ति ने तुरंत लगा लिया था जिसने रेकी की थी। उसने पहली बार मानसून सत्र के दौरान और फिर 18 सितंबर को जब संसद के विशेष सत्र के दौरान नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ था। उसे रेकी में ही पता चल गया था कि संसद भवन में प्रवेश देने से पहले होने वाली जांच में जूते नहीं खुलवाए जाते हैं। तभी सिरफिरों के समूह ने जूतों में धुआं छोड़ने वाली कलर स्टिक ले जाने का प्लान बना लिया और वो इसे अंजाम तक पहुंचाने में सफल भी रहे। मनोरंजन और सागर ने दर्शक दीर्घा से लोकसभा हॉल में प्रवेश किया था। दोनों ने कर्नाटक के से भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा की सिफारिश पर अपना विजिटर पास जारी करवाया था। लेकिन दोनों को सिर्फ 45 मिनट तक ठहरने की ही अनुमति थी, लेकिन दोनों दो घंटे रुके। वहीं, नीलम और शिंदे संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
सबसे बड़ी बात है ये सभी अलग—अलग प्रांत के थे। गिरफ्तार किए गए चार लोगों में मैसूर के मनोरंजन डी, लखनऊ के सागर शर्मा, हरियाणा के जिंद की नीलम और महाराष्ट्र के लातूर के अमोल शिंदे शामिल हैं। पुलिस विक्रम उर्फ विक्की शर्मा और उसकी पत्नी से पूछताछ कर रही है, जिसे गुरुग्राम के सेक्टर 7 से पकड़ा गया है। छठे आरोपी बिहार के ललित झा की तलाश की जा रही है जो फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों से बच रहा है।
जाहिर है सवाल बड़े हैं और सरकार ये कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती कि ये लोकसभा और राज्य सभा का मामला है। इसलिए सुरक्षा की जिम्मेवारी भी संसद सेक्रेटारियट की है। ये बात और है कि सीआरपीएफ डीजी अनिश दयाल के नेतृत्व में एक जांच समिति का गठन कर दिया गया है और आरोपियों पर आईपीसी और यूएपीए की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं, आठ पार्लियामेंट स्टाफ को सस्पेंड कर दिया गया है।
लेकिन विपक्षी सदस्य सुरक्षा के मुद्दे पर गृहमंत्री के बयान की मांग कर रहे हैं तो सरकार को इस पर सकारात्मक रूख अख्तियार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए न कि विपक्षी सदस्यों के निलंबन जैसे कई बार आजमाये जा चुके टोटके पर। क्योंकि ये सवाल सरकार के रहबरी का है जिसपर देश की जनता को सवाल पूछने का हक है और चुने गये विपक्षी सांसद भी जनता के रहनुमा हैं।

