केशवरायपाटन। आप रोजगार की तलाश में हैं और किसान अपनी फसलों से मुनाफा चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है। कोटा-लालसोट मेगा हाइवे पर रंगराजपुरा के पास मुंबई की निजी कंपनी बायो सीएनजी और बायोकॉल प्लांट लगा रही है। इस प्रोजेक्ट पर 61 से लेकर 100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस प्लांट से क्षेत्र के 15 हजार किसानों को जोड़ा जाएगा। साथ ही, रोजगार के अवसर मिलेंगे। केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की योजना बना रही है। मीरा क्लीन फ्यूल कंपनी तहसील क्षेत्रों में बायो कोल की 6 से 7 यूनिट ग्राम पंचायत स्तर पर भी लगा रही है। इसमें से एक केशवरायपाटन क्षेत्र में लगेगी। कंपनी की एमपीओ शोभना लोदवाल ने बताया कि इस प्लांट से बायो सीएनजी और बायोकॉल के साथ जैविक खेती भी हो सकेगी। बायो सीएनजी, बायोकॉल और जैविक खाद इन तीनों का नेपियर घास (कच्चे माल) के रूप में उपयोग होगा। कंपनी क्षेत्र में कोटा की श्रीसारणेश्वर क्लीन फ्यूल और श्रीसारणेश्वर फार्मा प्रोड्यूसर कंपनी के नाम से प्लांट लगाएगी। जिसमें श्रीसारणेश्वर फार्मा प्रोड्यूसर (एफपीओ) के माध्यम से पूरे तहसील में 15 हजार किसान जोड़े जाएंगे।
एक एकड़ क्षेत्र में 2 लाख की इनकम होगी
कंपनी का दावा है कि किसान द्वारा लगाई गई नेपियर घास से 1 एकड़ में डेढ़ से 2 लाख तक की आय होगी। जिससे किसान की आय बढ़ेगी और खेती में आर्थिक रूप से सुधार होगा। लोदवाल ने बताया कि नेपियर ज्वार, बाजरा, गन्ना, मक्का से मिश्रित हाइब्रिड बीज है। ऐसा पौधा है, जिसकी कलम एक बार लगाने से 7 से 8 वर्ष तक चलती है। 3 महीने में यह 12 से 15 फीट तक बढ़ती है। साल में 4 बार इसकी कटाई की जा सकती है।
पशु आहार में भी काम आएगी नेपियर घास
नेपियर घास को पशु आहार में भी उपयोग किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि इस घास से पशुओं के दूध में बढ़ोतरी होती है। नेपियर घास वर्षभर की फसल होने के कारण पशुओं को मीठा चारा मिल जाएगा। एमसीएल के इस विजन और मिशन में देश को 2030 तक ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। बढ़ते हुए ग्लोबल वार्मिंग को कम करना, जैविक खेती करवाना और तहसील में 6 से 7 हजार स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिलाना है।
