कहते हैं प्रतिभा परिचय की मुहताज नहीं होती, जहां भी रहे अपनी चमक खुद बिखेरती है। प्रतिभा किसी मुकाम पर जाकर ठहरती नहीं है, वह उस मुकाम को नई ऊंचाई छूने का रास्ता बनाती है और एक दिन अपनी मंजिल पाकर रहती है। प्रतिभा का संघर्ष और लगातार जारी रहता है, जब तक कि उन्हें अपनी मंजिल न मिल जाए। | वैसे भी बिहार तो प्रतिभा की धरती रही है। यहां के प्रतिभाशाली छात्रों ने समय—समय पर देश—विदेश में अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्हीं में से एक हैं बिहार के पूर्णिया जिले के युवा इंजीनियर एवं सोशल इंटरप्रेन्योर सात्विक मिश्रा। सात्विक को उनकी सामाजिक सेवा के लिए “रेक्स कर्मवीर ग्लोबल फ़ेलोशिप 2016” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। गुरुग्राम में आयोजित रेक्स कॉन्क्लेव में शामिल प्रतिभाशालियों में सात्विक अकेले थे, जो ज्ञान की धरती बिहार से शामिल हुए।


पहले भी मिला हैं सम्मान
शिक्षा के क्षेत्र में विगत वर्ष सात्विक ने ओडिशा के एक छोटे से गांव में “एसबीआई यूथ फॉर इंडिया फ़ेलोशिप” के अंर्तगत सराहनीय योगदान दिया, जिससे महुदा (बेरहामपुर) के 500 दलित छात्र लाभान्वित हुए।
नौकरी छोड़ कर रहे समाजिक कार्य
नौकरी छोड़ के सामाजिक कल्याण के लिए दिए एक वर्ष के लिए उन्हें इस पुरष्कार से सम्मानित किया गया। फ़ेलोशिप के अंदर सात्विक ने गांव के एक स्कूल में डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर एजुकेशन , स्ट्रेटेजिक एजुकेशन के अलावा बायोडीजल प्रोजेक्ट पर काम किया है।
सफलता का श्रेय माता पिता को
अपने सफलता का सारा श्रेय सात्विक अपने माता-पिता वीणा मिश्रा एवं सुरेंद्र नाथ मिश्रा को देते हैं। सात्विक के पिता बिहार प्रशासनिक सेवा में संयुंक्त निबंधक से रिटायर्ड हैं एवं माता भाजपा से जुड़ी हुई हैं। सात्विक ने 2015 में रूरल डेवलपमेंट फ़ेलोशिप ज्वाइन करने के लिए एसेन्चयोर में इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी थी। वर्तमान में सात्विक स्पार्क एसोसिएट के तहत पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल के साथ काम कर रहे हैं। सात्विक का कहना है कि वे भविष्य में पब्लिक पालिसी एवं गवर्नेंस फील्ड में ही अग्रसर रहने की सोच रखते हैं।
http://koshixpress.com से साभार
